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Viral Photo: बंदूक से नहीं अंखियों से गोली चला रही हैं कैटरीना कैफ
oya , if eyes could kill #Katrina kaif @TigerZindaHaipic.twitter.com/qLm0FjfQGD
दुनिया के धनी उद्योगपतियों में से एक वारेन बफेट को हुआ कैंसर
दुनिया के सबसे धनी उद्योगपतियों में से एक वारेन बफेट को प्रोस्टेट कैंसर हुआ है। वारेन बफेट ने कहा कि उनका कैंसर जानलेवा नहीं है। बफेट के मुताबिक वह सौ फीसदी स्वस्थ महसूस कर रहे हैं। अपनी बीमारी की जानकारी बफे ने शेयर धारकों को लिखे एक खत में दी। जुलाई में बफे का रेडिएशन उपचार शुरू होगा जो दो महीने तक चलेगा। 81 साल के वारेन बफेट ने चिट्ठी में लिखा है कि उनके कैट स्कैनबोन और एमआरआई से लेकर कई मेडिकल टेस्ट हुए हैं। इन टेस्ट में शरीर के किसी भी दूसरे हिस्से में कैंसर होने की कोई आशंका नहीं जताई गई है। जुलाई में बफे का रेडिएशन उपचार शुरू होगा जो दो महीने तक चलेगा। 81 साल के वारेन बफेट ने चिट्ठी में लिखा है कि उनके कैट स्कैनबोन और एमआरआई से लेकर कई मेडिकल टेस्ट हुए हैं। इन टेस्ट में शरीर के किसी भी दूसरे हिस्से में कैंसर होने की कोई आशंका नहीं जताई गई है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आज लेंगे कैबिनेट की अंतिम बैठक, शनिवार को देंगे इस्तीफा
प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह मंगलवार को अंतिम बार अपने कैबिनेट की बैठक लेने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कैबिनेट के स्टाफ और सहयोगियों के साथ होने जा रही मनमोहन सिंह की इस बैठक में फार्मा सेक्टर में एफडीआई पर चर्चा के बाद उसे मंजूरी दी जा सकती है। वैसे बताया गया है कि प्रधानमंत्री लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के अगले दिन, यानि 17 मई को अपना पद छोड़ देंगे। वहीं, आज पीएमओ के स्टाफ ने प्रधानमंत्री को गर्मजोशी के साथ विदाई दी। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कांग्रेस तथा यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी 14 मई को विदाई रात्रिभोज भी देने जा रही हैं। सू़त्रों के अनुसार रात्रिभोज के दौरान डॉ मनमोहन सिंह को एक स्मृतिचिह्न भी दिया जा सकता है, जिस पर कांग्रेस कार्यसमिति के सभी सदस्यों के अतिरिक्त केंद्रीय मंत्रियों के भी हस्ताक्षर हो सकते हैं। उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव 2014 के लिए मतदान सम्पन्न हो चुका है, और मतगणना 16 मई को होने जा रही है। उन्होंने इस साल के आरंभ में ही अगली बार इस पद की दौड़ में शामिल नहीं होने की घोषणा की थी। डॉ मनमोहन सिंह ने 10 साल तक यूपीए सरकारों की कमान संभाली है, और पद छोड़ने से एक दिन पहले वह राष्ट्र के नाम अपना विदाई भाषण भी देने वाले हैं। कांग्रेस के नेता हमेशा से प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच के संबंधों को आदर्श कार्यविभाजन बताते रहे हैं, जिससे सरकार और पार्टी के बीच तालमेल बना रहा। कांग्रेस हमेशा से कहती रही है कि पार्टी अध्यक्ष ओर प्रधानमंत्री के बीच इससे बेहतर संबंध नहीं हो सकते, और वह इन दोनों के बीच मतभेद की खबरों को अफवाह और दुष्प्रचार कहकर खारिज करती रही है।
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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
प्राइम टाइम इंट्रो : पानी की रेल सिर्फ़ लातूर के लिए ही क्यों?
आप मानें या न मानें, कहने में बुरा लगेगा, थोड़ी तकलीफ भी होगी। ऐसा नहीं है कि पानी की रेल चलाने से लोगों को राहत नहीं पहुंच रही लेकिन पानी की रेल से कितने लोगों को राहत पहुंच रही है, अब एक सख्त सवाल पूछने का वक्त आ गया है। क्या पानी की रेल पूरे सूखाग्रस्त इलाके को कवर करती है या किसी खास शहर तक। जिस शहर में जाती है क्या उस शहर में पानी के वितरण को लेकर स्थिति में बदलाव आया है। महाराष्ट्र सरकार ने अब तक 4500 करोड़ रुपये सूखा राहत में लगा दिये हैं। उनका क्या नतीजा आया है। क्या लोगों को राहत मिल रही है। हम सिर्फ सरकार की वाहवाही या निंदा के फ्रेम में ही सारा कुछ देखने के आदी होते जा रहे हैं। आपको खुद भी सोचना चाहिए कि पानी की रेल और सूखा ग्रस्त इलाकों में पहले से चल रहे पानी के टैंकरों में क्या अंतर है। जैसे पानी की रेल जब लातूर पहुंची तो इसे एक बड़े प्रयास के रूप में दिखाया गया। लेकिन उसी लातूर शहर में सैकड़ों पानी के टैंकर चल रहे थे। फर्क यही है कि वे सारे टैंकर अलग अलग ट्रैक्टरों से खींचे जा रहे थे। पानी की रेल एक कतार में टैंकरों को खींचती हुई चली आ रही थी। इसमें कोई शक नहीं कि दूसरी जगह से पानी भर कर लाने में एक मज़बूत सरकारी इरादा दिखता है लेकिन क्या यह सवाल पूछने का वक्त नहीं आ गया है कि इसके पहुंचने से लातूर शहर में ही क्या बदलाव आया। लातूर शहर की आबादी 5 लाख है। क्या आप जानते हैं कि पानी की रेल सिर्फ लातूर शहर के लिए चली है। गांवों के लिए नहीं चली है। 2011 की जनगणना के अनुसार लातूर के गांवों में 18 लाख की आबादी रहती है। तो यह पानी की रेल चली है 5 लाख की शहरी आबादी के लिए। 18 लाख की ग्रामीण आबादी के लिए क्या हो रहा है इसका कोई वीडियो चलते हुए आपको नहीं दिखेगा। पानी की रेल को ऐसे पेश किया जा रहा है जैसे इसने पहुंच कर पूरे लातूर की आबादी की प्यास बुझाने का काम किया हो। सांतिया ने बताया कि कुछ ही दिन के भीतर टैंकरों के दाम भी बढ़ गए हैं। एक टैंकर का औसत दाम हो गया है 1500 रुपये जो कुछ दिन पहले तक 1200 रुपये था और फरवरी में 500 रुपये प्रति टैंकर था। इसलिए ज़रूरी है कि जो तस्वीर आप देख रहे हैं या जिसकी बार बार बात हो रही है उसे खुरच कर उसकी परतों को भी देखें। यह भी समझिये कि सूखा सिर्फ लातूर में नहीं पड़ा है। लातूर के आसपास के ज़िले परभणी, बीड़, उस्मानाबाद में भी सूखा है लेकिन किसी वजह से सूखे की चर्चा और समाधान के प्रयास का केंद्र लातूर ही बन गया है। इसमें मीडिया की भी कमी हो सकती है लेकिन आपको प्रिंट से लेकर टीवी तक का हिसाब करना होगा। कई पत्रकार लातूर के अलावा भी अन्य जगहों पर गए हैं। पानी की रेल गई भी तो शहर के लिए। गांव के लिए क्या हुआ। यह सोचियेगा क्योंकि सांतिया ने जब लातूर के ज़िला प्रशासन से फोन पर बात की तो उनसे यही कहा गया कि पानी की रेल सिर्फ लातूर शहर के लिए है। तो हमने यही जानने का प्रयास किया कि लातूर शहर के हालात में ही पानी की रेल से क्या बदलाव आया। लातूर के 5 लाख शहरी के लिए कितने लाख लीटर पानी की आवश्यकता है। इस पर ज़िला प्रशासन कहता है कि शहर को हर दिन ढाई करोड़ लीटर पानी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता अतुल देओलेकर का कहना है कि 5 करोड़ लीटर पानी की ज़रूरत है। सिटी कलेक्टर ने हमारी सहयोगी सांतिया को बताया कि इस वक्त अलग अलग ज़रिये से एक करोड़ 20 लाख लीटर पानी की सप्लाई है। इसमें से तीस से चालीस लाख लीटर पानी बोरवेल से आ रहा है। 25 लाख लीटर पानी रेल से आ रहा है। बांध और चेकडैम से चालीस लाख लीटर पानी आ रहा है। पांच लाख लीटर पानी बांध और नदियों की तलहटी की खुदाई कर निकाला जा रहा है। 18 लाख की ग्रामीण आबादी के लिए पानी की रेल नहीं चली है। चली है सिर्फ पांच लाख शहरी आबादी के लिए। गांव के लोगों का सबसे बड़ा कसूर है कि वे ट्वीटर पर नहीं हैं और उन्हें हैशटैग चलाना नहीं आता है। ख़ैर। ढाई करोड़ लीटर पानी चाहिए और इंतज़ाम है 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी का। प्रशासन के दावे के अनुसार जिनता ज़रूरी है उसका आधा पानी ही उपलब्ध है। स्थानीय लोगों ने सांतिया को बताया कि पहले भी निगम वाले पानी का टैंकर आठ से दस दिन के अंतर पर भेजते थे। आज भी आठ से दस दिनों के अंतर पर ही पानी मिल रहा है। प्रशासन का कहना है कि इस वक्त लातूर शहर के लोगों को पानी चार से पांच दिनों के अंतर पर मिल रहा है। सूखे के वक्त पानी का हिसाब सामान्य दिनों से काफी कम लगाया जाता है। इस वक्त के सरकारी पैमाने के अनुसार एक आदमी को हर दिन 20 लीटर पानी दिया जाता है। एक परिवार में चार लोग हुए तो 80 लीटर पानी रोज़ मिलेगा। यह पानी सिर्फ पीने और खाना बनाने के लिए होता है। दस दिन के अंतर से टैंकर आएगा तो 800 लीटर चाहिए। लेकिन निगम की तरफ से दस दिन पर 200 लीटर पानी दिया जा रहा है। पानी चाहिए एक ग्लास। सरकार पहुंचा रही है एक कटोरी। ज़ाहिर है सरकार के पास समंदर तो है नहीं लेकिन पानी की रेल को समंदर भी न समझा जाए। यह भी समझिये कि आठ से दस दिन में जो टैंकर आते हैं वो दो से तीन दिन का ही पानी देकर जाते हैं। ऐसा नहीं है कि सरकारें प्रयास नहीं कर रही होंगी लेकिन आपको समझना यह है कि क्या यह प्रयास पर्याप्त है, कितना बुनियादी हल है, कितना नाम के लिए और कितना दिखावे के लिए। पानी की रेल तो एक ही जगह चली लेकिन ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे सारे सूखाग्रस्त ज़िलों में चल रही है। सांतिया ने प्रशासन से बात कर बताया कि लातूर के करीब 940 गांवों में 17 लाख की आबादी रहती है। गांवों के लिए पानी की रेल नहीं चली है लेकिन सूखा घोषित होने पर 9 चरण यानी 9 काम तय किये गए हैं। इसके तहत नए बोरवेल की खुदाई होती है। पुराने बोरवेल की मरम्मत की जाती है। पहले से मौजूद बोरवेल को गहरा किया जाता है। कुओं की सफाई होती है। हैंडपंपों की मरम्मत की जाती है। अस्थायी तौर से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। लातूर प्रशासन ने सांतिया को फोन से बताया कि पहले सात चरणों के मुताबिक 500 चीजें कर चुके हैं। आठवां काम होता है प्राइवेट बोरवेल को किराये पर लेना। लातूर प्रशासन ने 1200 प्राइवेट बोरवेल किराये पर लिये हैं। 9वां काम है टैंकरों के ज़रिये पानी पहुंचाना। प्रशासन ने 250 गांवों के लिए टैंकर लगाए हैं जिनकी क्षमता 12 हज़ार लीटर से 25,000 होती है। आपको अभी-अभी तो बताया कि 940 गांव हैं लातूर में। 250 गांवों में टैंकर से पानी पहुंचाने की बात हो रही है। इतने दिनों में प्रशासन को कहना चाहिए था कि हमने सारे गांवों के लिए इंतज़ाम किया है। सांतिया जब कुछ दिन पहले ग्रामीण इलाकों को कवर करने गईं थी तब कई गांवों में लोगों ने बताया कि सात सात दिन पर टैंकर आता है। तभी तो टैंकरों के पानी के लिए मारामारी हो रही है। अब आप खुद से याद कीजिए। बाढ़ के समय आपने देखा होगा कि हेलिकाप्टर से राहत सामग्री का पैकेट गिराया जाता है। नीचे कई लोग खड़े हाथ फैलाते हैं। सामान गिराया जाता है और कुछ लोगों के हाथ लगता है और कुछ लोगों के नहीं। हेलिकाप्टर आगे बढ़ जाता है। पानी की रेल की हालत भी यही है। यह टीवी पर तो कमाल का दृश्य पैदा करती है मगर सबकी प्यास नहीं बुझाती है। हमारे सहयोगी सुशील महापात्रा दिल्ली के जंतर मंतर पर गए। वहां पर तेरह राज्यों से आए किसानों ने आज से प्रदर्शन शुरू किया है। ये सभी सूखाग्रस्त इलाकों से चलकर दिल्ली आए हैं। सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष किसान यहां आए हैं। आप सभी को जंतर मंतर जाकर इन किसानों से खुद भी बात करनी चाहिए कि सूखे से उनके जीवन पर क्या असर पड़ता है। सुशील महापात्रा को मध्यप्रदेश से आई एक बुज़ुर्ग महिला ने अपनी हथेली दिखाई। महिला ने कहा कि दूर दूर से पानी का बर्तन भर कर लाने से हाथ में छाले जैसे पड़ गए हैं। महिला ने बताया कि उसे पानी लाने के लिए चार घंटे तक पैदल चलना पड़ता है। साठ साल की उम्र में किसी को चार घंटे पैदल चल कर पानी लाना हो तो उसकी तकलीफ के आगे पानी की रेल का वीडियो दिखाना एक मज़ाक से कम नहीं है। कम से कम यह पानी की रेल यह बताये कि इसके आने से लोगों का पानी के लिए चार चार घंटे पैदल चलना बंद हो गया है। गुजरात से आई एक महिला भी यही शिकायत कर रही थी। इन्होंने बताया कि पंद्रह किमी तक पानी के लिए चलना पड़ता है। आपको वाकई हैरानी होनी चाहिए और बिल्कुल यकीन नहीं करना चाहिए कि पानी के लिए किसी को पंद्रह किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है। तभी तो ये महिलाएं आईं हैं आपको दिखाने और बताने के लिए। कई लोग बात करते हुए भावुक हो गए और क्रोधित भी। खैर पानी की रेल एक और जगह गई है। आप जानते हैं मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में भयंकर सूखा है। बुंदेलखंड के लिए आज केंद्र सरकार ने पानी की एक ट्रेन झांसी भेज दी। किसी ने यह तक नहीं देखा कि जो टैंकर झांसी स्टेशन पर खड़े हैं वो खड़े हैं या नहीं लेकिन राजनीति शुरू हो गई। यूपी के मुख्यमत्री अखिलेश यादव ने पानी की रेल लेने से मना कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि पानी की रेल भेजने से पहले किसी ने ज़िला प्रशासन से पूछा तक नहीं कि पानी चाहिए या नहीं। अगर यह तथ्यात्मक रूप से सही है तो कायदे से राज्य को बताना तो चाहिए था। यूपी सरकार का कहना है कि ट्रेन पहुंचने के बाद रेलवे ने सूचना दी। यही नहीं अखिलेश सरकार ने 10000 टैंकर मांगे थे। पानी नहीं। पानी राज्य के पास है। बीजेपी ने भी जवाब देने में देरी नहीं की। बीजेपी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार को पानी पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब पानी की ट्रेन गई है तो पानी को वापस करना ग़लत है। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी कहा कि बुंदेलखंड के बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की किल्लत की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया। उमा भारती ने अखिलेश सरकार को इस सिलसिले में एक चिट्ठी भी लिख दी, लेकिन शाम होते होते पता चला कि जो ट्रेन झांसी गई है वो तो खाली है। उसमें पानी नहीं है। ख़ाली टैंकर को लेकर इतना बवाल हो गया है। टीवी चैनलों पर सबके इंटरव्यू चलने लगे और जमकर आरोप-प्रत्यारोप हो गए जैसे सूखे को लेकर मतदान होने वाला है। झांसी के ज़िलाधिकारी अजय शुक्ला कई लोगों के सामने टैंकरों को ठोक ठोक कर बताने लगे कि ट्रेन तो खाली आई है। इसमें पानी नहीं है। जबकि बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि पानी की रेल आई है तो पानी लेना चाहिए। उमा भारती ने कहा कि बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की कमी की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया है। दोनों ही बातों की जांच होनी चाहिए। क्या पानी सांसदों की मांग पर भेजा गया। क्या रेल मंत्रालय ने ज़िला प्रशासन को पहले सूचना दी थी या नहीं। क्योंकि लातूर के अनुभव से आपने देखा कि पानी की रेल अब एक विजुअल सिंबल बन गई है। इसका एक शानदार सीन बनता है कि रेल से पानी पहुंचा दी गई है। दिल्ली ने भी महाराष्ट्र को पानी भेजना का प्रस्ताव दिया था। काफी मज़ाक उड़ा और महाराष्ट्र सरकार ने मना भी कर दिया। सूखा तो मध्य प्रदेश में भी है। मध्य प्रदेश के रतलाम से टैंकर झांसी चले गए। क्या मध्यप्रदेश के इलाकों में गए। यूपी में चुनाव भी तो होने वाला है। दोनों पक्षों ने तथ्यों का सही पता लगाए बहस को जन जन तक पहुंचा दिया ताकि मैसेज जाए कि सूखाग्रस्त इलाकों के लिए बड़ा भारी काम किया जा रहा है। सूखे का मतलब सिर्फ पानी का संकट नहीं है। रोज़गार का भी संकट है। खेती नहीं हुई है। किसान का कर्ज़ा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 30 मई को चुकाए जाने वाले कर्ज को अब अगले पांच साल तक चुकाया जा सकेगा। सरकार पहले साल का 12 फीसदी ब्याज भी भरेगी। इस पर पांच हज़ार करोड़ खर्च होंगे। लातूर के अतुल देवलेकर ने एक गांव में सर्वे किया है। उन्होंने पाया कि एक गांव में 55 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो आत्महत्या के कगार पर हैं। उनके पास न तो आमदनी है न आमदनी की आस। बारिश हो भी जाए तो वे क्या करेंगे। सरकार ने कुछ जगहों पर सूखाग्रस्त इलाकों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवज़ा बांटे हैं लेकिन यह मुआवज़ा सिर्फ ज़मीन के मालिकों को मिलता है। ज़मीन पर काम करने वाले भूमिहीन मज़दूरों या गांव के अन्य लोगों को नहीं मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। जैसे पानी की रेल जब लातूर पहुंची तो इसे एक बड़े प्रयास के रूप में दिखाया गया। लेकिन उसी लातूर शहर में सैकड़ों पानी के टैंकर चल रहे थे। फर्क यही है कि वे सारे टैंकर अलग अलग ट्रैक्टरों से खींचे जा रहे थे। पानी की रेल एक कतार में टैंकरों को खींचती हुई चली आ रही थी। इसमें कोई शक नहीं कि दूसरी जगह से पानी भर कर लाने में एक मज़बूत सरकारी इरादा दिखता है लेकिन क्या यह सवाल पूछने का वक्त नहीं आ गया है कि इसके पहुंचने से लातूर शहर में ही क्या बदलाव आया। लातूर शहर की आबादी 5 लाख है। क्या आप जानते हैं कि पानी की रेल सिर्फ लातूर शहर के लिए चली है। गांवों के लिए नहीं चली है। 2011 की जनगणना के अनुसार लातूर के गांवों में 18 लाख की आबादी रहती है। तो यह पानी की रेल चली है 5 लाख की शहरी आबादी के लिए। 18 लाख की ग्रामीण आबादी के लिए क्या हो रहा है इसका कोई वीडियो चलते हुए आपको नहीं दिखेगा। पानी की रेल को ऐसे पेश किया जा रहा है जैसे इसने पहुंच कर पूरे लातूर की आबादी की प्यास बुझाने का काम किया हो। सांतिया ने बताया कि कुछ ही दिन के भीतर टैंकरों के दाम भी बढ़ गए हैं। एक टैंकर का औसत दाम हो गया है 1500 रुपये जो कुछ दिन पहले तक 1200 रुपये था और फरवरी में 500 रुपये प्रति टैंकर था। इसलिए ज़रूरी है कि जो तस्वीर आप देख रहे हैं या जिसकी बार बार बात हो रही है उसे खुरच कर उसकी परतों को भी देखें। यह भी समझिये कि सूखा सिर्फ लातूर में नहीं पड़ा है। लातूर के आसपास के ज़िले परभणी, बीड़, उस्मानाबाद में भी सूखा है लेकिन किसी वजह से सूखे की चर्चा और समाधान के प्रयास का केंद्र लातूर ही बन गया है। इसमें मीडिया की भी कमी हो सकती है लेकिन आपको प्रिंट से लेकर टीवी तक का हिसाब करना होगा। कई पत्रकार लातूर के अलावा भी अन्य जगहों पर गए हैं। पानी की रेल गई भी तो शहर के लिए। गांव के लिए क्या हुआ। यह सोचियेगा क्योंकि सांतिया ने जब लातूर के ज़िला प्रशासन से फोन पर बात की तो उनसे यही कहा गया कि पानी की रेल सिर्फ लातूर शहर के लिए है। तो हमने यही जानने का प्रयास किया कि लातूर शहर के हालात में ही पानी की रेल से क्या बदलाव आया। लातूर के 5 लाख शहरी के लिए कितने लाख लीटर पानी की आवश्यकता है। इस पर ज़िला प्रशासन कहता है कि शहर को हर दिन ढाई करोड़ लीटर पानी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता अतुल देओलेकर का कहना है कि 5 करोड़ लीटर पानी की ज़रूरत है। सिटी कलेक्टर ने हमारी सहयोगी सांतिया को बताया कि इस वक्त अलग अलग ज़रिये से एक करोड़ 20 लाख लीटर पानी की सप्लाई है। इसमें से तीस से चालीस लाख लीटर पानी बोरवेल से आ रहा है। 25 लाख लीटर पानी रेल से आ रहा है। बांध और चेकडैम से चालीस लाख लीटर पानी आ रहा है। पांच लाख लीटर पानी बांध और नदियों की तलहटी की खुदाई कर निकाला जा रहा है। 18 लाख की ग्रामीण आबादी के लिए पानी की रेल नहीं चली है। चली है सिर्फ पांच लाख शहरी आबादी के लिए। गांव के लोगों का सबसे बड़ा कसूर है कि वे ट्वीटर पर नहीं हैं और उन्हें हैशटैग चलाना नहीं आता है। ख़ैर। ढाई करोड़ लीटर पानी चाहिए और इंतज़ाम है 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी का। प्रशासन के दावे के अनुसार जिनता ज़रूरी है उसका आधा पानी ही उपलब्ध है। स्थानीय लोगों ने सांतिया को बताया कि पहले भी निगम वाले पानी का टैंकर आठ से दस दिन के अंतर पर भेजते थे। आज भी आठ से दस दिनों के अंतर पर ही पानी मिल रहा है। प्रशासन का कहना है कि इस वक्त लातूर शहर के लोगों को पानी चार से पांच दिनों के अंतर पर मिल रहा है। सूखे के वक्त पानी का हिसाब सामान्य दिनों से काफी कम लगाया जाता है। इस वक्त के सरकारी पैमाने के अनुसार एक आदमी को हर दिन 20 लीटर पानी दिया जाता है। एक परिवार में चार लोग हुए तो 80 लीटर पानी रोज़ मिलेगा। यह पानी सिर्फ पीने और खाना बनाने के लिए होता है। दस दिन के अंतर से टैंकर आएगा तो 800 लीटर चाहिए। लेकिन निगम की तरफ से दस दिन पर 200 लीटर पानी दिया जा रहा है। पानी चाहिए एक ग्लास। सरकार पहुंचा रही है एक कटोरी। ज़ाहिर है सरकार के पास समंदर तो है नहीं लेकिन पानी की रेल को समंदर भी न समझा जाए। यह भी समझिये कि आठ से दस दिन में जो टैंकर आते हैं वो दो से तीन दिन का ही पानी देकर जाते हैं। ऐसा नहीं है कि सरकारें प्रयास नहीं कर रही होंगी लेकिन आपको समझना यह है कि क्या यह प्रयास पर्याप्त है, कितना बुनियादी हल है, कितना नाम के लिए और कितना दिखावे के लिए। पानी की रेल तो एक ही जगह चली लेकिन ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे सारे सूखाग्रस्त ज़िलों में चल रही है। सांतिया ने प्रशासन से बात कर बताया कि लातूर के करीब 940 गांवों में 17 लाख की आबादी रहती है। गांवों के लिए पानी की रेल नहीं चली है लेकिन सूखा घोषित होने पर 9 चरण यानी 9 काम तय किये गए हैं। इसके तहत नए बोरवेल की खुदाई होती है। पुराने बोरवेल की मरम्मत की जाती है। पहले से मौजूद बोरवेल को गहरा किया जाता है। कुओं की सफाई होती है। हैंडपंपों की मरम्मत की जाती है। अस्थायी तौर से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। लातूर प्रशासन ने सांतिया को फोन से बताया कि पहले सात चरणों के मुताबिक 500 चीजें कर चुके हैं। आठवां काम होता है प्राइवेट बोरवेल को किराये पर लेना। लातूर प्रशासन ने 1200 प्राइवेट बोरवेल किराये पर लिये हैं। 9वां काम है टैंकरों के ज़रिये पानी पहुंचाना। प्रशासन ने 250 गांवों के लिए टैंकर लगाए हैं जिनकी क्षमता 12 हज़ार लीटर से 25,000 होती है। आपको अभी-अभी तो बताया कि 940 गांव हैं लातूर में। 250 गांवों में टैंकर से पानी पहुंचाने की बात हो रही है। इतने दिनों में प्रशासन को कहना चाहिए था कि हमने सारे गांवों के लिए इंतज़ाम किया है। सांतिया जब कुछ दिन पहले ग्रामीण इलाकों को कवर करने गईं थी तब कई गांवों में लोगों ने बताया कि सात सात दिन पर टैंकर आता है। तभी तो टैंकरों के पानी के लिए मारामारी हो रही है। अब आप खुद से याद कीजिए। बाढ़ के समय आपने देखा होगा कि हेलिकाप्टर से राहत सामग्री का पैकेट गिराया जाता है। नीचे कई लोग खड़े हाथ फैलाते हैं। सामान गिराया जाता है और कुछ लोगों के हाथ लगता है और कुछ लोगों के नहीं। हेलिकाप्टर आगे बढ़ जाता है। पानी की रेल की हालत भी यही है। यह टीवी पर तो कमाल का दृश्य पैदा करती है मगर सबकी प्यास नहीं बुझाती है। हमारे सहयोगी सुशील महापात्रा दिल्ली के जंतर मंतर पर गए। वहां पर तेरह राज्यों से आए किसानों ने आज से प्रदर्शन शुरू किया है। ये सभी सूखाग्रस्त इलाकों से चलकर दिल्ली आए हैं। सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष किसान यहां आए हैं। आप सभी को जंतर मंतर जाकर इन किसानों से खुद भी बात करनी चाहिए कि सूखे से उनके जीवन पर क्या असर पड़ता है। सुशील महापात्रा को मध्यप्रदेश से आई एक बुज़ुर्ग महिला ने अपनी हथेली दिखाई। महिला ने कहा कि दूर दूर से पानी का बर्तन भर कर लाने से हाथ में छाले जैसे पड़ गए हैं। महिला ने बताया कि उसे पानी लाने के लिए चार घंटे तक पैदल चलना पड़ता है। साठ साल की उम्र में किसी को चार घंटे पैदल चल कर पानी लाना हो तो उसकी तकलीफ के आगे पानी की रेल का वीडियो दिखाना एक मज़ाक से कम नहीं है। कम से कम यह पानी की रेल यह बताये कि इसके आने से लोगों का पानी के लिए चार चार घंटे पैदल चलना बंद हो गया है। गुजरात से आई एक महिला भी यही शिकायत कर रही थी। इन्होंने बताया कि पंद्रह किमी तक पानी के लिए चलना पड़ता है। आपको वाकई हैरानी होनी चाहिए और बिल्कुल यकीन नहीं करना चाहिए कि पानी के लिए किसी को पंद्रह किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है। तभी तो ये महिलाएं आईं हैं आपको दिखाने और बताने के लिए। कई लोग बात करते हुए भावुक हो गए और क्रोधित भी। खैर पानी की रेल एक और जगह गई है। आप जानते हैं मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में भयंकर सूखा है। बुंदेलखंड के लिए आज केंद्र सरकार ने पानी की एक ट्रेन झांसी भेज दी। किसी ने यह तक नहीं देखा कि जो टैंकर झांसी स्टेशन पर खड़े हैं वो खड़े हैं या नहीं लेकिन राजनीति शुरू हो गई। यूपी के मुख्यमत्री अखिलेश यादव ने पानी की रेल लेने से मना कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि पानी की रेल भेजने से पहले किसी ने ज़िला प्रशासन से पूछा तक नहीं कि पानी चाहिए या नहीं। अगर यह तथ्यात्मक रूप से सही है तो कायदे से राज्य को बताना तो चाहिए था। यूपी सरकार का कहना है कि ट्रेन पहुंचने के बाद रेलवे ने सूचना दी। यही नहीं अखिलेश सरकार ने 10000 टैंकर मांगे थे। पानी नहीं। पानी राज्य के पास है। बीजेपी ने भी जवाब देने में देरी नहीं की। बीजेपी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार को पानी पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब पानी की ट्रेन गई है तो पानी को वापस करना ग़लत है। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी कहा कि बुंदेलखंड के बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की किल्लत की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया। उमा भारती ने अखिलेश सरकार को इस सिलसिले में एक चिट्ठी भी लिख दी, लेकिन शाम होते होते पता चला कि जो ट्रेन झांसी गई है वो तो खाली है। उसमें पानी नहीं है। ख़ाली टैंकर को लेकर इतना बवाल हो गया है। टीवी चैनलों पर सबके इंटरव्यू चलने लगे और जमकर आरोप-प्रत्यारोप हो गए जैसे सूखे को लेकर मतदान होने वाला है। झांसी के ज़िलाधिकारी अजय शुक्ला कई लोगों के सामने टैंकरों को ठोक ठोक कर बताने लगे कि ट्रेन तो खाली आई है। इसमें पानी नहीं है। जबकि बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि पानी की रेल आई है तो पानी लेना चाहिए। उमा भारती ने कहा कि बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की कमी की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया है। दोनों ही बातों की जांच होनी चाहिए। क्या पानी सांसदों की मांग पर भेजा गया। क्या रेल मंत्रालय ने ज़िला प्रशासन को पहले सूचना दी थी या नहीं। क्योंकि लातूर के अनुभव से आपने देखा कि पानी की रेल अब एक विजुअल सिंबल बन गई है। इसका एक शानदार सीन बनता है कि रेल से पानी पहुंचा दी गई है। दिल्ली ने भी महाराष्ट्र को पानी भेजना का प्रस्ताव दिया था। काफी मज़ाक उड़ा और महाराष्ट्र सरकार ने मना भी कर दिया। सूखा तो मध्य प्रदेश में भी है। मध्य प्रदेश के रतलाम से टैंकर झांसी चले गए। क्या मध्यप्रदेश के इलाकों में गए। यूपी में चुनाव भी तो होने वाला है। दोनों पक्षों ने तथ्यों का सही पता लगाए बहस को जन जन तक पहुंचा दिया ताकि मैसेज जाए कि सूखाग्रस्त इलाकों के लिए बड़ा भारी काम किया जा रहा है। सूखे का मतलब सिर्फ पानी का संकट नहीं है। रोज़गार का भी संकट है। खेती नहीं हुई है। किसान का कर्ज़ा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 30 मई को चुकाए जाने वाले कर्ज को अब अगले पांच साल तक चुकाया जा सकेगा। सरकार पहले साल का 12 फीसदी ब्याज भी भरेगी। इस पर पांच हज़ार करोड़ खर्च होंगे। लातूर के अतुल देवलेकर ने एक गांव में सर्वे किया है। उन्होंने पाया कि एक गांव में 55 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो आत्महत्या के कगार पर हैं। उनके पास न तो आमदनी है न आमदनी की आस। बारिश हो भी जाए तो वे क्या करेंगे। सरकार ने कुछ जगहों पर सूखाग्रस्त इलाकों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवज़ा बांटे हैं लेकिन यह मुआवज़ा सिर्फ ज़मीन के मालिकों को मिलता है। ज़मीन पर काम करने वाले भूमिहीन मज़दूरों या गांव के अन्य लोगों को नहीं मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। इसलिए ज़रूरी है कि जो तस्वीर आप देख रहे हैं या जिसकी बार बार बात हो रही है उसे खुरच कर उसकी परतों को भी देखें। यह भी समझिये कि सूखा सिर्फ लातूर में नहीं पड़ा है। लातूर के आसपास के ज़िले परभणी, बीड़, उस्मानाबाद में भी सूखा है लेकिन किसी वजह से सूखे की चर्चा और समाधान के प्रयास का केंद्र लातूर ही बन गया है। इसमें मीडिया की भी कमी हो सकती है लेकिन आपको प्रिंट से लेकर टीवी तक का हिसाब करना होगा। कई पत्रकार लातूर के अलावा भी अन्य जगहों पर गए हैं। पानी की रेल गई भी तो शहर के लिए। गांव के लिए क्या हुआ। यह सोचियेगा क्योंकि सांतिया ने जब लातूर के ज़िला प्रशासन से फोन पर बात की तो उनसे यही कहा गया कि पानी की रेल सिर्फ लातूर शहर के लिए है। तो हमने यही जानने का प्रयास किया कि लातूर शहर के हालात में ही पानी की रेल से क्या बदलाव आया। लातूर के 5 लाख शहरी के लिए कितने लाख लीटर पानी की आवश्यकता है। इस पर ज़िला प्रशासन कहता है कि शहर को हर दिन ढाई करोड़ लीटर पानी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता अतुल देओलेकर का कहना है कि 5 करोड़ लीटर पानी की ज़रूरत है। सिटी कलेक्टर ने हमारी सहयोगी सांतिया को बताया कि इस वक्त अलग अलग ज़रिये से एक करोड़ 20 लाख लीटर पानी की सप्लाई है। इसमें से तीस से चालीस लाख लीटर पानी बोरवेल से आ रहा है। 25 लाख लीटर पानी रेल से आ रहा है। बांध और चेकडैम से चालीस लाख लीटर पानी आ रहा है। पांच लाख लीटर पानी बांध और नदियों की तलहटी की खुदाई कर निकाला जा रहा है। 18 लाख की ग्रामीण आबादी के लिए पानी की रेल नहीं चली है। चली है सिर्फ पांच लाख शहरी आबादी के लिए। गांव के लोगों का सबसे बड़ा कसूर है कि वे ट्वीटर पर नहीं हैं और उन्हें हैशटैग चलाना नहीं आता है। ख़ैर। ढाई करोड़ लीटर पानी चाहिए और इंतज़ाम है 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी का। प्रशासन के दावे के अनुसार जिनता ज़रूरी है उसका आधा पानी ही उपलब्ध है। स्थानीय लोगों ने सांतिया को बताया कि पहले भी निगम वाले पानी का टैंकर आठ से दस दिन के अंतर पर भेजते थे। आज भी आठ से दस दिनों के अंतर पर ही पानी मिल रहा है। प्रशासन का कहना है कि इस वक्त लातूर शहर के लोगों को पानी चार से पांच दिनों के अंतर पर मिल रहा है। सूखे के वक्त पानी का हिसाब सामान्य दिनों से काफी कम लगाया जाता है। इस वक्त के सरकारी पैमाने के अनुसार एक आदमी को हर दिन 20 लीटर पानी दिया जाता है। एक परिवार में चार लोग हुए तो 80 लीटर पानी रोज़ मिलेगा। यह पानी सिर्फ पीने और खाना बनाने के लिए होता है। दस दिन के अंतर से टैंकर आएगा तो 800 लीटर चाहिए। लेकिन निगम की तरफ से दस दिन पर 200 लीटर पानी दिया जा रहा है। पानी चाहिए एक ग्लास। सरकार पहुंचा रही है एक कटोरी। ज़ाहिर है सरकार के पास समंदर तो है नहीं लेकिन पानी की रेल को समंदर भी न समझा जाए। यह भी समझिये कि आठ से दस दिन में जो टैंकर आते हैं वो दो से तीन दिन का ही पानी देकर जाते हैं। ऐसा नहीं है कि सरकारें प्रयास नहीं कर रही होंगी लेकिन आपको समझना यह है कि क्या यह प्रयास पर्याप्त है, कितना बुनियादी हल है, कितना नाम के लिए और कितना दिखावे के लिए। पानी की रेल तो एक ही जगह चली लेकिन ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे सारे सूखाग्रस्त ज़िलों में चल रही है। सांतिया ने प्रशासन से बात कर बताया कि लातूर के करीब 940 गांवों में 17 लाख की आबादी रहती है। गांवों के लिए पानी की रेल नहीं चली है लेकिन सूखा घोषित होने पर 9 चरण यानी 9 काम तय किये गए हैं। इसके तहत नए बोरवेल की खुदाई होती है। पुराने बोरवेल की मरम्मत की जाती है। पहले से मौजूद बोरवेल को गहरा किया जाता है। कुओं की सफाई होती है। हैंडपंपों की मरम्मत की जाती है। अस्थायी तौर से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। लातूर प्रशासन ने सांतिया को फोन से बताया कि पहले सात चरणों के मुताबिक 500 चीजें कर चुके हैं। आठवां काम होता है प्राइवेट बोरवेल को किराये पर लेना। लातूर प्रशासन ने 1200 प्राइवेट बोरवेल किराये पर लिये हैं। 9वां काम है टैंकरों के ज़रिये पानी पहुंचाना। प्रशासन ने 250 गांवों के लिए टैंकर लगाए हैं जिनकी क्षमता 12 हज़ार लीटर से 25,000 होती है। आपको अभी-अभी तो बताया कि 940 गांव हैं लातूर में। 250 गांवों में टैंकर से पानी पहुंचाने की बात हो रही है। इतने दिनों में प्रशासन को कहना चाहिए था कि हमने सारे गांवों के लिए इंतज़ाम किया है। सांतिया जब कुछ दिन पहले ग्रामीण इलाकों को कवर करने गईं थी तब कई गांवों में लोगों ने बताया कि सात सात दिन पर टैंकर आता है। तभी तो टैंकरों के पानी के लिए मारामारी हो रही है। अब आप खुद से याद कीजिए। बाढ़ के समय आपने देखा होगा कि हेलिकाप्टर से राहत सामग्री का पैकेट गिराया जाता है। नीचे कई लोग खड़े हाथ फैलाते हैं। सामान गिराया जाता है और कुछ लोगों के हाथ लगता है और कुछ लोगों के नहीं। हेलिकाप्टर आगे बढ़ जाता है। पानी की रेल की हालत भी यही है। यह टीवी पर तो कमाल का दृश्य पैदा करती है मगर सबकी प्यास नहीं बुझाती है। हमारे सहयोगी सुशील महापात्रा दिल्ली के जंतर मंतर पर गए। वहां पर तेरह राज्यों से आए किसानों ने आज से प्रदर्शन शुरू किया है। ये सभी सूखाग्रस्त इलाकों से चलकर दिल्ली आए हैं। सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष किसान यहां आए हैं। आप सभी को जंतर मंतर जाकर इन किसानों से खुद भी बात करनी चाहिए कि सूखे से उनके जीवन पर क्या असर पड़ता है। सुशील महापात्रा को मध्यप्रदेश से आई एक बुज़ुर्ग महिला ने अपनी हथेली दिखाई। महिला ने कहा कि दूर दूर से पानी का बर्तन भर कर लाने से हाथ में छाले जैसे पड़ गए हैं। महिला ने बताया कि उसे पानी लाने के लिए चार घंटे तक पैदल चलना पड़ता है। साठ साल की उम्र में किसी को चार घंटे पैदल चल कर पानी लाना हो तो उसकी तकलीफ के आगे पानी की रेल का वीडियो दिखाना एक मज़ाक से कम नहीं है। कम से कम यह पानी की रेल यह बताये कि इसके आने से लोगों का पानी के लिए चार चार घंटे पैदल चलना बंद हो गया है। गुजरात से आई एक महिला भी यही शिकायत कर रही थी। इन्होंने बताया कि पंद्रह किमी तक पानी के लिए चलना पड़ता है। आपको वाकई हैरानी होनी चाहिए और बिल्कुल यकीन नहीं करना चाहिए कि पानी के लिए किसी को पंद्रह किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है। तभी तो ये महिलाएं आईं हैं आपको दिखाने और बताने के लिए। कई लोग बात करते हुए भावुक हो गए और क्रोधित भी। खैर पानी की रेल एक और जगह गई है। आप जानते हैं मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में भयंकर सूखा है। बुंदेलखंड के लिए आज केंद्र सरकार ने पानी की एक ट्रेन झांसी भेज दी। किसी ने यह तक नहीं देखा कि जो टैंकर झांसी स्टेशन पर खड़े हैं वो खड़े हैं या नहीं लेकिन राजनीति शुरू हो गई। यूपी के मुख्यमत्री अखिलेश यादव ने पानी की रेल लेने से मना कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि पानी की रेल भेजने से पहले किसी ने ज़िला प्रशासन से पूछा तक नहीं कि पानी चाहिए या नहीं। अगर यह तथ्यात्मक रूप से सही है तो कायदे से राज्य को बताना तो चाहिए था। यूपी सरकार का कहना है कि ट्रेन पहुंचने के बाद रेलवे ने सूचना दी। यही नहीं अखिलेश सरकार ने 10000 टैंकर मांगे थे। पानी नहीं। पानी राज्य के पास है। बीजेपी ने भी जवाब देने में देरी नहीं की। बीजेपी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार को पानी पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब पानी की ट्रेन गई है तो पानी को वापस करना ग़लत है। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी कहा कि बुंदेलखंड के बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की किल्लत की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया। उमा भारती ने अखिलेश सरकार को इस सिलसिले में एक चिट्ठी भी लिख दी, लेकिन शाम होते होते पता चला कि जो ट्रेन झांसी गई है वो तो खाली है। उसमें पानी नहीं है। ख़ाली टैंकर को लेकर इतना बवाल हो गया है। टीवी चैनलों पर सबके इंटरव्यू चलने लगे और जमकर आरोप-प्रत्यारोप हो गए जैसे सूखे को लेकर मतदान होने वाला है। झांसी के ज़िलाधिकारी अजय शुक्ला कई लोगों के सामने टैंकरों को ठोक ठोक कर बताने लगे कि ट्रेन तो खाली आई है। इसमें पानी नहीं है। जबकि बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि पानी की रेल आई है तो पानी लेना चाहिए। उमा भारती ने कहा कि बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की कमी की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया है। दोनों ही बातों की जांच होनी चाहिए। क्या पानी सांसदों की मांग पर भेजा गया। क्या रेल मंत्रालय ने ज़िला प्रशासन को पहले सूचना दी थी या नहीं। क्योंकि लातूर के अनुभव से आपने देखा कि पानी की रेल अब एक विजुअल सिंबल बन गई है। इसका एक शानदार सीन बनता है कि रेल से पानी पहुंचा दी गई है। दिल्ली ने भी महाराष्ट्र को पानी भेजना का प्रस्ताव दिया था। काफी मज़ाक उड़ा और महाराष्ट्र सरकार ने मना भी कर दिया। सूखा तो मध्य प्रदेश में भी है। मध्य प्रदेश के रतलाम से टैंकर झांसी चले गए। क्या मध्यप्रदेश के इलाकों में गए। यूपी में चुनाव भी तो होने वाला है। दोनों पक्षों ने तथ्यों का सही पता लगाए बहस को जन जन तक पहुंचा दिया ताकि मैसेज जाए कि सूखाग्रस्त इलाकों के लिए बड़ा भारी काम किया जा रहा है। सूखे का मतलब सिर्फ पानी का संकट नहीं है। रोज़गार का भी संकट है। खेती नहीं हुई है। किसान का कर्ज़ा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 30 मई को चुकाए जाने वाले कर्ज को अब अगले पांच साल तक चुकाया जा सकेगा। सरकार पहले साल का 12 फीसदी ब्याज भी भरेगी। इस पर पांच हज़ार करोड़ खर्च होंगे। लातूर के अतुल देवलेकर ने एक गांव में सर्वे किया है। उन्होंने पाया कि एक गांव में 55 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो आत्महत्या के कगार पर हैं। उनके पास न तो आमदनी है न आमदनी की आस। बारिश हो भी जाए तो वे क्या करेंगे। सरकार ने कुछ जगहों पर सूखाग्रस्त इलाकों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवज़ा बांटे हैं लेकिन यह मुआवज़ा सिर्फ ज़मीन के मालिकों को मिलता है। ज़मीन पर काम करने वाले भूमिहीन मज़दूरों या गांव के अन्य लोगों को नहीं मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। लातूर के 5 लाख शहरी के लिए कितने लाख लीटर पानी की आवश्यकता है। इस पर ज़िला प्रशासन कहता है कि शहर को हर दिन ढाई करोड़ लीटर पानी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता अतुल देओलेकर का कहना है कि 5 करोड़ लीटर पानी की ज़रूरत है। सिटी कलेक्टर ने हमारी सहयोगी सांतिया को बताया कि इस वक्त अलग अलग ज़रिये से एक करोड़ 20 लाख लीटर पानी की सप्लाई है। इसमें से तीस से चालीस लाख लीटर पानी बोरवेल से आ रहा है। 25 लाख लीटर पानी रेल से आ रहा है। बांध और चेकडैम से चालीस लाख लीटर पानी आ रहा है। पांच लाख लीटर पानी बांध और नदियों की तलहटी की खुदाई कर निकाला जा रहा है। 18 लाख की ग्रामीण आबादी के लिए पानी की रेल नहीं चली है। चली है सिर्फ पांच लाख शहरी आबादी के लिए। गांव के लोगों का सबसे बड़ा कसूर है कि वे ट्वीटर पर नहीं हैं और उन्हें हैशटैग चलाना नहीं आता है। ख़ैर। ढाई करोड़ लीटर पानी चाहिए और इंतज़ाम है 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी का। प्रशासन के दावे के अनुसार जिनता ज़रूरी है उसका आधा पानी ही उपलब्ध है। स्थानीय लोगों ने सांतिया को बताया कि पहले भी निगम वाले पानी का टैंकर आठ से दस दिन के अंतर पर भेजते थे। आज भी आठ से दस दिनों के अंतर पर ही पानी मिल रहा है। प्रशासन का कहना है कि इस वक्त लातूर शहर के लोगों को पानी चार से पांच दिनों के अंतर पर मिल रहा है। सूखे के वक्त पानी का हिसाब सामान्य दिनों से काफी कम लगाया जाता है। इस वक्त के सरकारी पैमाने के अनुसार एक आदमी को हर दिन 20 लीटर पानी दिया जाता है। एक परिवार में चार लोग हुए तो 80 लीटर पानी रोज़ मिलेगा। यह पानी सिर्फ पीने और खाना बनाने के लिए होता है। दस दिन के अंतर से टैंकर आएगा तो 800 लीटर चाहिए। लेकिन निगम की तरफ से दस दिन पर 200 लीटर पानी दिया जा रहा है। पानी चाहिए एक ग्लास। सरकार पहुंचा रही है एक कटोरी। ज़ाहिर है सरकार के पास समंदर तो है नहीं लेकिन पानी की रेल को समंदर भी न समझा जाए। यह भी समझिये कि आठ से दस दिन में जो टैंकर आते हैं वो दो से तीन दिन का ही पानी देकर जाते हैं। ऐसा नहीं है कि सरकारें प्रयास नहीं कर रही होंगी लेकिन आपको समझना यह है कि क्या यह प्रयास पर्याप्त है, कितना बुनियादी हल है, कितना नाम के लिए और कितना दिखावे के लिए। पानी की रेल तो एक ही जगह चली लेकिन ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे सारे सूखाग्रस्त ज़िलों में चल रही है। सांतिया ने प्रशासन से बात कर बताया कि लातूर के करीब 940 गांवों में 17 लाख की आबादी रहती है। गांवों के लिए पानी की रेल नहीं चली है लेकिन सूखा घोषित होने पर 9 चरण यानी 9 काम तय किये गए हैं। इसके तहत नए बोरवेल की खुदाई होती है। पुराने बोरवेल की मरम्मत की जाती है। पहले से मौजूद बोरवेल को गहरा किया जाता है। कुओं की सफाई होती है। हैंडपंपों की मरम्मत की जाती है। अस्थायी तौर से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। लातूर प्रशासन ने सांतिया को फोन से बताया कि पहले सात चरणों के मुताबिक 500 चीजें कर चुके हैं। आठवां काम होता है प्राइवेट बोरवेल को किराये पर लेना। लातूर प्रशासन ने 1200 प्राइवेट बोरवेल किराये पर लिये हैं। 9वां काम है टैंकरों के ज़रिये पानी पहुंचाना। प्रशासन ने 250 गांवों के लिए टैंकर लगाए हैं जिनकी क्षमता 12 हज़ार लीटर से 25,000 होती है। आपको अभी-अभी तो बताया कि 940 गांव हैं लातूर में। 250 गांवों में टैंकर से पानी पहुंचाने की बात हो रही है। इतने दिनों में प्रशासन को कहना चाहिए था कि हमने सारे गांवों के लिए इंतज़ाम किया है। सांतिया जब कुछ दिन पहले ग्रामीण इलाकों को कवर करने गईं थी तब कई गांवों में लोगों ने बताया कि सात सात दिन पर टैंकर आता है। तभी तो टैंकरों के पानी के लिए मारामारी हो रही है। अब आप खुद से याद कीजिए। बाढ़ के समय आपने देखा होगा कि हेलिकाप्टर से राहत सामग्री का पैकेट गिराया जाता है। नीचे कई लोग खड़े हाथ फैलाते हैं। सामान गिराया जाता है और कुछ लोगों के हाथ लगता है और कुछ लोगों के नहीं। हेलिकाप्टर आगे बढ़ जाता है। पानी की रेल की हालत भी यही है। यह टीवी पर तो कमाल का दृश्य पैदा करती है मगर सबकी प्यास नहीं बुझाती है। हमारे सहयोगी सुशील महापात्रा दिल्ली के जंतर मंतर पर गए। वहां पर तेरह राज्यों से आए किसानों ने आज से प्रदर्शन शुरू किया है। ये सभी सूखाग्रस्त इलाकों से चलकर दिल्ली आए हैं। सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष किसान यहां आए हैं। आप सभी को जंतर मंतर जाकर इन किसानों से खुद भी बात करनी चाहिए कि सूखे से उनके जीवन पर क्या असर पड़ता है। सुशील महापात्रा को मध्यप्रदेश से आई एक बुज़ुर्ग महिला ने अपनी हथेली दिखाई। महिला ने कहा कि दूर दूर से पानी का बर्तन भर कर लाने से हाथ में छाले जैसे पड़ गए हैं। महिला ने बताया कि उसे पानी लाने के लिए चार घंटे तक पैदल चलना पड़ता है। साठ साल की उम्र में किसी को चार घंटे पैदल चल कर पानी लाना हो तो उसकी तकलीफ के आगे पानी की रेल का वीडियो दिखाना एक मज़ाक से कम नहीं है। कम से कम यह पानी की रेल यह बताये कि इसके आने से लोगों का पानी के लिए चार चार घंटे पैदल चलना बंद हो गया है। गुजरात से आई एक महिला भी यही शिकायत कर रही थी। इन्होंने बताया कि पंद्रह किमी तक पानी के लिए चलना पड़ता है। आपको वाकई हैरानी होनी चाहिए और बिल्कुल यकीन नहीं करना चाहिए कि पानी के लिए किसी को पंद्रह किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है। तभी तो ये महिलाएं आईं हैं आपको दिखाने और बताने के लिए। कई लोग बात करते हुए भावुक हो गए और क्रोधित भी। खैर पानी की रेल एक और जगह गई है। आप जानते हैं मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में भयंकर सूखा है। बुंदेलखंड के लिए आज केंद्र सरकार ने पानी की एक ट्रेन झांसी भेज दी। किसी ने यह तक नहीं देखा कि जो टैंकर झांसी स्टेशन पर खड़े हैं वो खड़े हैं या नहीं लेकिन राजनीति शुरू हो गई। यूपी के मुख्यमत्री अखिलेश यादव ने पानी की रेल लेने से मना कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि पानी की रेल भेजने से पहले किसी ने ज़िला प्रशासन से पूछा तक नहीं कि पानी चाहिए या नहीं। अगर यह तथ्यात्मक रूप से सही है तो कायदे से राज्य को बताना तो चाहिए था। यूपी सरकार का कहना है कि ट्रेन पहुंचने के बाद रेलवे ने सूचना दी। यही नहीं अखिलेश सरकार ने 10000 टैंकर मांगे थे। पानी नहीं। पानी राज्य के पास है। बीजेपी ने भी जवाब देने में देरी नहीं की। बीजेपी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार को पानी पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब पानी की ट्रेन गई है तो पानी को वापस करना ग़लत है। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी कहा कि बुंदेलखंड के बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की किल्लत की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया। उमा भारती ने अखिलेश सरकार को इस सिलसिले में एक चिट्ठी भी लिख दी, लेकिन शाम होते होते पता चला कि जो ट्रेन झांसी गई है वो तो खाली है। उसमें पानी नहीं है। ख़ाली टैंकर को लेकर इतना बवाल हो गया है। टीवी चैनलों पर सबके इंटरव्यू चलने लगे और जमकर आरोप-प्रत्यारोप हो गए जैसे सूखे को लेकर मतदान होने वाला है। झांसी के ज़िलाधिकारी अजय शुक्ला कई लोगों के सामने टैंकरों को ठोक ठोक कर बताने लगे कि ट्रेन तो खाली आई है। इसमें पानी नहीं है। जबकि बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि पानी की रेल आई है तो पानी लेना चाहिए। उमा भारती ने कहा कि बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की कमी की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया है। दोनों ही बातों की जांच होनी चाहिए। क्या पानी सांसदों की मांग पर भेजा गया। क्या रेल मंत्रालय ने ज़िला प्रशासन को पहले सूचना दी थी या नहीं। क्योंकि लातूर के अनुभव से आपने देखा कि पानी की रेल अब एक विजुअल सिंबल बन गई है। इसका एक शानदार सीन बनता है कि रेल से पानी पहुंचा दी गई है। दिल्ली ने भी महाराष्ट्र को पानी भेजना का प्रस्ताव दिया था। काफी मज़ाक उड़ा और महाराष्ट्र सरकार ने मना भी कर दिया। सूखा तो मध्य प्रदेश में भी है। मध्य प्रदेश के रतलाम से टैंकर झांसी चले गए। क्या मध्यप्रदेश के इलाकों में गए। यूपी में चुनाव भी तो होने वाला है। दोनों पक्षों ने तथ्यों का सही पता लगाए बहस को जन जन तक पहुंचा दिया ताकि मैसेज जाए कि सूखाग्रस्त इलाकों के लिए बड़ा भारी काम किया जा रहा है। सूखे का मतलब सिर्फ पानी का संकट नहीं है। रोज़गार का भी संकट है। खेती नहीं हुई है। किसान का कर्ज़ा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 30 मई को चुकाए जाने वाले कर्ज को अब अगले पांच साल तक चुकाया जा सकेगा। सरकार पहले साल का 12 फीसदी ब्याज भी भरेगी। इस पर पांच हज़ार करोड़ खर्च होंगे। लातूर के अतुल देवलेकर ने एक गांव में सर्वे किया है। उन्होंने पाया कि एक गांव में 55 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो आत्महत्या के कगार पर हैं। उनके पास न तो आमदनी है न आमदनी की आस। बारिश हो भी जाए तो वे क्या करेंगे। सरकार ने कुछ जगहों पर सूखाग्रस्त इलाकों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवज़ा बांटे हैं लेकिन यह मुआवज़ा सिर्फ ज़मीन के मालिकों को मिलता है। ज़मीन पर काम करने वाले भूमिहीन मज़दूरों या गांव के अन्य लोगों को नहीं मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। स्थानीय लोगों ने सांतिया को बताया कि पहले भी निगम वाले पानी का टैंकर आठ से दस दिन के अंतर पर भेजते थे। आज भी आठ से दस दिनों के अंतर पर ही पानी मिल रहा है। प्रशासन का कहना है कि इस वक्त लातूर शहर के लोगों को पानी चार से पांच दिनों के अंतर पर मिल रहा है। सूखे के वक्त पानी का हिसाब सामान्य दिनों से काफी कम लगाया जाता है। इस वक्त के सरकारी पैमाने के अनुसार एक आदमी को हर दिन 20 लीटर पानी दिया जाता है। एक परिवार में चार लोग हुए तो 80 लीटर पानी रोज़ मिलेगा। यह पानी सिर्फ पीने और खाना बनाने के लिए होता है। दस दिन के अंतर से टैंकर आएगा तो 800 लीटर चाहिए। लेकिन निगम की तरफ से दस दिन पर 200 लीटर पानी दिया जा रहा है। पानी चाहिए एक ग्लास। सरकार पहुंचा रही है एक कटोरी। ज़ाहिर है सरकार के पास समंदर तो है नहीं लेकिन पानी की रेल को समंदर भी न समझा जाए। यह भी समझिये कि आठ से दस दिन में जो टैंकर आते हैं वो दो से तीन दिन का ही पानी देकर जाते हैं। ऐसा नहीं है कि सरकारें प्रयास नहीं कर रही होंगी लेकिन आपको समझना यह है कि क्या यह प्रयास पर्याप्त है, कितना बुनियादी हल है, कितना नाम के लिए और कितना दिखावे के लिए। पानी की रेल तो एक ही जगह चली लेकिन ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे सारे सूखाग्रस्त ज़िलों में चल रही है। सांतिया ने प्रशासन से बात कर बताया कि लातूर के करीब 940 गांवों में 17 लाख की आबादी रहती है। गांवों के लिए पानी की रेल नहीं चली है लेकिन सूखा घोषित होने पर 9 चरण यानी 9 काम तय किये गए हैं। इसके तहत नए बोरवेल की खुदाई होती है। पुराने बोरवेल की मरम्मत की जाती है। पहले से मौजूद बोरवेल को गहरा किया जाता है। कुओं की सफाई होती है। हैंडपंपों की मरम्मत की जाती है। अस्थायी तौर से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। लातूर प्रशासन ने सांतिया को फोन से बताया कि पहले सात चरणों के मुताबिक 500 चीजें कर चुके हैं। आठवां काम होता है प्राइवेट बोरवेल को किराये पर लेना। लातूर प्रशासन ने 1200 प्राइवेट बोरवेल किराये पर लिये हैं। 9वां काम है टैंकरों के ज़रिये पानी पहुंचाना। प्रशासन ने 250 गांवों के लिए टैंकर लगाए हैं जिनकी क्षमता 12 हज़ार लीटर से 25,000 होती है। आपको अभी-अभी तो बताया कि 940 गांव हैं लातूर में। 250 गांवों में टैंकर से पानी पहुंचाने की बात हो रही है। इतने दिनों में प्रशासन को कहना चाहिए था कि हमने सारे गांवों के लिए इंतज़ाम किया है। सांतिया जब कुछ दिन पहले ग्रामीण इलाकों को कवर करने गईं थी तब कई गांवों में लोगों ने बताया कि सात सात दिन पर टैंकर आता है। तभी तो टैंकरों के पानी के लिए मारामारी हो रही है। अब आप खुद से याद कीजिए। बाढ़ के समय आपने देखा होगा कि हेलिकाप्टर से राहत सामग्री का पैकेट गिराया जाता है। नीचे कई लोग खड़े हाथ फैलाते हैं। सामान गिराया जाता है और कुछ लोगों के हाथ लगता है और कुछ लोगों के नहीं। हेलिकाप्टर आगे बढ़ जाता है। पानी की रेल की हालत भी यही है। यह टीवी पर तो कमाल का दृश्य पैदा करती है मगर सबकी प्यास नहीं बुझाती है। हमारे सहयोगी सुशील महापात्रा दिल्ली के जंतर मंतर पर गए। वहां पर तेरह राज्यों से आए किसानों ने आज से प्रदर्शन शुरू किया है। ये सभी सूखाग्रस्त इलाकों से चलकर दिल्ली आए हैं। सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष किसान यहां आए हैं। आप सभी को जंतर मंतर जाकर इन किसानों से खुद भी बात करनी चाहिए कि सूखे से उनके जीवन पर क्या असर पड़ता है। सुशील महापात्रा को मध्यप्रदेश से आई एक बुज़ुर्ग महिला ने अपनी हथेली दिखाई। महिला ने कहा कि दूर दूर से पानी का बर्तन भर कर लाने से हाथ में छाले जैसे पड़ गए हैं। महिला ने बताया कि उसे पानी लाने के लिए चार घंटे तक पैदल चलना पड़ता है। साठ साल की उम्र में किसी को चार घंटे पैदल चल कर पानी लाना हो तो उसकी तकलीफ के आगे पानी की रेल का वीडियो दिखाना एक मज़ाक से कम नहीं है। कम से कम यह पानी की रेल यह बताये कि इसके आने से लोगों का पानी के लिए चार चार घंटे पैदल चलना बंद हो गया है। गुजरात से आई एक महिला भी यही शिकायत कर रही थी। इन्होंने बताया कि पंद्रह किमी तक पानी के लिए चलना पड़ता है। आपको वाकई हैरानी होनी चाहिए और बिल्कुल यकीन नहीं करना चाहिए कि पानी के लिए किसी को पंद्रह किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है। तभी तो ये महिलाएं आईं हैं आपको दिखाने और बताने के लिए। कई लोग बात करते हुए भावुक हो गए और क्रोधित भी। खैर पानी की रेल एक और जगह गई है। आप जानते हैं मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में भयंकर सूखा है। बुंदेलखंड के लिए आज केंद्र सरकार ने पानी की एक ट्रेन झांसी भेज दी। किसी ने यह तक नहीं देखा कि जो टैंकर झांसी स्टेशन पर खड़े हैं वो खड़े हैं या नहीं लेकिन राजनीति शुरू हो गई। यूपी के मुख्यमत्री अखिलेश यादव ने पानी की रेल लेने से मना कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि पानी की रेल भेजने से पहले किसी ने ज़िला प्रशासन से पूछा तक नहीं कि पानी चाहिए या नहीं। अगर यह तथ्यात्मक रूप से सही है तो कायदे से राज्य को बताना तो चाहिए था। यूपी सरकार का कहना है कि ट्रेन पहुंचने के बाद रेलवे ने सूचना दी। यही नहीं अखिलेश सरकार ने 10000 टैंकर मांगे थे। पानी नहीं। पानी राज्य के पास है। बीजेपी ने भी जवाब देने में देरी नहीं की। बीजेपी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार को पानी पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब पानी की ट्रेन गई है तो पानी को वापस करना ग़लत है। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी कहा कि बुंदेलखंड के बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की किल्लत की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया। उमा भारती ने अखिलेश सरकार को इस सिलसिले में एक चिट्ठी भी लिख दी, लेकिन शाम होते होते पता चला कि जो ट्रेन झांसी गई है वो तो खाली है। उसमें पानी नहीं है। ख़ाली टैंकर को लेकर इतना बवाल हो गया है। टीवी चैनलों पर सबके इंटरव्यू चलने लगे और जमकर आरोप-प्रत्यारोप हो गए जैसे सूखे को लेकर मतदान होने वाला है। झांसी के ज़िलाधिकारी अजय शुक्ला कई लोगों के सामने टैंकरों को ठोक ठोक कर बताने लगे कि ट्रेन तो खाली आई है। इसमें पानी नहीं है। जबकि बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि पानी की रेल आई है तो पानी लेना चाहिए। उमा भारती ने कहा कि बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की कमी की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया है। दोनों ही बातों की जांच होनी चाहिए। क्या पानी सांसदों की मांग पर भेजा गया। क्या रेल मंत्रालय ने ज़िला प्रशासन को पहले सूचना दी थी या नहीं। क्योंकि लातूर के अनुभव से आपने देखा कि पानी की रेल अब एक विजुअल सिंबल बन गई है। इसका एक शानदार सीन बनता है कि रेल से पानी पहुंचा दी गई है। दिल्ली ने भी महाराष्ट्र को पानी भेजना का प्रस्ताव दिया था। काफी मज़ाक उड़ा और महाराष्ट्र सरकार ने मना भी कर दिया। सूखा तो मध्य प्रदेश में भी है। मध्य प्रदेश के रतलाम से टैंकर झांसी चले गए। क्या मध्यप्रदेश के इलाकों में गए। यूपी में चुनाव भी तो होने वाला है। दोनों पक्षों ने तथ्यों का सही पता लगाए बहस को जन जन तक पहुंचा दिया ताकि मैसेज जाए कि सूखाग्रस्त इलाकों के लिए बड़ा भारी काम किया जा रहा है। सूखे का मतलब सिर्फ पानी का संकट नहीं है। रोज़गार का भी संकट है। खेती नहीं हुई है। किसान का कर्ज़ा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 30 मई को चुकाए जाने वाले कर्ज को अब अगले पांच साल तक चुकाया जा सकेगा। सरकार पहले साल का 12 फीसदी ब्याज भी भरेगी। इस पर पांच हज़ार करोड़ खर्च होंगे। लातूर के अतुल देवलेकर ने एक गांव में सर्वे किया है। उन्होंने पाया कि एक गांव में 55 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो आत्महत्या के कगार पर हैं। उनके पास न तो आमदनी है न आमदनी की आस। बारिश हो भी जाए तो वे क्या करेंगे। सरकार ने कुछ जगहों पर सूखाग्रस्त इलाकों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवज़ा बांटे हैं लेकिन यह मुआवज़ा सिर्फ ज़मीन के मालिकों को मिलता है। ज़मीन पर काम करने वाले भूमिहीन मज़दूरों या गांव के अन्य लोगों को नहीं मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। पानी चाहिए एक ग्लास। सरकार पहुंचा रही है एक कटोरी। ज़ाहिर है सरकार के पास समंदर तो है नहीं लेकिन पानी की रेल को समंदर भी न समझा जाए। यह भी समझिये कि आठ से दस दिन में जो टैंकर आते हैं वो दो से तीन दिन का ही पानी देकर जाते हैं। ऐसा नहीं है कि सरकारें प्रयास नहीं कर रही होंगी लेकिन आपको समझना यह है कि क्या यह प्रयास पर्याप्त है, कितना बुनियादी हल है, कितना नाम के लिए और कितना दिखावे के लिए। पानी की रेल तो एक ही जगह चली लेकिन ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे सारे सूखाग्रस्त ज़िलों में चल रही है। सांतिया ने प्रशासन से बात कर बताया कि लातूर के करीब 940 गांवों में 17 लाख की आबादी रहती है। गांवों के लिए पानी की रेल नहीं चली है लेकिन सूखा घोषित होने पर 9 चरण यानी 9 काम तय किये गए हैं। इसके तहत नए बोरवेल की खुदाई होती है। पुराने बोरवेल की मरम्मत की जाती है। पहले से मौजूद बोरवेल को गहरा किया जाता है। कुओं की सफाई होती है। हैंडपंपों की मरम्मत की जाती है। अस्थायी तौर से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। लातूर प्रशासन ने सांतिया को फोन से बताया कि पहले सात चरणों के मुताबिक 500 चीजें कर चुके हैं। आठवां काम होता है प्राइवेट बोरवेल को किराये पर लेना। लातूर प्रशासन ने 1200 प्राइवेट बोरवेल किराये पर लिये हैं। 9वां काम है टैंकरों के ज़रिये पानी पहुंचाना। प्रशासन ने 250 गांवों के लिए टैंकर लगाए हैं जिनकी क्षमता 12 हज़ार लीटर से 25,000 होती है। आपको अभी-अभी तो बताया कि 940 गांव हैं लातूर में। 250 गांवों में टैंकर से पानी पहुंचाने की बात हो रही है। इतने दिनों में प्रशासन को कहना चाहिए था कि हमने सारे गांवों के लिए इंतज़ाम किया है। सांतिया जब कुछ दिन पहले ग्रामीण इलाकों को कवर करने गईं थी तब कई गांवों में लोगों ने बताया कि सात सात दिन पर टैंकर आता है। तभी तो टैंकरों के पानी के लिए मारामारी हो रही है। अब आप खुद से याद कीजिए। बाढ़ के समय आपने देखा होगा कि हेलिकाप्टर से राहत सामग्री का पैकेट गिराया जाता है। नीचे कई लोग खड़े हाथ फैलाते हैं। सामान गिराया जाता है और कुछ लोगों के हाथ लगता है और कुछ लोगों के नहीं। हेलिकाप्टर आगे बढ़ जाता है। पानी की रेल की हालत भी यही है। यह टीवी पर तो कमाल का दृश्य पैदा करती है मगर सबकी प्यास नहीं बुझाती है। हमारे सहयोगी सुशील महापात्रा दिल्ली के जंतर मंतर पर गए। वहां पर तेरह राज्यों से आए किसानों ने आज से प्रदर्शन शुरू किया है। ये सभी सूखाग्रस्त इलाकों से चलकर दिल्ली आए हैं। सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष किसान यहां आए हैं। आप सभी को जंतर मंतर जाकर इन किसानों से खुद भी बात करनी चाहिए कि सूखे से उनके जीवन पर क्या असर पड़ता है। सुशील महापात्रा को मध्यप्रदेश से आई एक बुज़ुर्ग महिला ने अपनी हथेली दिखाई। महिला ने कहा कि दूर दूर से पानी का बर्तन भर कर लाने से हाथ में छाले जैसे पड़ गए हैं। महिला ने बताया कि उसे पानी लाने के लिए चार घंटे तक पैदल चलना पड़ता है। साठ साल की उम्र में किसी को चार घंटे पैदल चल कर पानी लाना हो तो उसकी तकलीफ के आगे पानी की रेल का वीडियो दिखाना एक मज़ाक से कम नहीं है। कम से कम यह पानी की रेल यह बताये कि इसके आने से लोगों का पानी के लिए चार चार घंटे पैदल चलना बंद हो गया है। गुजरात से आई एक महिला भी यही शिकायत कर रही थी। इन्होंने बताया कि पंद्रह किमी तक पानी के लिए चलना पड़ता है। आपको वाकई हैरानी होनी चाहिए और बिल्कुल यकीन नहीं करना चाहिए कि पानी के लिए किसी को पंद्रह किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है। तभी तो ये महिलाएं आईं हैं आपको दिखाने और बताने के लिए। कई लोग बात करते हुए भावुक हो गए और क्रोधित भी। खैर पानी की रेल एक और जगह गई है। आप जानते हैं मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में भयंकर सूखा है। बुंदेलखंड के लिए आज केंद्र सरकार ने पानी की एक ट्रेन झांसी भेज दी। किसी ने यह तक नहीं देखा कि जो टैंकर झांसी स्टेशन पर खड़े हैं वो खड़े हैं या नहीं लेकिन राजनीति शुरू हो गई। यूपी के मुख्यमत्री अखिलेश यादव ने पानी की रेल लेने से मना कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि पानी की रेल भेजने से पहले किसी ने ज़िला प्रशासन से पूछा तक नहीं कि पानी चाहिए या नहीं। अगर यह तथ्यात्मक रूप से सही है तो कायदे से राज्य को बताना तो चाहिए था। यूपी सरकार का कहना है कि ट्रेन पहुंचने के बाद रेलवे ने सूचना दी। यही नहीं अखिलेश सरकार ने 10000 टैंकर मांगे थे। पानी नहीं। पानी राज्य के पास है। बीजेपी ने भी जवाब देने में देरी नहीं की। बीजेपी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार को पानी पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब पानी की ट्रेन गई है तो पानी को वापस करना ग़लत है। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी कहा कि बुंदेलखंड के बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की किल्लत की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया। उमा भारती ने अखिलेश सरकार को इस सिलसिले में एक चिट्ठी भी लिख दी, लेकिन शाम होते होते पता चला कि जो ट्रेन झांसी गई है वो तो खाली है। उसमें पानी नहीं है। ख़ाली टैंकर को लेकर इतना बवाल हो गया है। टीवी चैनलों पर सबके इंटरव्यू चलने लगे और जमकर आरोप-प्रत्यारोप हो गए जैसे सूखे को लेकर मतदान होने वाला है। झांसी के ज़िलाधिकारी अजय शुक्ला कई लोगों के सामने टैंकरों को ठोक ठोक कर बताने लगे कि ट्रेन तो खाली आई है। इसमें पानी नहीं है। जबकि बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि पानी की रेल आई है तो पानी लेना चाहिए। उमा भारती ने कहा कि बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की कमी की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया है। दोनों ही बातों की जांच होनी चाहिए। क्या पानी सांसदों की मांग पर भेजा गया। क्या रेल मंत्रालय ने ज़िला प्रशासन को पहले सूचना दी थी या नहीं। क्योंकि लातूर के अनुभव से आपने देखा कि पानी की रेल अब एक विजुअल सिंबल बन गई है। इसका एक शानदार सीन बनता है कि रेल से पानी पहुंचा दी गई है। दिल्ली ने भी महाराष्ट्र को पानी भेजना का प्रस्ताव दिया था। काफी मज़ाक उड़ा और महाराष्ट्र सरकार ने मना भी कर दिया। सूखा तो मध्य प्रदेश में भी है। मध्य प्रदेश के रतलाम से टैंकर झांसी चले गए। क्या मध्यप्रदेश के इलाकों में गए। यूपी में चुनाव भी तो होने वाला है। दोनों पक्षों ने तथ्यों का सही पता लगाए बहस को जन जन तक पहुंचा दिया ताकि मैसेज जाए कि सूखाग्रस्त इलाकों के लिए बड़ा भारी काम किया जा रहा है। सूखे का मतलब सिर्फ पानी का संकट नहीं है। रोज़गार का भी संकट है। खेती नहीं हुई है। किसान का कर्ज़ा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 30 मई को चुकाए जाने वाले कर्ज को अब अगले पांच साल तक चुकाया जा सकेगा। सरकार पहले साल का 12 फीसदी ब्याज भी भरेगी। इस पर पांच हज़ार करोड़ खर्च होंगे। लातूर के अतुल देवलेकर ने एक गांव में सर्वे किया है। उन्होंने पाया कि एक गांव में 55 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो आत्महत्या के कगार पर हैं। उनके पास न तो आमदनी है न आमदनी की आस। बारिश हो भी जाए तो वे क्या करेंगे। सरकार ने कुछ जगहों पर सूखाग्रस्त इलाकों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवज़ा बांटे हैं लेकिन यह मुआवज़ा सिर्फ ज़मीन के मालिकों को मिलता है। ज़मीन पर काम करने वाले भूमिहीन मज़दूरों या गांव के अन्य लोगों को नहीं मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। अब आप खुद से याद कीजिए। बाढ़ के समय आपने देखा होगा कि हेलिकाप्टर से राहत सामग्री का पैकेट गिराया जाता है। नीचे कई लोग खड़े हाथ फैलाते हैं। सामान गिराया जाता है और कुछ लोगों के हाथ लगता है और कुछ लोगों के नहीं। हेलिकाप्टर आगे बढ़ जाता है। पानी की रेल की हालत भी यही है। यह टीवी पर तो कमाल का दृश्य पैदा करती है मगर सबकी प्यास नहीं बुझाती है। हमारे सहयोगी सुशील महापात्रा दिल्ली के जंतर मंतर पर गए। वहां पर तेरह राज्यों से आए किसानों ने आज से प्रदर्शन शुरू किया है। ये सभी सूखाग्रस्त इलाकों से चलकर दिल्ली आए हैं। सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष किसान यहां आए हैं। आप सभी को जंतर मंतर जाकर इन किसानों से खुद भी बात करनी चाहिए कि सूखे से उनके जीवन पर क्या असर पड़ता है। सुशील महापात्रा को मध्यप्रदेश से आई एक बुज़ुर्ग महिला ने अपनी हथेली दिखाई। महिला ने कहा कि दूर दूर से पानी का बर्तन भर कर लाने से हाथ में छाले जैसे पड़ गए हैं। महिला ने बताया कि उसे पानी लाने के लिए चार घंटे तक पैदल चलना पड़ता है। साठ साल की उम्र में किसी को चार घंटे पैदल चल कर पानी लाना हो तो उसकी तकलीफ के आगे पानी की रेल का वीडियो दिखाना एक मज़ाक से कम नहीं है। कम से कम यह पानी की रेल यह बताये कि इसके आने से लोगों का पानी के लिए चार चार घंटे पैदल चलना बंद हो गया है। गुजरात से आई एक महिला भी यही शिकायत कर रही थी। इन्होंने बताया कि पंद्रह किमी तक पानी के लिए चलना पड़ता है। आपको वाकई हैरानी होनी चाहिए और बिल्कुल यकीन नहीं करना चाहिए कि पानी के लिए किसी को पंद्रह किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है। तभी तो ये महिलाएं आईं हैं आपको दिखाने और बताने के लिए। कई लोग बात करते हुए भावुक हो गए और क्रोधित भी। खैर पानी की रेल एक और जगह गई है। आप जानते हैं मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में भयंकर सूखा है। बुंदेलखंड के लिए आज केंद्र सरकार ने पानी की एक ट्रेन झांसी भेज दी। किसी ने यह तक नहीं देखा कि जो टैंकर झांसी स्टेशन पर खड़े हैं वो खड़े हैं या नहीं लेकिन राजनीति शुरू हो गई। यूपी के मुख्यमत्री अखिलेश यादव ने पानी की रेल लेने से मना कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि पानी की रेल भेजने से पहले किसी ने ज़िला प्रशासन से पूछा तक नहीं कि पानी चाहिए या नहीं। अगर यह तथ्यात्मक रूप से सही है तो कायदे से राज्य को बताना तो चाहिए था। यूपी सरकार का कहना है कि ट्रेन पहुंचने के बाद रेलवे ने सूचना दी। यही नहीं अखिलेश सरकार ने 10000 टैंकर मांगे थे। पानी नहीं। पानी राज्य के पास है। बीजेपी ने भी जवाब देने में देरी नहीं की। बीजेपी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार को पानी पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब पानी की ट्रेन गई है तो पानी को वापस करना ग़लत है। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी कहा कि बुंदेलखंड के बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की किल्लत की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया। उमा भारती ने अखिलेश सरकार को इस सिलसिले में एक चिट्ठी भी लिख दी, लेकिन शाम होते होते पता चला कि जो ट्रेन झांसी गई है वो तो खाली है। उसमें पानी नहीं है। ख़ाली टैंकर को लेकर इतना बवाल हो गया है। टीवी चैनलों पर सबके इंटरव्यू चलने लगे और जमकर आरोप-प्रत्यारोप हो गए जैसे सूखे को लेकर मतदान होने वाला है। झांसी के ज़िलाधिकारी अजय शुक्ला कई लोगों के सामने टैंकरों को ठोक ठोक कर बताने लगे कि ट्रेन तो खाली आई है। इसमें पानी नहीं है। जबकि बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि पानी की रेल आई है तो पानी लेना चाहिए। उमा भारती ने कहा कि बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की कमी की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया है। दोनों ही बातों की जांच होनी चाहिए। क्या पानी सांसदों की मांग पर भेजा गया। क्या रेल मंत्रालय ने ज़िला प्रशासन को पहले सूचना दी थी या नहीं। क्योंकि लातूर के अनुभव से आपने देखा कि पानी की रेल अब एक विजुअल सिंबल बन गई है। इसका एक शानदार सीन बनता है कि रेल से पानी पहुंचा दी गई है। दिल्ली ने भी महाराष्ट्र को पानी भेजना का प्रस्ताव दिया था। काफी मज़ाक उड़ा और महाराष्ट्र सरकार ने मना भी कर दिया। सूखा तो मध्य प्रदेश में भी है। मध्य प्रदेश के रतलाम से टैंकर झांसी चले गए। क्या मध्यप्रदेश के इलाकों में गए। यूपी में चुनाव भी तो होने वाला है। दोनों पक्षों ने तथ्यों का सही पता लगाए बहस को जन जन तक पहुंचा दिया ताकि मैसेज जाए कि सूखाग्रस्त इलाकों के लिए बड़ा भारी काम किया जा रहा है। सूखे का मतलब सिर्फ पानी का संकट नहीं है। रोज़गार का भी संकट है। खेती नहीं हुई है। किसान का कर्ज़ा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 30 मई को चुकाए जाने वाले कर्ज को अब अगले पांच साल तक चुकाया जा सकेगा। सरकार पहले साल का 12 फीसदी ब्याज भी भरेगी। इस पर पांच हज़ार करोड़ खर्च होंगे। लातूर के अतुल देवलेकर ने एक गांव में सर्वे किया है। उन्होंने पाया कि एक गांव में 55 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो आत्महत्या के कगार पर हैं। उनके पास न तो आमदनी है न आमदनी की आस। बारिश हो भी जाए तो वे क्या करेंगे। सरकार ने कुछ जगहों पर सूखाग्रस्त इलाकों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवज़ा बांटे हैं लेकिन यह मुआवज़ा सिर्फ ज़मीन के मालिकों को मिलता है। ज़मीन पर काम करने वाले भूमिहीन मज़दूरों या गांव के अन्य लोगों को नहीं मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। हमारे सहयोगी सुशील महापात्रा दिल्ली के जंतर मंतर पर गए। वहां पर तेरह राज्यों से आए किसानों ने आज से प्रदर्शन शुरू किया है। ये सभी सूखाग्रस्त इलाकों से चलकर दिल्ली आए हैं। सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष किसान यहां आए हैं। आप सभी को जंतर मंतर जाकर इन किसानों से खुद भी बात करनी चाहिए कि सूखे से उनके जीवन पर क्या असर पड़ता है। सुशील महापात्रा को मध्यप्रदेश से आई एक बुज़ुर्ग महिला ने अपनी हथेली दिखाई। महिला ने कहा कि दूर दूर से पानी का बर्तन भर कर लाने से हाथ में छाले जैसे पड़ गए हैं। महिला ने बताया कि उसे पानी लाने के लिए चार घंटे तक पैदल चलना पड़ता है। साठ साल की उम्र में किसी को चार घंटे पैदल चल कर पानी लाना हो तो उसकी तकलीफ के आगे पानी की रेल का वीडियो दिखाना एक मज़ाक से कम नहीं है। कम से कम यह पानी की रेल यह बताये कि इसके आने से लोगों का पानी के लिए चार चार घंटे पैदल चलना बंद हो गया है। गुजरात से आई एक महिला भी यही शिकायत कर रही थी। इन्होंने बताया कि पंद्रह किमी तक पानी के लिए चलना पड़ता है। आपको वाकई हैरानी होनी चाहिए और बिल्कुल यकीन नहीं करना चाहिए कि पानी के लिए किसी को पंद्रह किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है। तभी तो ये महिलाएं आईं हैं आपको दिखाने और बताने के लिए। कई लोग बात करते हुए भावुक हो गए और क्रोधित भी। खैर पानी की रेल एक और जगह गई है। आप जानते हैं मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में भयंकर सूखा है। बुंदेलखंड के लिए आज केंद्र सरकार ने पानी की एक ट्रेन झांसी भेज दी। किसी ने यह तक नहीं देखा कि जो टैंकर झांसी स्टेशन पर खड़े हैं वो खड़े हैं या नहीं लेकिन राजनीति शुरू हो गई। यूपी के मुख्यमत्री अखिलेश यादव ने पानी की रेल लेने से मना कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि पानी की रेल भेजने से पहले किसी ने ज़िला प्रशासन से पूछा तक नहीं कि पानी चाहिए या नहीं। अगर यह तथ्यात्मक रूप से सही है तो कायदे से राज्य को बताना तो चाहिए था। यूपी सरकार का कहना है कि ट्रेन पहुंचने के बाद रेलवे ने सूचना दी। यही नहीं अखिलेश सरकार ने 10000 टैंकर मांगे थे। पानी नहीं। पानी राज्य के पास है। बीजेपी ने भी जवाब देने में देरी नहीं की। बीजेपी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार को पानी पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब पानी की ट्रेन गई है तो पानी को वापस करना ग़लत है। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी कहा कि बुंदेलखंड के बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की किल्लत की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया। उमा भारती ने अखिलेश सरकार को इस सिलसिले में एक चिट्ठी भी लिख दी, लेकिन शाम होते होते पता चला कि जो ट्रेन झांसी गई है वो तो खाली है। उसमें पानी नहीं है। ख़ाली टैंकर को लेकर इतना बवाल हो गया है। टीवी चैनलों पर सबके इंटरव्यू चलने लगे और जमकर आरोप-प्रत्यारोप हो गए जैसे सूखे को लेकर मतदान होने वाला है। झांसी के ज़िलाधिकारी अजय शुक्ला कई लोगों के सामने टैंकरों को ठोक ठोक कर बताने लगे कि ट्रेन तो खाली आई है। इसमें पानी नहीं है। जबकि बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि पानी की रेल आई है तो पानी लेना चाहिए। उमा भारती ने कहा कि बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की कमी की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया है। दोनों ही बातों की जांच होनी चाहिए। क्या पानी सांसदों की मांग पर भेजा गया। क्या रेल मंत्रालय ने ज़िला प्रशासन को पहले सूचना दी थी या नहीं। क्योंकि लातूर के अनुभव से आपने देखा कि पानी की रेल अब एक विजुअल सिंबल बन गई है। इसका एक शानदार सीन बनता है कि रेल से पानी पहुंचा दी गई है। दिल्ली ने भी महाराष्ट्र को पानी भेजना का प्रस्ताव दिया था। काफी मज़ाक उड़ा और महाराष्ट्र सरकार ने मना भी कर दिया। सूखा तो मध्य प्रदेश में भी है। मध्य प्रदेश के रतलाम से टैंकर झांसी चले गए। क्या मध्यप्रदेश के इलाकों में गए। यूपी में चुनाव भी तो होने वाला है। दोनों पक्षों ने तथ्यों का सही पता लगाए बहस को जन जन तक पहुंचा दिया ताकि मैसेज जाए कि सूखाग्रस्त इलाकों के लिए बड़ा भारी काम किया जा रहा है। सूखे का मतलब सिर्फ पानी का संकट नहीं है। रोज़गार का भी संकट है। खेती नहीं हुई है। किसान का कर्ज़ा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 30 मई को चुकाए जाने वाले कर्ज को अब अगले पांच साल तक चुकाया जा सकेगा। सरकार पहले साल का 12 फीसदी ब्याज भी भरेगी। इस पर पांच हज़ार करोड़ खर्च होंगे। लातूर के अतुल देवलेकर ने एक गांव में सर्वे किया है। उन्होंने पाया कि एक गांव में 55 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो आत्महत्या के कगार पर हैं। उनके पास न तो आमदनी है न आमदनी की आस। बारिश हो भी जाए तो वे क्या करेंगे। सरकार ने कुछ जगहों पर सूखाग्रस्त इलाकों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवज़ा बांटे हैं लेकिन यह मुआवज़ा सिर्फ ज़मीन के मालिकों को मिलता है। ज़मीन पर काम करने वाले भूमिहीन मज़दूरों या गांव के अन्य लोगों को नहीं मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। खैर पानी की रेल एक और जगह गई है। आप जानते हैं मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में भयंकर सूखा है। बुंदेलखंड के लिए आज केंद्र सरकार ने पानी की एक ट्रेन झांसी भेज दी। किसी ने यह तक नहीं देखा कि जो टैंकर झांसी स्टेशन पर खड़े हैं वो खड़े हैं या नहीं लेकिन राजनीति शुरू हो गई। यूपी के मुख्यमत्री अखिलेश यादव ने पानी की रेल लेने से मना कर दिया। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि पानी की रेल भेजने से पहले किसी ने ज़िला प्रशासन से पूछा तक नहीं कि पानी चाहिए या नहीं। अगर यह तथ्यात्मक रूप से सही है तो कायदे से राज्य को बताना तो चाहिए था। यूपी सरकार का कहना है कि ट्रेन पहुंचने के बाद रेलवे ने सूचना दी। यही नहीं अखिलेश सरकार ने 10000 टैंकर मांगे थे। पानी नहीं। पानी राज्य के पास है। बीजेपी ने भी जवाब देने में देरी नहीं की। बीजेपी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार को पानी पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब पानी की ट्रेन गई है तो पानी को वापस करना ग़लत है। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी कहा कि बुंदेलखंड के बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की किल्लत की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया। उमा भारती ने अखिलेश सरकार को इस सिलसिले में एक चिट्ठी भी लिख दी, लेकिन शाम होते होते पता चला कि जो ट्रेन झांसी गई है वो तो खाली है। उसमें पानी नहीं है। ख़ाली टैंकर को लेकर इतना बवाल हो गया है। टीवी चैनलों पर सबके इंटरव्यू चलने लगे और जमकर आरोप-प्रत्यारोप हो गए जैसे सूखे को लेकर मतदान होने वाला है। झांसी के ज़िलाधिकारी अजय शुक्ला कई लोगों के सामने टैंकरों को ठोक ठोक कर बताने लगे कि ट्रेन तो खाली आई है। इसमें पानी नहीं है। जबकि बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि पानी की रेल आई है तो पानी लेना चाहिए। उमा भारती ने कहा कि बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की कमी की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया है। दोनों ही बातों की जांच होनी चाहिए। क्या पानी सांसदों की मांग पर भेजा गया। क्या रेल मंत्रालय ने ज़िला प्रशासन को पहले सूचना दी थी या नहीं। क्योंकि लातूर के अनुभव से आपने देखा कि पानी की रेल अब एक विजुअल सिंबल बन गई है। इसका एक शानदार सीन बनता है कि रेल से पानी पहुंचा दी गई है। दिल्ली ने भी महाराष्ट्र को पानी भेजना का प्रस्ताव दिया था। काफी मज़ाक उड़ा और महाराष्ट्र सरकार ने मना भी कर दिया। सूखा तो मध्य प्रदेश में भी है। मध्य प्रदेश के रतलाम से टैंकर झांसी चले गए। क्या मध्यप्रदेश के इलाकों में गए। यूपी में चुनाव भी तो होने वाला है। दोनों पक्षों ने तथ्यों का सही पता लगाए बहस को जन जन तक पहुंचा दिया ताकि मैसेज जाए कि सूखाग्रस्त इलाकों के लिए बड़ा भारी काम किया जा रहा है। सूखे का मतलब सिर्फ पानी का संकट नहीं है। रोज़गार का भी संकट है। खेती नहीं हुई है। किसान का कर्ज़ा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 30 मई को चुकाए जाने वाले कर्ज को अब अगले पांच साल तक चुकाया जा सकेगा। सरकार पहले साल का 12 फीसदी ब्याज भी भरेगी। इस पर पांच हज़ार करोड़ खर्च होंगे। लातूर के अतुल देवलेकर ने एक गांव में सर्वे किया है। उन्होंने पाया कि एक गांव में 55 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो आत्महत्या के कगार पर हैं। उनके पास न तो आमदनी है न आमदनी की आस। बारिश हो भी जाए तो वे क्या करेंगे। सरकार ने कुछ जगहों पर सूखाग्रस्त इलाकों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवज़ा बांटे हैं लेकिन यह मुआवज़ा सिर्फ ज़मीन के मालिकों को मिलता है। ज़मीन पर काम करने वाले भूमिहीन मज़दूरों या गांव के अन्य लोगों को नहीं मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। बीजेपी ने भी जवाब देने में देरी नहीं की। बीजेपी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार को पानी पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब पानी की ट्रेन गई है तो पानी को वापस करना ग़लत है। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी कहा कि बुंदेलखंड के बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की किल्लत की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया। उमा भारती ने अखिलेश सरकार को इस सिलसिले में एक चिट्ठी भी लिख दी, लेकिन शाम होते होते पता चला कि जो ट्रेन झांसी गई है वो तो खाली है। उसमें पानी नहीं है। ख़ाली टैंकर को लेकर इतना बवाल हो गया है। टीवी चैनलों पर सबके इंटरव्यू चलने लगे और जमकर आरोप-प्रत्यारोप हो गए जैसे सूखे को लेकर मतदान होने वाला है। झांसी के ज़िलाधिकारी अजय शुक्ला कई लोगों के सामने टैंकरों को ठोक ठोक कर बताने लगे कि ट्रेन तो खाली आई है। इसमें पानी नहीं है। जबकि बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि पानी की रेल आई है तो पानी लेना चाहिए। उमा भारती ने कहा कि बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की कमी की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया है। दोनों ही बातों की जांच होनी चाहिए। क्या पानी सांसदों की मांग पर भेजा गया। क्या रेल मंत्रालय ने ज़िला प्रशासन को पहले सूचना दी थी या नहीं। क्योंकि लातूर के अनुभव से आपने देखा कि पानी की रेल अब एक विजुअल सिंबल बन गई है। इसका एक शानदार सीन बनता है कि रेल से पानी पहुंचा दी गई है। दिल्ली ने भी महाराष्ट्र को पानी भेजना का प्रस्ताव दिया था। काफी मज़ाक उड़ा और महाराष्ट्र सरकार ने मना भी कर दिया। सूखा तो मध्य प्रदेश में भी है। मध्य प्रदेश के रतलाम से टैंकर झांसी चले गए। क्या मध्यप्रदेश के इलाकों में गए। यूपी में चुनाव भी तो होने वाला है। दोनों पक्षों ने तथ्यों का सही पता लगाए बहस को जन जन तक पहुंचा दिया ताकि मैसेज जाए कि सूखाग्रस्त इलाकों के लिए बड़ा भारी काम किया जा रहा है। सूखे का मतलब सिर्फ पानी का संकट नहीं है। रोज़गार का भी संकट है। खेती नहीं हुई है। किसान का कर्ज़ा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 30 मई को चुकाए जाने वाले कर्ज को अब अगले पांच साल तक चुकाया जा सकेगा। सरकार पहले साल का 12 फीसदी ब्याज भी भरेगी। इस पर पांच हज़ार करोड़ खर्च होंगे। लातूर के अतुल देवलेकर ने एक गांव में सर्वे किया है। उन्होंने पाया कि एक गांव में 55 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो आत्महत्या के कगार पर हैं। उनके पास न तो आमदनी है न आमदनी की आस। बारिश हो भी जाए तो वे क्या करेंगे। सरकार ने कुछ जगहों पर सूखाग्रस्त इलाकों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवज़ा बांटे हैं लेकिन यह मुआवज़ा सिर्फ ज़मीन के मालिकों को मिलता है। ज़मीन पर काम करने वाले भूमिहीन मज़दूरों या गांव के अन्य लोगों को नहीं मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। झांसी के ज़िलाधिकारी अजय शुक्ला कई लोगों के सामने टैंकरों को ठोक ठोक कर बताने लगे कि ट्रेन तो खाली आई है। इसमें पानी नहीं है। जबकि बीजेपी प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि पानी की रेल आई है तो पानी लेना चाहिए। उमा भारती ने कहा कि बीजेपी सांसदों ने अपने इलाकों में पानी की कमी की बात कही थी जिसके बाद पानी भेजा गया है। दोनों ही बातों की जांच होनी चाहिए। क्या पानी सांसदों की मांग पर भेजा गया। क्या रेल मंत्रालय ने ज़िला प्रशासन को पहले सूचना दी थी या नहीं। क्योंकि लातूर के अनुभव से आपने देखा कि पानी की रेल अब एक विजुअल सिंबल बन गई है। इसका एक शानदार सीन बनता है कि रेल से पानी पहुंचा दी गई है। दिल्ली ने भी महाराष्ट्र को पानी भेजना का प्रस्ताव दिया था। काफी मज़ाक उड़ा और महाराष्ट्र सरकार ने मना भी कर दिया। सूखा तो मध्य प्रदेश में भी है। मध्य प्रदेश के रतलाम से टैंकर झांसी चले गए। क्या मध्यप्रदेश के इलाकों में गए। यूपी में चुनाव भी तो होने वाला है। दोनों पक्षों ने तथ्यों का सही पता लगाए बहस को जन जन तक पहुंचा दिया ताकि मैसेज जाए कि सूखाग्रस्त इलाकों के लिए बड़ा भारी काम किया जा रहा है। सूखे का मतलब सिर्फ पानी का संकट नहीं है। रोज़गार का भी संकट है। खेती नहीं हुई है। किसान का कर्ज़ा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 30 मई को चुकाए जाने वाले कर्ज को अब अगले पांच साल तक चुकाया जा सकेगा। सरकार पहले साल का 12 फीसदी ब्याज भी भरेगी। इस पर पांच हज़ार करोड़ खर्च होंगे। लातूर के अतुल देवलेकर ने एक गांव में सर्वे किया है। उन्होंने पाया कि एक गांव में 55 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो आत्महत्या के कगार पर हैं। उनके पास न तो आमदनी है न आमदनी की आस। बारिश हो भी जाए तो वे क्या करेंगे। सरकार ने कुछ जगहों पर सूखाग्रस्त इलाकों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवज़ा बांटे हैं लेकिन यह मुआवज़ा सिर्फ ज़मीन के मालिकों को मिलता है। ज़मीन पर काम करने वाले भूमिहीन मज़दूरों या गांव के अन्य लोगों को नहीं मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। दिल्ली ने भी महाराष्ट्र को पानी भेजना का प्रस्ताव दिया था। काफी मज़ाक उड़ा और महाराष्ट्र सरकार ने मना भी कर दिया। सूखा तो मध्य प्रदेश में भी है। मध्य प्रदेश के रतलाम से टैंकर झांसी चले गए। क्या मध्यप्रदेश के इलाकों में गए। यूपी में चुनाव भी तो होने वाला है। दोनों पक्षों ने तथ्यों का सही पता लगाए बहस को जन जन तक पहुंचा दिया ताकि मैसेज जाए कि सूखाग्रस्त इलाकों के लिए बड़ा भारी काम किया जा रहा है। सूखे का मतलब सिर्फ पानी का संकट नहीं है। रोज़गार का भी संकट है। खेती नहीं हुई है। किसान का कर्ज़ा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 30 मई को चुकाए जाने वाले कर्ज को अब अगले पांच साल तक चुकाया जा सकेगा। सरकार पहले साल का 12 फीसदी ब्याज भी भरेगी। इस पर पांच हज़ार करोड़ खर्च होंगे। लातूर के अतुल देवलेकर ने एक गांव में सर्वे किया है। उन्होंने पाया कि एक गांव में 55 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो आत्महत्या के कगार पर हैं। उनके पास न तो आमदनी है न आमदनी की आस। बारिश हो भी जाए तो वे क्या करेंगे। सरकार ने कुछ जगहों पर सूखाग्रस्त इलाकों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवज़ा बांटे हैं लेकिन यह मुआवज़ा सिर्फ ज़मीन के मालिकों को मिलता है। ज़मीन पर काम करने वाले भूमिहीन मज़दूरों या गांव के अन्य लोगों को नहीं मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। सूखे का मतलब सिर्फ पानी का संकट नहीं है। रोज़गार का भी संकट है। खेती नहीं हुई है। किसान का कर्ज़ा बढ़ गया है। महाराष्ट्र सरकार ने तय किया है कि 30 मई को चुकाए जाने वाले कर्ज को अब अगले पांच साल तक चुकाया जा सकेगा। सरकार पहले साल का 12 फीसदी ब्याज भी भरेगी। इस पर पांच हज़ार करोड़ खर्च होंगे। लातूर के अतुल देवलेकर ने एक गांव में सर्वे किया है। उन्होंने पाया कि एक गांव में 55 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जो आत्महत्या के कगार पर हैं। उनके पास न तो आमदनी है न आमदनी की आस। बारिश हो भी जाए तो वे क्या करेंगे। सरकार ने कुछ जगहों पर सूखाग्रस्त इलाकों में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवज़ा बांटे हैं लेकिन यह मुआवज़ा सिर्फ ज़मीन के मालिकों को मिलता है। ज़मीन पर काम करने वाले भूमिहीन मज़दूरों या गांव के अन्य लोगों को नहीं मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। महाराष्ट्र सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इसमें 2019 तक कई गांवों को सूखामुक्त करने का भी अभियान चलाया जा रहा है। आमिर ख़ान महाराष्ट्र के अमरावती पहुंचे। आमिर खान मिट्टी से भरे तसले को एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं। यहां तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। आमिर ख़ान और किरण राव का एक पानी फाउंडेशन है। महाराष्ट्र सरकार ने इनके साथ भी मिलकर एक योजना बनाई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना है जिसका नाम है जलयुक्त शिविर। आमिर खान महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में घूमकर पानी संरक्षण और सूखा राहत का जायज़ा ले रहे हैं। आमिर ने सत्यमेव जयते के दौरान सत्यमेव जयते वाटर कप प्रतियोगिता का एलान किया था। इसमें जो भी कार्यकर्ता सबसे अधिक पानी बचाने में कामयाब रहेगा उसे सम्मानित किया जाएगा। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। नाना पाटेकर और अक्षय कुमार ने किसानों की मदद की बात तभी शुरू कर दी थी जब सरकारें कागज़ पर ड्राईंग बना रही थीं। मसान फिल्म के निर्देशक नीरज घहवान और गीतकार वरुण ग्रोवर ने अपनी पुरस्कार राशि से सूखाग्रस्ता इलाकों में राहत पहुंचाने का एलान किया है। नीरज को सवा लाख की पुरस्कार राशि मिली है जिसमें से वो पचास हज़ार रकम दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर को पचास हज़ार की राशि इनाम में मिली है और वो अपनी पूरी राशि दे रहे हैं। वरुण ग्रोवर देश के सबसे बड़े उद्योगपति हैं। इनका कोराबार पचास हज़ार करोड़ से लेकर सवा लाख करोड़ तक का है। यह बात मैंने तंज में कही है कि क्या आपने किसी उद्योगपति की ऐसी कोई घोषणा सुनी है। इसलिए वरुण और नीरज के एक लाख रुपये का महत्व काफी है। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। इन सब प्रयासों से यह होगा कि सरकार के अलावा समाज के लोग भी आगे आएंगे। ठीक है कि हम सरकार की जवाबदेही को लेकर सख्त रहते हैं और रहना भी चाहिए लेकिन सूखा इतना व्यापक है कि सबको कुछ न कुछ करना होगा। कई लोग काफी कुछ करना चाहते हैं मगर उन्हें पता नहीं किसके ज़रिये क्या कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी कोई विश्वसनीय व्यवस्था बनाए ताकि दूर बैठे लोग भी इस प्रयास से जुड़ सकें। कई राज्यों में सूखा पड़ा है। लेकिन चर्चा कुछ ही जगहों की हो पा रही है। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। अब आपको बताते हैं कि देश में जलाशयों का क्या हाल है। देश में कुल 91 बड़े जलाशय हैं, जिन्हें सेंट्रल वॉटर कमीशन मॉनीटर करता है। आज की हालत ये है कि इनमें से 7 बड़े जलाशयों में इस्तेमाल के लायक पानी नहीं बचा है, जबकि 22 ऐसे जलाशय हैं जिनमें क्षमता का 10 फीसदी से भी कम पानी है। इसका मतलब ये है कि एक तिहाई जलाशयों में ये तो पानी नहीं है या दस फीसदी से कम है। भारत के कृषि मंत्रालय ने देश भर में भूमिगत जल की स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार की है। फरवरी 2016 की रिपोर्ट है जिस पर रूपल सुहाग का नाम लिखा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इस रिपोर्ट का अध्ययन कर कुछ बातों को बिन्दुवार रखा है ताकि हम सब जो जल्दी जल्दी में हैं समझ सकें कि समस्या क्या है और करना क्या है। इस रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमरीका की तुलना में भारत के किसान दोगुना पानी का इस्तोमाल करते हैं अनाज उगाने के लिए। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़ी ही तेज़ी से जल संकट की ओर बढ़ रहा है। क्योंकि हम लगातार भूमिगत जल का ज़रूरत से ज़्यादा दोहन करते जा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता भी ख़राब हो रही है। भारत में सरफेस वॉटर यानी नदी-नहरों के पानी की उपलब्धता ज़्यादा है लेकिन ये सभी जगहों पर एक समान तरीके से मौजूद नहीं है। नतीजा ये है कि भूमिगत जल का 89% सिंचाई में इस्तेमाल होता है। किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ये कहीं ज़्यादा है जो काफ़ी ख़तरनाक साबित होने जा रहा है। शहरी इलाकों की 50% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है, जबकि ग्रामीण इलाकों की 85% पानी की ज़रूरत भूमिगत जल से पूरी होती है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1950 में भूमिगत जल से 30% सिंचाई होती थी लेकिन 2009 तक 61.6% इलाके में सिंचाई भूमिगत जल से हो रही है जबकि नदी, नहरों से होने वाली सिंचाई क़रीब 25% रह गई है। आप सभी को इंडियन एक्सप्रेस में छपे हर्ष मंदर का लेख पढ़ना चाहिए। अंग्रेज़ी में है लेकिन यह लेख हमें कई चीज़ों को समझने में मदद कर सकता है। हमने अकाल और भूखमरी की समस्या पर जीत हासिल की है। किसी वजह से हम सूखे से होने वाली बर्बादी को लगातार अनदेखा कर रहे हैं। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। हर्ष मंदर लिखते हैं कि आखिर क्या बात है कि हम सूखे के इन दृश्यों को देखकर बेचैन नहीं होते। लोगों में गुस्सा नहीं आता है। इस एक बात पर आपके एंकर की दूसरी राय है। समस्याओं से भरे इस देश में हर बात के लिए लोगों की तरफ लौटना भी ठीक नहीं है। किसी मसले की सार्थकता तभी पूरी नहीं होती जब बड़े पैमाने पर लोग उत्तेजित ही हों। ज़रूर लोगों को दिलचस्पी लेनी चाहिए और भारत में चल रही तीस प्रकार की सरकारों से पूछना चाहिए। मगर इन सवालों से हम यह न समझें कि सरकारों की भूमिका कम हो गई है। अगर सरकार के पास लोग कम हैं तो सरकारों को नौकरियां बढ़ाकर अपनी जवाबदेही पूरी करनी चाहिए। यह ठीक नहीं है कि स्वच्छता के लिए हम लोगों के लिए ताकें। नैतिकता के लिए हम लोगों की तरफ ताकें और सूखे से निपटने के लिए भी। यह दलील लंबी चली तो एक दिन सरकारें मिलकर लोगों का चुनाव करेंगी कि आप ही दूर कर लीजिए समस्याओं को। लोग सरकार चुनते हैं और सरकार को ही नेतृत्व करना होगा।टिप्पणियां बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। बड़ा सवाल है कि क्या हम सूखे के असर को समझते हैं। हर्ष मंदर ने लिखा है कि लगातार तीसरे साल सूखा पड़ा है। इसलिए इस बार इसका प्रभाव ज़्यादा गहरा दिख रहा है। खेती खत्म हो गई है। खेती की स्थिति सुधरने में लंबा वक्त लगेगा। हम यह न समझें कि इन इलाकों में बारिश होते ही अगले दिन से सब ठीक हो जाएगा। 55 फीसदी परिवारों के पास ज़मीन नहीं है और वो पूरी तरह शारीरिक श्रम करके अपने परिवारों का पेट पालते हैं। शहरों में भी काम कम है। लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा है। हर्ष कहते हैं कि सरकारी गोदामों में 5 करोड़ से 8 करोड़ टन अनाज भरा हुआ है। यहां तक कि औपनिवेशिक सरकारें भी ऐसी स्थिति में फेमीन कोड्स से गाइड होती थीं। गाइडलाइन होती थी कि उन सभी लोगों को कम पैसे पर नौकरी दी जाए, उनसे सार्वजनिक काम कराये जाएं ताकि गुज़र बसर चल सके। बच्चों, बूढ़ों को खाना देने, मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम करने और पानी को लाने ले जाने के काम उनसे जोड़े जाते थे। सरकार को मनरेगा पर और ज़ोर देना चाहिए और गांव गांव में रोज़गार पैदा करने का अभियान चलाना चाहिए। ऐसा होता दिखता नहीं है। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी। सबको इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है। लेकिन आप सोचिये और अपने आसपास के इलाके की ओर नज़र दौड़ाइये कि क्या हम अच्छे मॉनसून का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। बारिश का पानी रोकने के लिए क्या उपाय किये गए हैं। इस पर सरकार को भी सोचना है और समाज को भी।
सूरत : अमित शाह के कार्यक्रम में पाटीदारों का हंगामा, 'हार्दिक', 'हार्दिक' के नारे लगे
पाटीदार समुदाय के नेताओं के साथ अमित शाह की मीटिंग में गुरुवार को उस वक्‍त अव्‍यवस्‍था उत्‍पन्‍न हो गई जब हार्दिक पटेल के समर्थकों ने हंगामा मचाना शुरू कर दिया. हार्दिक, हार्दिक के नारे लगाए जाने लगे और कुर्सियों के साथ तोड़-फोड़ की गई. मुख्‍यमंत्री विजय रुपाणी के नेतृत्‍व में नवगठित मंत्रिमंडल में पटेल मंत्रियों को सम्‍मानित करने के लिए बीजेपी ने इस बड़ी रैली का आयोजन किया था, जिसमें अमित शाह हिस्‍सा लेने पहुंचे थे. अगले साल राज्‍य में चुनावों के मद्देनजर बीजेपी इस रैली के जरिये अपनी ताकत दिखाने के साथ-साथ पाटीदार समुदाय को फिर से जोड़ने की मुहिम भी कर रही थी. दरअसल पाटीदार समुदाय बीजेपी का परंपरागत वोटर रहा है लेकिन हालिया दौर में नौकरियों और आरक्षण की मांग के कारण राज्‍य सरकार के साथ टकराव की स्थिति में है. हंगामा खड़ा होने के बाद पुलिस को बुलाया गया और उन्‍होंने अव्‍यवस्‍था फैलाने वालों को वहां से हटाया. उसके बाद अमित शाह केवल छह मिनट ही बोले. उस दौरान करीब 20 प्रतिशत लोग ही वहां बचे थे. करीब 40 पाटीदार नेताओं को पकड़ा गया है. घटना से शर्मसार पार्टी ने इस घटना के लिए कांग्रेस को जिम्‍मेदार ठहराया है. राज्‍य के वरिष्‍ठ बीजेपी नेता केसी पटेल ने कहा, ''कार्यक्रम आराम से चल रहा था तभी कांग्रेस के उकसावे पर मुठ्ठी भर असामाजिक तत्‍वों ने रैली में बाधा डालने की कोशिश की.'' टिप्पणियां जब भीड़ 'हार्दिक', 'हार्दिक' के नारे लगा रही थी, लगभग उसी दौरान हार्दिक पटेल (23) बीजेपी को चुनौती देते हुए कह रहे थे, ''यदि आप इस समुदाय को पीड़ा पहुंचाएंगे तो यह सरकार गिर जाएगी.''   एक फेसबुक पोस्‍ट में उन्‍होंने अमित शाह को चुनौती पेश करते हुए कहा, ''मैं आरक्षण के मसले पर पटेल समुदाय के आंदोलन से अमित शाह को दूर रहने का आग्रह कर रहा हूं. चूंकि आप इसे रोकना चाहते हैं तो इस वजह से हम आंदोलन को खत्‍म नहीं करेंगे. जब तक मैं जिन्‍दा हूं तब तक यह आंदोलन बंद नहीं होगा. और अगर आप इसे जबरन बंद करना चाहेंगे तो आपको उससे पहले मुझे मारना होगा.'' उल्‍लेखनीय है कि कई नेताओं का मानना है कि इस मुद्दे से ठीक ढंग से नहीं निपटने के कारण ही आनंदीबेन पटेल को हटाकर विजय रुपाणी को राज्‍य का मुख्‍यमंत्री बनाया गया है. मुख्‍यमंत्री विजय रुपाणी के नेतृत्‍व में नवगठित मंत्रिमंडल में पटेल मंत्रियों को सम्‍मानित करने के लिए बीजेपी ने इस बड़ी रैली का आयोजन किया था, जिसमें अमित शाह हिस्‍सा लेने पहुंचे थे. अगले साल राज्‍य में चुनावों के मद्देनजर बीजेपी इस रैली के जरिये अपनी ताकत दिखाने के साथ-साथ पाटीदार समुदाय को फिर से जोड़ने की मुहिम भी कर रही थी. दरअसल पाटीदार समुदाय बीजेपी का परंपरागत वोटर रहा है लेकिन हालिया दौर में नौकरियों और आरक्षण की मांग के कारण राज्‍य सरकार के साथ टकराव की स्थिति में है. हंगामा खड़ा होने के बाद पुलिस को बुलाया गया और उन्‍होंने अव्‍यवस्‍था फैलाने वालों को वहां से हटाया. उसके बाद अमित शाह केवल छह मिनट ही बोले. उस दौरान करीब 20 प्रतिशत लोग ही वहां बचे थे. करीब 40 पाटीदार नेताओं को पकड़ा गया है. घटना से शर्मसार पार्टी ने इस घटना के लिए कांग्रेस को जिम्‍मेदार ठहराया है. राज्‍य के वरिष्‍ठ बीजेपी नेता केसी पटेल ने कहा, ''कार्यक्रम आराम से चल रहा था तभी कांग्रेस के उकसावे पर मुठ्ठी भर असामाजिक तत्‍वों ने रैली में बाधा डालने की कोशिश की.'' टिप्पणियां जब भीड़ 'हार्दिक', 'हार्दिक' के नारे लगा रही थी, लगभग उसी दौरान हार्दिक पटेल (23) बीजेपी को चुनौती देते हुए कह रहे थे, ''यदि आप इस समुदाय को पीड़ा पहुंचाएंगे तो यह सरकार गिर जाएगी.''   एक फेसबुक पोस्‍ट में उन्‍होंने अमित शाह को चुनौती पेश करते हुए कहा, ''मैं आरक्षण के मसले पर पटेल समुदाय के आंदोलन से अमित शाह को दूर रहने का आग्रह कर रहा हूं. चूंकि आप इसे रोकना चाहते हैं तो इस वजह से हम आंदोलन को खत्‍म नहीं करेंगे. जब तक मैं जिन्‍दा हूं तब तक यह आंदोलन बंद नहीं होगा. और अगर आप इसे जबरन बंद करना चाहेंगे तो आपको उससे पहले मुझे मारना होगा.'' उल्‍लेखनीय है कि कई नेताओं का मानना है कि इस मुद्दे से ठीक ढंग से नहीं निपटने के कारण ही आनंदीबेन पटेल को हटाकर विजय रुपाणी को राज्‍य का मुख्‍यमंत्री बनाया गया है. दरअसल पाटीदार समुदाय बीजेपी का परंपरागत वोटर रहा है लेकिन हालिया दौर में नौकरियों और आरक्षण की मांग के कारण राज्‍य सरकार के साथ टकराव की स्थिति में है. हंगामा खड़ा होने के बाद पुलिस को बुलाया गया और उन्‍होंने अव्‍यवस्‍था फैलाने वालों को वहां से हटाया. उसके बाद अमित शाह केवल छह मिनट ही बोले. उस दौरान करीब 20 प्रतिशत लोग ही वहां बचे थे. करीब 40 पाटीदार नेताओं को पकड़ा गया है. घटना से शर्मसार पार्टी ने इस घटना के लिए कांग्रेस को जिम्‍मेदार ठहराया है. राज्‍य के वरिष्‍ठ बीजेपी नेता केसी पटेल ने कहा, ''कार्यक्रम आराम से चल रहा था तभी कांग्रेस के उकसावे पर मुठ्ठी भर असामाजिक तत्‍वों ने रैली में बाधा डालने की कोशिश की.'' टिप्पणियां जब भीड़ 'हार्दिक', 'हार्दिक' के नारे लगा रही थी, लगभग उसी दौरान हार्दिक पटेल (23) बीजेपी को चुनौती देते हुए कह रहे थे, ''यदि आप इस समुदाय को पीड़ा पहुंचाएंगे तो यह सरकार गिर जाएगी.''   एक फेसबुक पोस्‍ट में उन्‍होंने अमित शाह को चुनौती पेश करते हुए कहा, ''मैं आरक्षण के मसले पर पटेल समुदाय के आंदोलन से अमित शाह को दूर रहने का आग्रह कर रहा हूं. चूंकि आप इसे रोकना चाहते हैं तो इस वजह से हम आंदोलन को खत्‍म नहीं करेंगे. जब तक मैं जिन्‍दा हूं तब तक यह आंदोलन बंद नहीं होगा. और अगर आप इसे जबरन बंद करना चाहेंगे तो आपको उससे पहले मुझे मारना होगा.'' उल्‍लेखनीय है कि कई नेताओं का मानना है कि इस मुद्दे से ठीक ढंग से नहीं निपटने के कारण ही आनंदीबेन पटेल को हटाकर विजय रुपाणी को राज्‍य का मुख्‍यमंत्री बनाया गया है. हंगामा खड़ा होने के बाद पुलिस को बुलाया गया और उन्‍होंने अव्‍यवस्‍था फैलाने वालों को वहां से हटाया. उसके बाद अमित शाह केवल छह मिनट ही बोले. उस दौरान करीब 20 प्रतिशत लोग ही वहां बचे थे. करीब 40 पाटीदार नेताओं को पकड़ा गया है. घटना से शर्मसार पार्टी ने इस घटना के लिए कांग्रेस को जिम्‍मेदार ठहराया है. राज्‍य के वरिष्‍ठ बीजेपी नेता केसी पटेल ने कहा, ''कार्यक्रम आराम से चल रहा था तभी कांग्रेस के उकसावे पर मुठ्ठी भर असामाजिक तत्‍वों ने रैली में बाधा डालने की कोशिश की.'' टिप्पणियां जब भीड़ 'हार्दिक', 'हार्दिक' के नारे लगा रही थी, लगभग उसी दौरान हार्दिक पटेल (23) बीजेपी को चुनौती देते हुए कह रहे थे, ''यदि आप इस समुदाय को पीड़ा पहुंचाएंगे तो यह सरकार गिर जाएगी.''   एक फेसबुक पोस्‍ट में उन्‍होंने अमित शाह को चुनौती पेश करते हुए कहा, ''मैं आरक्षण के मसले पर पटेल समुदाय के आंदोलन से अमित शाह को दूर रहने का आग्रह कर रहा हूं. चूंकि आप इसे रोकना चाहते हैं तो इस वजह से हम आंदोलन को खत्‍म नहीं करेंगे. जब तक मैं जिन्‍दा हूं तब तक यह आंदोलन बंद नहीं होगा. और अगर आप इसे जबरन बंद करना चाहेंगे तो आपको उससे पहले मुझे मारना होगा.'' उल्‍लेखनीय है कि कई नेताओं का मानना है कि इस मुद्दे से ठीक ढंग से नहीं निपटने के कारण ही आनंदीबेन पटेल को हटाकर विजय रुपाणी को राज्‍य का मुख्‍यमंत्री बनाया गया है. जब भीड़ 'हार्दिक', 'हार्दिक' के नारे लगा रही थी, लगभग उसी दौरान हार्दिक पटेल (23) बीजेपी को चुनौती देते हुए कह रहे थे, ''यदि आप इस समुदाय को पीड़ा पहुंचाएंगे तो यह सरकार गिर जाएगी.''   एक फेसबुक पोस्‍ट में उन्‍होंने अमित शाह को चुनौती पेश करते हुए कहा, ''मैं आरक्षण के मसले पर पटेल समुदाय के आंदोलन से अमित शाह को दूर रहने का आग्रह कर रहा हूं. चूंकि आप इसे रोकना चाहते हैं तो इस वजह से हम आंदोलन को खत्‍म नहीं करेंगे. जब तक मैं जिन्‍दा हूं तब तक यह आंदोलन बंद नहीं होगा. और अगर आप इसे जबरन बंद करना चाहेंगे तो आपको उससे पहले मुझे मारना होगा.'' उल्‍लेखनीय है कि कई नेताओं का मानना है कि इस मुद्दे से ठीक ढंग से नहीं निपटने के कारण ही आनंदीबेन पटेल को हटाकर विजय रुपाणी को राज्‍य का मुख्‍यमंत्री बनाया गया है. उल्‍लेखनीय है कि कई नेताओं का मानना है कि इस मुद्दे से ठीक ढंग से नहीं निपटने के कारण ही आनंदीबेन पटेल को हटाकर विजय रुपाणी को राज्‍य का मुख्‍यमंत्री बनाया गया है.
बेंगलुरु : मैनहोल की मरम्मत के दौरान तीन मज़दूरों की दम घुटने से मौत
बेंगलुरु के सीवी रमन रोड पर मैनहोल की मरम्मत करने गए तीन मजदूरों की सोमवार रात मौत हो गई. अब तक की जानकारी के मुताबिक़ रात तक़रीबन 11 बजे निजी कॉन्ट्रैक्टर्स इन मज़दूरों को लेकर वहां गए थे ताकि मैनहोल के अंदर हो रहे रिसाव को रोका जा सके. इन मज़दूरों को अंदर एक दीवार बनानी थी, लेकिन ऑक्सीजन की कमी की वजह से दम घुटने से इनकी मौत हो गई. साफ़ है कि सुरक्षा के जो इंतज़ाम किए जाने चाहिए थे, उसमें लापरवाही बरती गई. बेंगलुरु शहर के नगर विकास मंत्री के जे जॉर्ज और मेयर पद्मावती ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद जानकारी दी की इस हादसे में मारे गए तीनों मज़दूरों के परिवार को पांच पांच लाख रुपये दिए जाएंगे साथ ही लापरवाही के लिए ज़िम्मेदार सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. पुलिस ने आईपीसी की धारा 304 यानी ग़ैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है बेंगलुरु शहर के नगर विकास मंत्री के जे जॉर्ज और मेयर पद्मावती ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद जानकारी दी की इस हादसे में मारे गए तीनों मज़दूरों के परिवार को पांच पांच लाख रुपये दिए जाएंगे साथ ही लापरवाही के लिए ज़िम्मेदार सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. पुलिस ने आईपीसी की धारा 304 यानी ग़ैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है
पंजाब पुलिस में ऑफिसर बनेंगी क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
गोरखपुर ब्लास्ट के आरोपी पर लगे केस वापस लेगी यूपी सरकार
उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने में जुटी है। कुछ महीने पहले सरकार ने छात्रों को मुफ्ट लैपटॉप बांटे। अब बारी है घोषणा पत्र में किए गए सबसे विवादास्पद वादे की, जिसमें समाजवादी पार्टी ने वादा किया था कि अगर यूपी में उनकी सरकार बनी तो जिन लोगों पर आतंकवाद के झूठे मामले चल रहे हैं। उन्हें हटा लिया जाएगा।टिप्पणियां इसी के तहत यूपी की अखिलेश सरकार ने गोरखपुर सीरियल बम धमाकों के आरोपी तारिक कासिम पर लगे मामले को वापस लेने का फैसला लिया है। 2007 के गोरखपुर सीरियल बम धमाकों में छह लोग घायल हुए थे तारिक कासिम पर हूजी का सदस्य होने का आरोप है। दिसंबर 2007 में कासिम को एसटीएफ ने बाराबंकी से विस्फोटक और हथियारों समेत गिरफ्तार करने का दावा किया था। यूपी सरकार ने गोरखपुर और बाराबंकी के जिलाधिकारी से कासिम के खिलाफ केस वापस लेने और इसके लिए जिला कोर्ट में जाने को कहा है। दोनों मामलों में तारिक कासिम के खिलाफ आरोप तय होने बाकी हैं। इसी के तहत यूपी की अखिलेश सरकार ने गोरखपुर सीरियल बम धमाकों के आरोपी तारिक कासिम पर लगे मामले को वापस लेने का फैसला लिया है। 2007 के गोरखपुर सीरियल बम धमाकों में छह लोग घायल हुए थे तारिक कासिम पर हूजी का सदस्य होने का आरोप है। दिसंबर 2007 में कासिम को एसटीएफ ने बाराबंकी से विस्फोटक और हथियारों समेत गिरफ्तार करने का दावा किया था। यूपी सरकार ने गोरखपुर और बाराबंकी के जिलाधिकारी से कासिम के खिलाफ केस वापस लेने और इसके लिए जिला कोर्ट में जाने को कहा है। दोनों मामलों में तारिक कासिम के खिलाफ आरोप तय होने बाकी हैं। दिसंबर 2007 में कासिम को एसटीएफ ने बाराबंकी से विस्फोटक और हथियारों समेत गिरफ्तार करने का दावा किया था। यूपी सरकार ने गोरखपुर और बाराबंकी के जिलाधिकारी से कासिम के खिलाफ केस वापस लेने और इसके लिए जिला कोर्ट में जाने को कहा है। दोनों मामलों में तारिक कासिम के खिलाफ आरोप तय होने बाकी हैं।
धोनी ने एरॉन के तारीफों के पुल बांधे
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने युवा तेज गेंदबाज वरुण एरॉन के तारीफों के पुल बांधे हैं। धोनी ने कहा कि एरॉन के रूप में भारतीय टीम की एक अदद तेज गेंदबाज की तलाश खत्म होती दिख रही है। एरॉन ने मुम्बई में रविवार को खेले गए चौथे एकदिवसीय मुकाबले में इंग्लैंड के तीन बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। इस दौरान सबसे प्रभावित करने करने वाली बात उनकी गेंदों की रफ्तार रही। धोनी ने मैच के बाद कहा, "मेरे लिहाज से एरॉन ने वाकई काफी तेज गति से गेंदबाजी की। यही एक चीज है, जिसकी हमें तलाश है। अगर मैं यह कहूं कि एक अदद तेज गेंदबाज की हमारी तलाश अब खत्म होती दिख रही है तो गलत नहीं होगा।" एरॉन को इंग्लैंड दौरे के लिए स्थानापन्न खिलाड़ी के तौर पर चुना गया था लेकिन वह एक भी मैच में मौका नहीं पा सके थे। ऐसे में जबकि घरेलू श्रृंखला में भारत ने 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली थी, एरॉन को आखिरकार मुम्बई में अंतिम एकादश में जगह मिली। धोनी ने कहा कि वक्त बीतने के साथ झारखण्ड निवासी एरॉन ज्यादा अच्छी गेंदबाजी कर सकें लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी गेंदों की रफ्तार बरकार रखनी होगी। धोनी खुद झारखण्ड से सम्बंध रखते हैं। धोनी ने कहा, "एरॉन अभी युवा हैं। वक्त बीतने के साथ जैसे-जैसे वह अनुभव से मुखातिब होंगे, उनकी गेंदों की सटीकता बढ़ती जाएगी लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी गेंदों की रफ्तार को बरकार रखना होगा।"
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, क्या यह जरूरी है कि दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी करके महिला भी पति का धर्म अपनाए?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क्या यह जरूरी है कि दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी करने पर महिला को भी पति का धर्म ही अपनाना पड़े. इतिहास में कई किस्से हैं कि दो अलग-अलग धर्मों के होने के बावजूद महिला-पुरुष ने एक-दूसरे से विवाह किया लेकिन दोनों अपने-अपने धर्म को मानते रहे. यहां सवाल महिला की अपनी पहचान का है. इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने एक पारसी महिला की याचिका पर अगस्त के पहले हफ्ते में सुनवाई करने को कहा है. दरअसल महिला ने याचिका में कहा है कि वह पारसी है लेकिन उन्होंने हिंदू से शादी की है. उनके पिता 80 साल के हैं और उन्हें पता चला कि अगर पारसी महिला दूसरे धर्म में शादी कर ले तो उसे पति के धर्म का ही मान लिया जाता है. पारसी मंदिर में पूजा के अलावा अंतिम संस्कार के लिए पारसियों के टावर आफ साइलेंस में भी प्रवेश नहीं करने दिया जाता.टिप्पणियां इसके बाद उन्होंने पारसी ट्रस्टियों से बात की तो कहा गया कि वह अब पारसी नहीं रही. स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत पति के धर्म में परिवर्तित हो गई हैं. महिला इस मामले को लेकर गुजरात हाईकोर्ट गईं लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. इसके बाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. गुरुवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने सवाल उठाया कि इस मामले को देखा जाए तो यहां महिला की अपनी पहचान के दो मामले  हैं. पहला जन्म की पहचान और दूसरी शादी के बाद उसकी व्यक्तिगत पहचान.   हालांकि पारसी पंचायत की दलील थी कि यह स्पेशल मैरिज एक्ट का मामला नहीं बल्कि पारसी पर्सनल लॉ का है और यह करीब 35 सौ साल पुरानी प्रथा है. इस संबंध में सारे दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं.  बेंच ने कहा कि ये सबूत और दस्तावेज कहां से आए हैं. इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इससे जुड़े तमाम अदालती आदेशों को भी देखना चाहिए. दरअसल महिला ने याचिका में कहा है कि वह पारसी है लेकिन उन्होंने हिंदू से शादी की है. उनके पिता 80 साल के हैं और उन्हें पता चला कि अगर पारसी महिला दूसरे धर्म में शादी कर ले तो उसे पति के धर्म का ही मान लिया जाता है. पारसी मंदिर में पूजा के अलावा अंतिम संस्कार के लिए पारसियों के टावर आफ साइलेंस में भी प्रवेश नहीं करने दिया जाता.टिप्पणियां इसके बाद उन्होंने पारसी ट्रस्टियों से बात की तो कहा गया कि वह अब पारसी नहीं रही. स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत पति के धर्म में परिवर्तित हो गई हैं. महिला इस मामले को लेकर गुजरात हाईकोर्ट गईं लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. इसके बाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. गुरुवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने सवाल उठाया कि इस मामले को देखा जाए तो यहां महिला की अपनी पहचान के दो मामले  हैं. पहला जन्म की पहचान और दूसरी शादी के बाद उसकी व्यक्तिगत पहचान.   हालांकि पारसी पंचायत की दलील थी कि यह स्पेशल मैरिज एक्ट का मामला नहीं बल्कि पारसी पर्सनल लॉ का है और यह करीब 35 सौ साल पुरानी प्रथा है. इस संबंध में सारे दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं.  बेंच ने कहा कि ये सबूत और दस्तावेज कहां से आए हैं. इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इससे जुड़े तमाम अदालती आदेशों को भी देखना चाहिए. इसके बाद उन्होंने पारसी ट्रस्टियों से बात की तो कहा गया कि वह अब पारसी नहीं रही. स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत पति के धर्म में परिवर्तित हो गई हैं. महिला इस मामले को लेकर गुजरात हाईकोर्ट गईं लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. इसके बाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. गुरुवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने सवाल उठाया कि इस मामले को देखा जाए तो यहां महिला की अपनी पहचान के दो मामले  हैं. पहला जन्म की पहचान और दूसरी शादी के बाद उसकी व्यक्तिगत पहचान.   हालांकि पारसी पंचायत की दलील थी कि यह स्पेशल मैरिज एक्ट का मामला नहीं बल्कि पारसी पर्सनल लॉ का है और यह करीब 35 सौ साल पुरानी प्रथा है. इस संबंध में सारे दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं.  बेंच ने कहा कि ये सबूत और दस्तावेज कहां से आए हैं. इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इससे जुड़े तमाम अदालती आदेशों को भी देखना चाहिए. हालांकि पारसी पंचायत की दलील थी कि यह स्पेशल मैरिज एक्ट का मामला नहीं बल्कि पारसी पर्सनल लॉ का है और यह करीब 35 सौ साल पुरानी प्रथा है. इस संबंध में सारे दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं.  बेंच ने कहा कि ये सबूत और दस्तावेज कहां से आए हैं. इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इससे जुड़े तमाम अदालती आदेशों को भी देखना चाहिए.
इस बार ऐसा क्या कर दिया मोहम्मद कैफ ने जो ट्विटरबाजों के निशाने पर आ गए...  
erry Christmas ! May there be love and peace. pic.twitter.com/DnZ2g7VTno इससे पहले मोहम्म्द कैफ शतरंज खेलने को लेकर टि्वटरबाजों के निशाने पर आ गए थे. तब उन्होंने अपने बेटे के साथ शतरंज खेलते हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की थी. इस पर कई लोगों ने उन्हें इस्लाम का पाठ पढ़ा दिया और कहा कि इस्लाम में शतरंज खेलना हराम है. यह खेल इस्लाम धर्म के खिलाफ है.     Shame on you secular country... Secular people...But think about your religion first.. Before doing this kind of activity. Bhaijaan I don't like this post ye new year hota to theek tha but ye tyohaar hum musalmaanon ka nahi hai I hate this post please delete and (Allah) se tauba karo Kaif sir aap musalman hokar merry christmas bol rahe ho sharam aani chahiye aapko iska matlab hota he ki allah ke yanha beta huwa he astaghfirullllah Apni Duniyan keliye Islam ku sharminda na karo.tum jo wish kiye ho uska matlab pehle samjho.Mohammed naam rakhne se Musalman nahi banjata hai koi.. ikk musalman ho k chrismas manatee huwe sharamm nhi ati apko????? thodaa too khuda se khauff khao kaif bhaiii पिछली बार जब वह ट्रोल हुए थे तब उन्होंने टि्वटरबाजों को करारा जवाब दिया था. पूर्व क्रिकेटर ने ट्वीट किया था, 'क्या...ठेकेदारजी से पूछिए, सांस लेना हराम है या नहीं... कमाल है यार'...इसके बाद तो कैफ के फेवर में ढेर सारे मैसेज आने लगे थे. हालांकि इस बार अब तक कैफ ने कोई जवाब नहीं दिया है.
बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने नई सरकारी सुविधाएं ठुकराई
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सरकार द्वारा मुहैया कराई जा रहीं नई सुविधाएं ठुकरा दी है। नई सुविधाओं के तहत उन्हें दो निजी सचिव, दो निजी सहायक, दो निम्नवर्गीय लिपिक और चार आदेशपाल मिलने वाले थे। उन्होंने सरकार से यह निर्णय वापस लेने का भी आग्रह किया है। नीतीश कुमार ने बुधवार को अपने फेसबुक वॉल पर लिखा, आज समाचार पत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ कि बिहार सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री को पद छोड़ने के प्रथम पांच वर्षों के दौरान स्टाफ की सुविधा देने का निर्णय लिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि आज के संदर्भ में इस निर्णय का लाभ केवल मुझे ही प्राप्त होगा। अत: मैं इस सुविधा को विनम्रतापूर्वक अस्वीकार करता हूं और साथ ही मैं सरकार से इस निर्णय को वापस लेने का आग्रह करता हूं। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री को कार्यमुक्त होने से पांच वर्ष तक दो निजी सचिव, दो निजी सहायक, दो निम्नवर्गीय लिपिक और चार आदेशपाल की सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। कुल मिलाकर यह सुविधा केवल नीतीश कुमार को मिलनी है, क्योंकि नीतीश पिछले आठ वर्षों से बिहार के मुख्यमंत्री थे। इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री को आजीवन नि:शुल्क आवास और सुरक्षा दिए जाने का प्रावधान था।
'जल्द लौटेगा अर्थव्यवस्था में उच्च वृद्धि का दौर'
नरमी की आशंका के बीच वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था जल्दी ही उच्च वृद्धि की ओर लौटेगी। मुखर्जी ने वित्त मंत्रालय से जुड़ी सलाहकार समिति की बैठक में कहा कि मौजूदा नरमी अस्थायी है। समिति की चालू वित्त वर्ष के दौरान यह चौथी बैठक थी। इससे पहले इस महीने सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर का अनुमान 7.5 फीसदी कर दिया, जो पहले नौ फीसदी था। वित्त मंत्री ने कहा, वैश्विक अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुजर रही है। यूरो क्षेत्र के संकट के कारण विदेशी मांग में कमी आई है, जिससे निर्यात वृद्धि धीमी पड़ी है, मुद्रा के मूल्यांकन में उतार-चढ़ाव और चालू खाता घाटा उन कुछ कारणों में से हैं, जिनसे हमारी अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी मंत्रालयों और विभागों को व्यय सीमित रखने का निर्देश जारी किया गया है। मूल्य वृद्धि के बारे में उन्होंने कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति घटकर 1.8 फीसदी पर आ गई है और आम तौर पर मंहगाई में कमी आई है। बचत दर भी बढ़ी है।
चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव में NOTA के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लिखित जवाब दाखिल किया
वहीं जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि बैलेट बॉक्स में डालने से पहले कोई विधायक बैलेट पेपर को क्यों दिखाए? मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने गुजरात कांग्रेस के चीफ व्हिप शैलेश मनुभाई परमार की याचिका का समर्थन करते हुए कहा कि नोटा का इस्तेमाल राज्यसभा चुनाव के दौरान नही किया जाना चाहिए. केंद्र सरकार ने कहा कि नोटा का इस्तेमाल वहीं होगा जहां प्रतिनिधि जनता के द्वारा सीधे चुने जाते हैं, लेकिन राज्यसभा में इसका इस्तेमाल नहीं हो सकता क्योंकि यहां प्रतिनिधि प्रत्यक्ष तौर पर नही चुने जाते. इससे पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा कि राज्यसभा चुनाव में NOTA, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक है और ये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही चुनावों पर लागू होता है. चुनाव आयोग ने अपने हलफनामें में ये भी कहा कि NOTA के खिलाफ गुजरात कांग्रेस की याचिका अदालती कार्रवाई का दुरुपयोग है. NOTA राज्यसभा चुनाव में 2014 से जारी है, जबकि कांग्रेस ने 2017 में चुनौती दी. 2014 से अब तक गुजरात समेत 25 राज्यसभा चुनाव NOTA से हो चुके हैं.  इससे पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा कि राज्यसभा चुनाव में NOTA, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक है और ये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों ही चुनावों पर लागू होता है. चुनाव आयोग ने अपने हलफनामें में ये भी कहा कि NOTA के खिलाफ गुजरात कांग्रेस की याचिका अदालती कार्रवाई का दुरुपयोग है. NOTA राज्यसभा चुनाव में 2014 से जारी है, जबकि कांग्रेस ने 2017 में चुनौती दी. 2014 से अब तक गुजरात समेत 25 राज्यसभा चुनाव NOTA से हो चुके हैं.
FLASHBACK 2018: इन दस बड़े विवादों ने साल 2018 में कराई क्रिकेट की किरकिरी
FLASHBACK2018 में आपका स्वागत है! अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में साल 2018 में एक दो नहीं बल्कि ऐसे ढेरों लम्हें रहे जिन्होंने सुर्खियां बटोरी..कुछ टीमों को टेस्ट स्टेटस मिला तो कुछ ने ऐसा किया जिसने सभी को चौंका दिया, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अगर साल 2018 में किसी ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी तो वो साल भर हुए अलग-अलग विवाद हैं, जिन्होंने क्रिकेट के इस जेन्टलमेन्स गेम पर सवाल भी खड़े किए और लोगों के भरोसे को भी डगमगा दिया..साल 2018 की टॉप 10 Controversies. चलिए FLASHBACK2018 के तहत कुछ और विवादों पर नजर डालते हैं.  बांग्लादेश के बल्लेबाज़ शब्बीर रहमान पर गलत व्यवहार और भाषा का उपयोग करने के चलते बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 6 महीने का प्रतिबंध लगा दिया है..ये बैन सितंबर 2018 से शुरू हुआ और मार्च 2019 में खत्म होगा..इसस पहले शब्बीर रहमान के घरेलू क्रिकेट खेलने पर बोर्ड ने 6 महीने का बैन लगा दिया था जब अफ़गानिस्तान लीग के दौरान उन पर बांग्लादेश के ही एक और खिलाड़ी मेहदी हसन के साथ मारपीट का दोषी पाया गया. इससे पहले भी शब्बीर पर नेशनल क्रिकेट लीग के दौरान फ़ैन के साथ मारपीट करने , सोशल मीडिया पर गलत भाषा के इस्तेमाल करने और साथी खिलाड़ियों के साथ निरंतर भिड़ने के आरोप लगते रहे हैं..यही नहीं पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक ने भी शब्बीर पर अपनी पत्नी भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्ज़ा के साथ छेड़खानी करने के आरोप लगाए हैं "What have you achieved in your career to give such immature statements"- Gautam Gambhir slams Ravi Shastri for his statement that this is the best Indian side in 15-20 years. #INDvAUS#AUSvINDpic.twitter.com/an9a87AgKm दक्षिण अफ़्रीका में 1-2 और फिर इंग्लैंड में 1-4 से सीरीज़ हारने के बाद टीम इंडिया के मुख्य कोच ने बयान दिया कि ये टीम पिछले 20 वर्षों में देश के बाहर जाने वाली सर्वश्रेष्ठ टीम है..इस पर इतना बवाल हुआ कि कोच साहब को बीसीसीआई के CoA के सामने सफ़ाई तक देनी पड़ी. लेकिन शास्त्री ने साल खत्म होते-होते एडिलेड टेस्ट में जीत के बाद लाइव ब्रॉडकास्ट में एक ऐसी अभद्र टिप्पणी की जिसने उनसे सवाल पूछ रहे सुनील गावस्कर को भी चुप रहने पर मजबूर कर दिया. फ़ैन्स के साथ वीडियो चैट में कप्तान कोहली ने कुछ ऐसा कह दिया जिसके बाद हर तरफ़ से उनकी आलोचना होने लगी..फ़ैन ने विराट को एक ओवर रेटेड बल्लेबाज़ बताते हुए इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों को देखना पसंद होने की बात कही तो विराट ने जवाब में कहा कि तुम्हारी प्राथमिकताएं सही नहीं हैं और तुम्हें देश छोड़ देना चाहिए अगर तुम्हें विदेशी पसंद हैं..फिर जब सोशल मीडिया पर विराट ट्रोल होने लगे तो उन्होंने कहा कि मेरे इस बयान को गंभीरता से ना लें, मैं आगे से जवाब देने से बचूंगा.. Nagin dance by Bangladesh player ,win by 2 wicket vs Sri Lanka ,Date 16/03/2018 ,next match India vs Bangladesh ,Date 18/03/2018 in Colombo ,final .#INDvsBANpic.twitter.com/aGJm0LaNMz निदाहास ट्रॉफ़ी में एक वर्चुअल सेमीफ़ाइनल मैच में बांग्लादेश ने श्रीलंका को अंतिम ओवर में हरा कर फ़ाइनल में जगह बनाई..लेकिन मैच विवादों से भरा रहा..सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी नुरुल हसन मैदान पर बल्लेबाज़ों को संदेश देने गए तो विपक्षी कप्तान तिसारा  परेरा से भिड़ गए. विवाद इतना बढ़ा कि एक समय मैच के आगे बढ़ने पर भी संशय होने लगा..नुरुल हसन को आर्टिकल 2.1.2 के तहत खेल की छवि को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया गया..और मैच के बाद बांग्लादेशी खिलाड़ियों के नागिन डांस ने ज़ख्म पर नमक छिड़कने का काम किया  I'm deeply saddened & hurt by the aspersions cast on me. My commitment to the game & 20yrs of playing for my country.The hard work, sweat, in vain. Today, my patriotism doubted, my skill set questioned & all the mud slinging- it's the darkest day of my life. May god give strength   विंडीज़ में खेले गए महिला वर्ल्ड T20 में सेमी-फ़ाइनल मैच के लिए दिग्गज खिलाड़ी मिताली राज को ड्रॉप किया गया तो टीम में पर्दे के पीछे चल रही परेशानियां सामने आ गई. मिताली ने कोच रमेश पोवार पर उन्हें जानबूझकर ड्रॉप किए जाने का आरोप लगाया तो रमेश पोवार ने जवाब देते हुए मिताली पर उन्हें धमकी देने का आरोप लगाया. नतीजा पोवार के कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यू नहीं किया गया और अब WV रामन महिला टीम के कोच नियुक्त हुए हैं More controversy in Australia/South Africa series. Vernon Philander accuses Steve Smith of giving Kagiso Rabada the shoulder, staging and says Aust captain is also guilty, @SMHsport@theagesporthttps://t.co/qnylITA0jw ऑस्ट्रेलिया का द. अफ्रीका दौरा साल का सबसे विवादित दौरा बना..इस दौरे में एक के बाद एक विवाद सामने आए. द. अफ़्रीकी तेज़ गेंदबाज़ कगीसो रबाडा ने दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी के दौरान कप्तान स्टीव स्मिथ का विकेट लेने पर जोश में जश्न मनाते हुए स्मिथ को अपने कंधे से रगड़ा और अपशब्द भी कहे और उन्हें उकसाने की कोशिश की. इससे पहले वॉर्नर को दिए अति आक्रामक सेंड ऑफ़ पर उन्हें 1 डीमेरिट प्वॉइंट दिया गया था. रबाडा को कोड 2.1.7 का दोषी पाया गया. उन पर 15 फ़ीसदी मैच फ़ीस और 1 डिमेरिट अंक का जुर्माना लगा ऑस्ट्रेलिया और द. अफ़्रीका के बीच डरबन टेस्ट के तीसरे दिन चायकाल के वक्त डेविड वॉर्नर और प्रोटियाज़ विकेटकीपर क्विंटन डिकॉक के बीच ऐसी कहासुनी हुई की बात हाथापाई तक पहुंचने वाली थी जब उस्मान ख्वाजा और नेशन लायन ने वॉर्नर को रोका..ये वाक्या ड्रेसिंग रूम में जाते वक्त हुआ और इसका वीडियो बेहद वायरल हुआ..डिकॉक पर वॉर्नर की बीवी के लिए अभद्‌र टिपिपणी करने का आरोप  लगा..दोनो खिलाड़ियों पर आईसीसी ने जुर्माना लगाते हुए विवाद को खत्म किया  निदाहास ट्रॉफ़ी भी एक ऐसी सीरीज़ रही जो सुर्खियों में रही. श्रीलंका के खिलाफ़ मैच में बांग्लादेशी कप्तान शाकिब अल हसन अंपायर के साथ बहस करते दिखे, वो एक फ़ैसले से सहमत नहीं थे. इसके बाद  शाकिब ने अपने खिलाड़ियों को मेदान से बाहर बुलाने का इशारा किया. किसी तरह मैच चालू तो हुआ लेकिन शाकिब ने अपना गुस्सा ड्रेसिंग रूम के दरवाज़ें पर निकाला. ड्रेसिंग रूम का कांच का दरवाज़ा टूटा हुआ पाया गया..शाकिब पर इस पूरे विवाद के लिए 25 फ़ीसदी मैच फ़ीस का जुर्माना लगा विंडीज़ के खिलाफ़ सीरीज़ में श्रीलंकाई कप्तान दिनेश चांदीमल बॉल टैम्परिंग विवाद में फंसे..मैदान पर मौजूद अंपायर्स ने गेंद की हालत देखते हुए गेंद बदली तो चादीमल को ये नागंवार गुज़रा..वो टीम के साथ डग-आउट में ही बैठ गए और एक सत्र तक मैच शुरू नहीं हुआ. अलीम दार और इयन गूल्ड ने पाया की गेंद के साथ श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने छेड़छाड़ की है,,बाद में चांदीमल दोषी पाए गए और उन्हें दूसरे और तीसरे टेस्ट के लिए बैन कर दिया गया "No doubt the English crowd will be incredibly hostile. I'm ready for that if that happens." Former Australia cricket captain Steve Smith hopes to play in the World Cup & Ashes but is expecting plenty of flak after the ball-tampering scandal: https://t.co/R9lDPL0ZSe#EngvAuspic.twitter.com/Q47C7gKU1L ये साल का सबसे बड़ा विवाद साबित हुआ..जिसका ऑस्ट्रेलिया की टीम के साथ विश्व क्रिकेट पर भी खासा असर पड़ा..टीवी कैमरा ने ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज़ कैमरन बैंक्रॉफ़्ट को गेंद पर सैंडपेपर रगड़ते रिकॉर्ड किया. बाद में पता चला कि कप्तान स्टीव स्मिथ और उप-कप्तान डेविड वॉर्नर को इसके बारे में पता था और उन्होंने ही इसका प्लान बनाया था. स्मिथ और वॉर्नर पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने 1 साल का बैन लगाया और कैमरन बैंक्रॉफ़्ट पर 9 महीने का बैन लगा. इस बीच डैरेन लेहमैन ने कोच पद से इस्तीफ़ा दे दिया. आईसीसी ने बैंक्रॉफ़्ट पर 75 फ़ीसदी मैच फ़ीस का जुर्माना और 3 डीमेरिट अंक दिए..साथ ही स्मिथ की पूर फ़ीस के साथ 1 मैच का बैन लगाया ये मैच ऑस्ट्रेलिया 322 रन से हारा  वास्तव में साल 2018 में ऊपर बताए गए कुछ ऐसे विवाद रहे, जिन्होंने कहीं क्रिकेट को, तो कहीं खिलाड़ियों को शर्मिंदा किया. और आगे भी इन विवादों पर चर्चा होती रहेगी. FLASHBACK2018 के तहत फिर कुछ नया लेकर आएंगे आपके लिए.
AJL प्लॉट आवंटन मामले में पूर्व सीएम हुड्डा और कांग्रेस नेता वोरा को मिली अंतरिम जमानत
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा को ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड' (AJL) भूमि आवंटन मामले में एक अदालत ने बुधवार को अंतरिम जमानत दे दी. हालांकि इसके साथ ही कांग्रेस नेताओं को जमानत देते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष अदालत के न्यायाधीश जगदीप सिंह ने मामले में दोनों नेताओं की नियमित जमानत याचिका पर केंद्रीय एजेंसी का रुख जानने के लिए उसे नोटिस जारी किया. वहीं हुड्डा की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने दोनों कांग्रेस नेताओं की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए छह नवंबर की तारीख तय की है. हुड्डा और वोरा को पांच-पांच लाख रुपए के मुचलके पर अंतरिम जमानत दी गई है. बता दें, ईडी ने अगस्त 2019 में अपना पहला आरोप पत्र दायर करके वोरा और हुड्डा पर पंचकूला में AJL को भूमि आवंटन में अनियमितता का इल्ज़ाम लगाया था. केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI)ने पहले बताया था कि अभियोजन की शिकायत चंडीगढ़ के नज़दीक पंचकूला में धनशोधन रोकथाम अधिनियम (PMLA) के मामले देखने वाली विशेष अदालत में दायर की गई थी. एजेंसी ने अपने पहले आरोप पत्र में वोरा, हुड्डा और AJL को नामजद किया था और आरोप लगाया था कि वे अपराध से प्राप्त धन को हासिल करने और उसे रखने की प्रक्रिया और गतिविधियों में सीधे तौर पर शामिल थे. बता दें, वोरा राज्यसभा के सदस्य हैं और कांग्रेस के महासचिव हैं. वहीं  हुड्डा 2005 से 2014 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे. मनी लॉन्ड्रिंग का मामला पंचकूला स्थित एक प्लॉट के फिर से आवंटन में कथित अनियमितताओं से संबंधित है. आरोप है कि तत्कालीन हुड्डा सरकार ने इस प्लॉट को AJL को फिर से आवंटित करने में कथित रूप से अनियमितता की. ईडी इस भूखंड को पहले ही कुर्क कर चुका है जिसकी अनुमानित कीमत 64.93 करोड़ रुपए है. इस मामले में हरियाणा में भाजपा सरकार के अनुरोध पर CBI ने प्राथमिकी दर्ज की थी जिसके आधार पर 2016 में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की आपराधिक शिकायत दर्ज की. वहीं CBI इस मामले में पहले ही हुड्डा और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर कर चुकी है. यह प्लॉट 1982 में AJL को आवंटित हुआ था.
गुजरात के कई जिलों में बैन है PUBG, पुलिस ने गेम खेलने वालों को किया गिरफ्तार
गुजरात में पबजी गेम खेलने वाले लोगों पर जारी कार्रवाई के बीच स्थानीय पुलिस ने तीन और लोगों को उनके फोन पर कथित तौर पर यह गेम खेलने के लिए गिरफ्तार किया है. अधिकारी ने शनिवार को बताया कि यह गिरफ्तारी प्रतिबंध के बावजूद गेम खेलने की वजह से की गई. विभिन्न जिलों की पुलिस ने कई खिलाड़ियों को शामिल करके खेले जाने वाले इस ऑनलाइन गेम को इस आधार पर प्रतिबंधित कर दिया था कि यह युवाओं एवं बच्चों के हिंसक व्यवहार का कारण बन रहा है.  सैटेलाइट पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि तीन लोगों को शुक्रवार रात सैटेलाइट इलाके के विभिन्न हिस्सों से गिरफ्तार किया गया. अहमदाबाद पुलिस आयुक्त ने एक अधिसूचना जारी कर प्लेयर अननोन्स बैटलग्राउंड गेम (पबजी) को जिले में प्रतिबंधित किया था जो 14 मार्च से प्रभावी है. अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भादंसं की धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है. साथ ही बताया कि तीनों को जमानत पर रिहा कर दिया गया है. बता दें, इससे पहले पुलिस के प्रतिबंध के बावजूद कथित रूप से अपने मोबाइल फोन पर पबजी गेम खेलने के लिए पिछले दो दिनों में गुजरात के राजकोट शहर में कॉलेज के छह छात्रों समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. पुलिस आयुक्त मनोज अग्रवाल ने छह मार्च को एक अधिसूचना जारी कर शहर में ऑनलाइन गेम प्लेयर बैटलग्राउंड (पबजी) और ‘मोमो चैलेंज' पर प्रतिबंध लगा दिया था.  राजकोट तालुक के पुलिस निरीक्षक वी एस वंजारा ने कहा कि पुलिस थानों को प्रतिबंध को लागू करने और इन गेमों को खेलने वालों को गिरफ्तार करने के लिए कहा गया है. उन्होंने कहा, ‘मंगलवार को हमारी टीमों ने कलावाड रोड और जगन्नाथ चौक क्षेत्र में अपने मोबाइल फोनों पर पबजी गेम खेल रहे कॉलेज के छह छात्रों को गिरफ्तार किया था.' पुलिस नियंत्रण कक्ष से जारी एक बयान के अनुसार उसी दिन गांधीग्राम पुलिस ने अपने मोबाइल फोन पर गेम खेलने के लिए एक निजी फर्म के 25 वर्षीय कर्मचारी को गिरफ्तार किया था. एक अन्य आधिकारिक बयान के अनुसार राजकोट पुलिस के विशेष अभियान समूह ने शहर के विभिन्न इलाकों में अपने फोन पर यह गेम खेल रहे तीन लोगों को गिरफ्तार किया.  पुलिस ने बताया कि भारतीय दंड़ संहिता की धारा 188 के तहत इन सभी 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और बाद में उन्हें संबंधित पुलिस थानों में जमानत दे दी गई. पुलिस आयुक्त की अधिसूचना के अनुसार यह प्रतिबंध आवश्यक है क्योंकि इन गेमों से बच्चों और युवाओं का व्यवहार उग्र हो रहा है. अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त ए के सिंह ने भी बुधवार को एक अधिसूचना जारी कर इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए इन दोनों गेम पर प्रतिबंध लगा दिया था.
इन परिस्थितियों में मीडिया छोड़ लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरीं सुप्रिया श्रीनेत
28 मार्च की सुबह अचानक मोबाइल की घंटी बजी और दूसरी तरफ से कहा गया कि महाराजगंज से आप चुनाव लड़ने की तैयारी करें. दस मिनट की इस फोन कॉल ने जानी मानी बिजनेस एडीटर सुप्रिया श्रीनेत को नेता बना दिया. आज वो महाराजगंज से कांग्रेसी प्रत्याशी के तौर पर परतापुर कस्बे में घर घर वोट मांग रही है. सुप्रिया के साथ चंद कांग्रेसी नेता और उनके पिता के भरोसेमंद लोगों के अलावा कुर्ता पैजामा पहने पानी की बोतल साथ लेकर खामोशी से चल रहे धीरेंद्र हैं.जो एक फाइनेंस कंपनी में वाइस प्रेसीडेंट हैं लेकिन दिल्ली छोड़कर अपनी पत्नी सुप्रिया के साथ गांव, खेत, खलिहान की खाक छान रहे हैं. पहले इस सीट पर कांग्रेस ने बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी की बेटी तनुश्री को टिकट दिया थी लेकिन रातो रात उनका टिकट काट कर सुप्रिया को लड़ाने का फैसला किया.  सुप्रिया श्रीनेत के राजनीति में आने के इस रोमांच के पीछे उनके परिवार का एक दुखद पहलू भी छिपा है. सुप्रिया श्रीनेत महाराजगंज के दिग्गज नेता और दो बार के सांसद हर्षवर्द्धन सिंह की बेटी हैं. 2014 में पहले सुप्रिया की मां की मौत हुई 2015 में सुप्रिया के भाई और सियासी वारिस राज्य वर्द्धन सिंह की मौत हो गई. परिवार इस बड़े संकट से उबर पाता कि 2016 में खुद हर्षवर्धन सिंह की मौत हो गई. तीन साल में परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद हर्षवर्द्धन सिंह की सियासी विरासत को अब सुप्रिया ने आगे बढ़ाने का फैसला किया है. हालांकि उनके सामने बड़ी दिक्कत कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को इकट्ठा करना और लोगों के भीतर यह उम्मीद पैदा करना है कि वो लोकसभा चुनाव की मजबूत प्रत्याशी हैं.
लुधियाना में तीन सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे गडकरी
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 14 सितंबर को लुधियाना आएंगे और 3,212 करोड़ रुपये की तीन परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे. इन परियोजनाओं में शहर के लिए एलिवेटेड रोड, चार लेने का लाधेवाल बाईपास तथा लुधियाना-खरार सड़क को चार लेन का बनाया जाना शामिल हैं.टिप्पणियां उपायुक्त रवि भगत ने सोमवार को कहा कि सभी तीन परियोजनाएं जिले के विकास के लिए एक नई दिशा उपलब्ध कराएंगी. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) इन परियोजनाओं में शहर के लिए एलिवेटेड रोड, चार लेने का लाधेवाल बाईपास तथा लुधियाना-खरार सड़क को चार लेन का बनाया जाना शामिल हैं.टिप्पणियां उपायुक्त रवि भगत ने सोमवार को कहा कि सभी तीन परियोजनाएं जिले के विकास के लिए एक नई दिशा उपलब्ध कराएंगी. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) उपायुक्त रवि भगत ने सोमवार को कहा कि सभी तीन परियोजनाएं जिले के विकास के लिए एक नई दिशा उपलब्ध कराएंगी. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
फ्लिपकार्ट कह रही है 'शुभ भी, लाभ भी' : लेकर आई Big Diwali Sale, जानें डीटेल
त्योहारी सीजन में कस्टमर ही किंग होता है. यही वजह है कि ई कॉमर्स वेबसाइट्स जैसे कि एमेजॉन, शॉपक्लूज आदि एक के बाद एक सेल के नए नए ऑफर लाकर लोगों को आकर्षित कर रही हैं और अपनी कमाई भी कर रही हैं. अब Flipkart ने बिग दिवाली सेल की तारीखों का ऐलान कर दिया है. फ्लिपकार्ट की दिवाली सेल का आयोजन 14 अक्टूबर से 17 अक्टूबर के बीच किया जाएगा.सेल हुई खत्म, लेकिन अब कई स्मार्टफोन मिल रहे हैं सस्ते में कंपनी ने अपनी इस सेल की सूचना ट्वीट करके भी दी है. It's time to make this Diwali #ShubhBhiLabhBhi with Flipkart's #BigDiwaliSale - 14th to 17th October. Watch the video now. pic.twitter.com/tgRg5Vr6zP — Flipkart (@Flipkart) October 8, 2017 कंपनी इस सेल में स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम जैसे कि टीवी पर अच्छा- खासा डिस्काउंट दे रही है. कंपनी का कहना है कि टीवी और अप्लायंस पर 70% तक ऑफ के साथ ही एचडीएफसी बैंक के क्रेडिट और डेबिट कार्ड्स पर 10% इंस्टेंट डिस्काउंट भी दिया जाएगा.  फोन पे से पेमेंट करने वालों को 20% कैशबैक तक दिया जाएगा. फ्लिपकार्ट कुछ स्मार्टफोन एक्सचेंज करने पर भी भारी छूट दे रहा है. बजाज फिनसर्व के साथ मिलकर करीब 4 लाख फोन्स पर नो-कॉस्ट ईएमआई की सुविधा भी दी गई है.टिप्पणियां VIDEO-ऑनलाइन शॉपिंग का नटवरलाल धरा गया googletag.cmd.push(function() { googletag.display('adslotNativeVideo'); }); वैसे बता दें कि पिछले दिनों फ्लिपकार्ट ने इस सेल के बारे में बताते हुए कहा था कि बिग दिवाली सेल के दौरान हर दिन दोपहर 12 बजे फ्लैश सेल का आयोजन भी किया जाएगा जिसमे 6,999 रुपये (एमआरपी 8,999 रुपये) वाला पैनासोनिक एलुगा रे एक्स खरीदने के लिए उपलब्ध होगा. इसके साथ ही फ्लिपकार्ट ने जानकारी दी थी कि हॉनर 9आई की पहली सेल 14 अक्टूबर, शनिवार को दोपहर 12 बजे आयोजित होगी. सेल हुई खत्म, लेकिन अब कई स्मार्टफोन मिल रहे हैं सस्ते में कंपनी ने अपनी इस सेल की सूचना ट्वीट करके भी दी है. It's time to make this Diwali #ShubhBhiLabhBhi with Flipkart's #BigDiwaliSale - 14th to 17th October. Watch the video now. pic.twitter.com/tgRg5Vr6zP — Flipkart (@Flipkart) October 8, 2017 कंपनी इस सेल में स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम जैसे कि टीवी पर अच्छा- खासा डिस्काउंट दे रही है. कंपनी का कहना है कि टीवी और अप्लायंस पर 70% तक ऑफ के साथ ही एचडीएफसी बैंक के क्रेडिट और डेबिट कार्ड्स पर 10% इंस्टेंट डिस्काउंट भी दिया जाएगा.  फोन पे से पेमेंट करने वालों को 20% कैशबैक तक दिया जाएगा. फ्लिपकार्ट कुछ स्मार्टफोन एक्सचेंज करने पर भी भारी छूट दे रहा है. बजाज फिनसर्व के साथ मिलकर करीब 4 लाख फोन्स पर नो-कॉस्ट ईएमआई की सुविधा भी दी गई है.टिप्पणियां VIDEO-ऑनलाइन शॉपिंग का नटवरलाल धरा गया वैसे बता दें कि पिछले दिनों फ्लिपकार्ट ने इस सेल के बारे में बताते हुए कहा था कि बिग दिवाली सेल के दौरान हर दिन दोपहर 12 बजे फ्लैश सेल का आयोजन भी किया जाएगा जिसमे 6,999 रुपये (एमआरपी 8,999 रुपये) वाला पैनासोनिक एलुगा रे एक्स खरीदने के लिए उपलब्ध होगा. इसके साथ ही फ्लिपकार्ट ने जानकारी दी थी कि हॉनर 9आई की पहली सेल 14 अक्टूबर, शनिवार को दोपहर 12 बजे आयोजित होगी. कंपनी ने अपनी इस सेल की सूचना ट्वीट करके भी दी है. It's time to make this Diwali #ShubhBhiLabhBhi with Flipkart's #BigDiwaliSale - 14th to 17th October. Watch the video now. pic.twitter.com/tgRg5Vr6zP — Flipkart (@Flipkart) October 8, 2017 कंपनी इस सेल में स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम जैसे कि टीवी पर अच्छा- खासा डिस्काउंट दे रही है. कंपनी का कहना है कि टीवी और अप्लायंस पर 70% तक ऑफ के साथ ही एचडीएफसी बैंक के क्रेडिट और डेबिट कार्ड्स पर 10% इंस्टेंट डिस्काउंट भी दिया जाएगा.  फोन पे से पेमेंट करने वालों को 20% कैशबैक तक दिया जाएगा. फ्लिपकार्ट कुछ स्मार्टफोन एक्सचेंज करने पर भी भारी छूट दे रहा है. बजाज फिनसर्व के साथ मिलकर करीब 4 लाख फोन्स पर नो-कॉस्ट ईएमआई की सुविधा भी दी गई है.टिप्पणियां VIDEO-ऑनलाइन शॉपिंग का नटवरलाल धरा गया वैसे बता दें कि पिछले दिनों फ्लिपकार्ट ने इस सेल के बारे में बताते हुए कहा था कि बिग दिवाली सेल के दौरान हर दिन दोपहर 12 बजे फ्लैश सेल का आयोजन भी किया जाएगा जिसमे 6,999 रुपये (एमआरपी 8,999 रुपये) वाला पैनासोनिक एलुगा रे एक्स खरीदने के लिए उपलब्ध होगा. इसके साथ ही फ्लिपकार्ट ने जानकारी दी थी कि हॉनर 9आई की पहली सेल 14 अक्टूबर, शनिवार को दोपहर 12 बजे आयोजित होगी. It's time to make this Diwali #ShubhBhiLabhBhi with Flipkart's #BigDiwaliSale - 14th to 17th October. Watch the video now. pic.twitter.com/tgRg5Vr6zP VIDEO-ऑनलाइन शॉपिंग का नटवरलाल धरा गया वैसे बता दें कि पिछले दिनों फ्लिपकार्ट ने इस सेल के बारे में बताते हुए कहा था कि बिग दिवाली सेल के दौरान हर दिन दोपहर 12 बजे फ्लैश सेल का आयोजन भी किया जाएगा जिसमे 6,999 रुपये (एमआरपी 8,999 रुपये) वाला पैनासोनिक एलुगा रे एक्स खरीदने के लिए उपलब्ध होगा. इसके साथ ही फ्लिपकार्ट ने जानकारी दी थी कि हॉनर 9आई की पहली सेल 14 अक्टूबर, शनिवार को दोपहर 12 बजे आयोजित होगी. वैसे बता दें कि पिछले दिनों फ्लिपकार्ट ने इस सेल के बारे में बताते हुए कहा था कि बिग दिवाली सेल के दौरान हर दिन दोपहर 12 बजे फ्लैश सेल का आयोजन भी किया जाएगा जिसमे 6,999 रुपये (एमआरपी 8,999 रुपये) वाला पैनासोनिक एलुगा रे एक्स खरीदने के लिए उपलब्ध होगा. इसके साथ ही फ्लिपकार्ट ने जानकारी दी थी कि हॉनर 9आई की पहली सेल 14 अक्टूबर, शनिवार को दोपहर 12 बजे आयोजित होगी.
सर्बियाई स्टार नोवाक जोकोविच ने 'हमशक्ल' वाल्टियर को मुलाकात के लिए आमंत्रित किया
@pierre_vaultier let’s make it happen. See you at RG! And congratulations on your Olympic medal(s)! https://t.co/m7HSoda6Vu वाल्टियर ने कहा कि उनका और जोकोविच का चेहरा मिलने की बात पहले भी हो चुकी है और उन्होंने कहा, 'जब मैं उन्हें खेलते हुए देखता हूं तो उनके हाव-भाव तथा उनकी आवाज की टोन सुनता हूं तो मुझे ऐसा लता है कि जैसे मैं खुद को देख रहा हूं.' 30 वर्षीय वाल्टियर ने प्योंगचांग में ओलंपिक स्नोबोर्ड क्रॉस स्वर्ण पदक अपने नाम किया. इस तरह उन्होंने सोच्चि में चार साल पहले जीता खिताब भी बरकरार रखा. फ्रेंच ओपन रोलां गैरां में 27 मई से 10 जून तक खेला जायेगा.
बिहार चुनाव परिणाम : अमित शाह ने हार स्वीकार की, नीतीश, लालू को दी बधाई
बिहार विधानसभा चुनाव में हार को स्वीकार करते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को उनकी प्रभावशाली विजय के लिए बधाई दी और कहा कि उनका दल जनादेश का सम्मान करता है।टिप्पणियां अमित शाह ने कहा, बिहार को विकास के पथ पर ले जाने के लिए हमारी शुभकामनाएं नई सरकार के साथ हैं। बीजेपी प्रमुख ने ट्वीट किया, हम बिहार के लोगों के जनादेश का सम्मान करते हैं... मैं नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव को बिहार विधानसभा चुनाव में विजय के लिए बधाई देता हूं।' इस बीच, चुनाव में एनडीए के भारी पराजय की ओर बढ़ने के बीच पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अमित शाह के आवास पर उनसे मुलाकात की। अमित शाह ने कहा, बिहार को विकास के पथ पर ले जाने के लिए हमारी शुभकामनाएं नई सरकार के साथ हैं। बीजेपी प्रमुख ने ट्वीट किया, हम बिहार के लोगों के जनादेश का सम्मान करते हैं... मैं नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव को बिहार विधानसभा चुनाव में विजय के लिए बधाई देता हूं।' इस बीच, चुनाव में एनडीए के भारी पराजय की ओर बढ़ने के बीच पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अमित शाह के आवास पर उनसे मुलाकात की। इस बीच, चुनाव में एनडीए के भारी पराजय की ओर बढ़ने के बीच पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने अमित शाह के आवास पर उनसे मुलाकात की।
पश्चिम बंगाल चुनाव : बुद्धदेव ने भरा नामांकन
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने मंगलवार को जादवपुर विधानसभा क्षेत्र से मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उम्मीदवार के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया। वह इस क्षेत्र से 1987 से लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। भट्टाचार्य ने दक्षिण 24 परगना जिले के कोषागार भवन जाकर नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान उनके सैकड़ों समर्थक नारे लगाते रहे। भट्टाचार्य नवम्बर 2000 से वाम मोर्चा सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। भट्टाचार्य के साथ कोलकाता के पूर्व महापौर बिकास रंजन भट्टाचार्य और माकपा के दक्षिण 24 परगना जिले के सचिव सुजॉन चक्रवर्ती (जादवपुर से पूर्व सांसद) भी थे। भट्टाचार्य के खिलाफ इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस के मनीष गुप्ता उम्मीदवार हैं। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी हैं और भट्टाचार्य के मुख्य सचिव भी रह चुके हैं। भट्टाचार्य छह बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने पहली बार 1977 में उत्तरी कोलकाता के कोसीपुर विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की थी। वर्ष 1972 में इस विधानसभा सीट पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने जादवपुर को अपना क्षेत्र बना लिया। भट्टाचार्च पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु द्वारा पद छोड़ने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री बने थे।
शेयर बाजार : 9,200 अंकों को पार करता हुआ रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा निफ्टी
कारोबारी सप्ताह के पहले दिन बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 158 अंक उछल गया. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी शुरआती कारोबार में 9,200 अंक को पार करता हुआ रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया. एशियाई बाजारों में मजबूती का रख रहने से निवेशकों और कोषों की लिवाली का जोर रहा. नये वित्त वर्ष की शुरआत के पहले कारोबारी दिन आज बंबई शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक 157.97 अंक यानी 0.53 प्रतिशत उंचा रहकर 29,778.47 अंक पर पहुंच गया. वाहन, बैंक, तेल एवं गैस कंपनियों के समूह सूचकांक में तेजी का रख रहा। टिकाउ उपभोक्ता सामान और पूंजीगत सामानों के सूचकांक में 0.71 प्रतिशत तक तेजी रही. कारोबार के शुरुआती दौर में रिलायंस इंडस्ट्रीज 4.23 प्रतिशत, गेल 1.63 प्रतिशत, लार्सन एंड टुब्रो 1.10 प्रतिशत, टाटा मोटर्स 0.70 प्रतिशत, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा 0.57 प्रतिशत ऊंचे रहे. हालांकि, इनफोसिस का शेयर इसके संस्थापकों और निदेशक मंडल के बीच नये मतभेद उभरने के बाद 0.53 प्रतिशत खिसक गया. इससे पहले गत सप्ताहांत संवेदी सूचकांक 26.92 अंक घटकर बंद हुआ था.टिप्पणियां नेशनल स्टॉक एक्सचेंज निफ्टी 46.90 अंक बढ़कर एक बार फिर 9,200 अंक को पार करता हुआ 9,220.65 अंक की रिकार्ड उंचाई पर पहुंच गया. ब्रोकरों के मुताबिक निवेशकों और कोषों की ओर से लिवाली का जोर रहा. अमेरिका में रोजगार के आंकड़ों पर कारोबारियों की नजर है. इसके अलावा इस सप्ताहांत चीन और अमेरिका के राष्ट्रपति के बीच बैठक पर भी बाजार की नजर है. एशियाई बाजारों में शुरुआत तेजी के साथ होने से यहां भी शुरआत अच्छी रही.   नये वित्त वर्ष की शुरआत के पहले कारोबारी दिन आज बंबई शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक 157.97 अंक यानी 0.53 प्रतिशत उंचा रहकर 29,778.47 अंक पर पहुंच गया. वाहन, बैंक, तेल एवं गैस कंपनियों के समूह सूचकांक में तेजी का रख रहा। टिकाउ उपभोक्ता सामान और पूंजीगत सामानों के सूचकांक में 0.71 प्रतिशत तक तेजी रही. कारोबार के शुरुआती दौर में रिलायंस इंडस्ट्रीज 4.23 प्रतिशत, गेल 1.63 प्रतिशत, लार्सन एंड टुब्रो 1.10 प्रतिशत, टाटा मोटर्स 0.70 प्रतिशत, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा 0.57 प्रतिशत ऊंचे रहे. हालांकि, इनफोसिस का शेयर इसके संस्थापकों और निदेशक मंडल के बीच नये मतभेद उभरने के बाद 0.53 प्रतिशत खिसक गया. इससे पहले गत सप्ताहांत संवेदी सूचकांक 26.92 अंक घटकर बंद हुआ था.टिप्पणियां नेशनल स्टॉक एक्सचेंज निफ्टी 46.90 अंक बढ़कर एक बार फिर 9,200 अंक को पार करता हुआ 9,220.65 अंक की रिकार्ड उंचाई पर पहुंच गया. ब्रोकरों के मुताबिक निवेशकों और कोषों की ओर से लिवाली का जोर रहा. अमेरिका में रोजगार के आंकड़ों पर कारोबारियों की नजर है. इसके अलावा इस सप्ताहांत चीन और अमेरिका के राष्ट्रपति के बीच बैठक पर भी बाजार की नजर है. एशियाई बाजारों में शुरुआत तेजी के साथ होने से यहां भी शुरआत अच्छी रही.   कारोबार के शुरुआती दौर में रिलायंस इंडस्ट्रीज 4.23 प्रतिशत, गेल 1.63 प्रतिशत, लार्सन एंड टुब्रो 1.10 प्रतिशत, टाटा मोटर्स 0.70 प्रतिशत, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा 0.57 प्रतिशत ऊंचे रहे. हालांकि, इनफोसिस का शेयर इसके संस्थापकों और निदेशक मंडल के बीच नये मतभेद उभरने के बाद 0.53 प्रतिशत खिसक गया. इससे पहले गत सप्ताहांत संवेदी सूचकांक 26.92 अंक घटकर बंद हुआ था.टिप्पणियां नेशनल स्टॉक एक्सचेंज निफ्टी 46.90 अंक बढ़कर एक बार फिर 9,200 अंक को पार करता हुआ 9,220.65 अंक की रिकार्ड उंचाई पर पहुंच गया. ब्रोकरों के मुताबिक निवेशकों और कोषों की ओर से लिवाली का जोर रहा. अमेरिका में रोजगार के आंकड़ों पर कारोबारियों की नजर है. इसके अलावा इस सप्ताहांत चीन और अमेरिका के राष्ट्रपति के बीच बैठक पर भी बाजार की नजर है. एशियाई बाजारों में शुरुआत तेजी के साथ होने से यहां भी शुरआत अच्छी रही.   नेशनल स्टॉक एक्सचेंज निफ्टी 46.90 अंक बढ़कर एक बार फिर 9,200 अंक को पार करता हुआ 9,220.65 अंक की रिकार्ड उंचाई पर पहुंच गया. ब्रोकरों के मुताबिक निवेशकों और कोषों की ओर से लिवाली का जोर रहा. अमेरिका में रोजगार के आंकड़ों पर कारोबारियों की नजर है. इसके अलावा इस सप्ताहांत चीन और अमेरिका के राष्ट्रपति के बीच बैठक पर भी बाजार की नजर है. एशियाई बाजारों में शुरुआत तेजी के साथ होने से यहां भी शुरआत अच्छी रही.
जेम्स बांड के एक्टर ने जलाया कचरा तो उनके खिलाफ हो गया केस
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
श्रीलंकाई कप्तान संगकारा ने दिया पद से इस्तीफा
विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार संगकारा ने श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 क्रिकेट टीम के कप्तान पद से इस्तीफा दे दिया है। वह हालांकि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के आगामी दौरे पर जाने वाली टेस्ट टीम के अंतरिम कप्तान बने रहेंगे। आईसीसी विश्व कप-2011 के फाइनल में अपनी टीम को पहुंचाने वाले संगकारा बतौर खिलाड़ी क्रिकेट के सभी प्रारूपों में खेलते रहेंगे। संगकारा ने यह निर्णय मंगलवार को लिया। वेबसाइट 'क्रिक इन्फो डॉट कॉम' के मुताबिक संगकारा ने एक बयान जारी कर कहा, "मैं राष्ट्रीय टीम के कप्तानी पद से इस्तीफा देता हूं। मैंने यह संकल्प विश्व कप-2011 से पहले ही ले लिया था। अगले विश्व कप तक मैं 37 वर्ष का हो जाऊंगा इसलिए मैं टीम में अपनी जगह बनाने को लेकर आश्वस्त नहीं हूं। जो भी खिलाड़ी टीम को अब सम्भालेगा उसके लिए यह बढ़िया मौका होगा कि वह उस समय तक कप्तानी में शीर्ष पर होगा।" एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 क्रिकेट टीम की कमान सलामी बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान और हरफनमौला एंजेलो मैथ्यूज में से किसी को दी जा सकती है जबकि टेस्ट टीम में संगकारा के विकल्प के रूप में थिलन समरवीरा को देखा जा रहा है। हाल में भारतीय उपमहाद्वीप में सम्पन्न हुए विश्व कप में संगकारा सर्वाधिक रन बनाने के मामले में तीसरे स्थान पर थे। इसके अलावा उन्होंने खिताबी मुकाबले में भारत के खिलाफ 48 रनों की पारी खेली थी।
भारत ने लापता मलेशियाई विमान की तलाश रोकी
भारत ने लापता मलेशियाई विमान के लिए अपना तलाशी अभियान रोक दिया है, क्योंकि उसे मलेशियाई प्रशासन से ताजा निर्देश का इंतजार है। मलेशिया विमान का पता लगाने के लिए नए क्षेत्रों पर गौर सकता है। अंडमान निकोबार कमान के प्रवक्ता कर्नल हरमीत सिंह ने बताया कि पांच जंगी जहाज और छह निगरानी विमान के साथ मिलकर चलाए जाने वाले तलाशी अभियान को फिलहाल रोक दिया गया है। उन्होंने कहा, हम मलेशिया से ताजा निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि बल के विमानों ने रविवार सुबह से उड़ान नहीं भरी और इन विमानों में पी-81 समुद्री निगरानी विमान तथा वायुसेना का सी-130 सुपर हरक्यूलिस विशेष अभियान विमान शामिल हैं। तटरक्षक बल और नोसैना ने आईसीजीएस सागर के साथ छह जंगी जहाज तैनात किए हैं, जो मलक्का की खाड़ी में तलाशी अभियान चलाएंगे। नौसेना ने अपना आईएनएस सरयू और आईएनएस केसरी को इस काम में उतारा है। भारत अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में करीब 2.5 लाख किलोमीटर क्षेत्र में यह अभियान चला रहा है। मलेशिया ने शनिवार को कहा था कि लापता उड़ान एमएच 370 की दिशा एक सी थी और ऐसा लगता है कि विमान में सवार किसी ने जानबूझकर कुछ किया है। मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने कहा था कि प्रशासन अब दो गलियारों- उत्तर में कजाखस्तान और तुर्कमेनिस्तान की सीमा तक तथा दक्षिण में इंडोनेशिया और दक्षिण हिंद महासागर के बीच विमान का पता लगाने का प्रयास कर रहा है।
रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाएगा जी-7
जी-7 देशों के नेताओं ने पूर्वी यूक्रेन को अस्थिर बनाने के रूस समर्थित प्रयासों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि उन्होंने मॉस्को पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका जी-7 के सदस्य देश हैं। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष ने भी जी-7 देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए। इससे कुछ घंटों पहले अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और इटली के नेताओं से बात की थी। संयुक्त बयान में कहा गया है, हम अब इस बात पर सहमत हो गए हैं कि हम रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे। यूक्रेन में अगले माह होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनावों को सफल बनाने और इस दौरान शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक मतदान को सुनिश्चित करने की अत्यावश्यकता के मद्देनजर हम लक्षित प्रतिबंधों को लेकर तत्काल काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस बयान में नेताओं ने पूर्वी यूक्रेन को अस्थिर बनाने के रूस समर्थित अलगाववादियों के लगातार प्रयासों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
बच्चों का यौन शोषण कर रहा था पादरी, परिजनों ने की शिकायत तो पुलिस ने किया गिरफ्तार
एक बॉयज होम में रहने वाले बच्चों के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने व उनका शोषण करने के आरोप में रविवार को एक ईसाई पादरी को गिरफ्तार किया गया है. पल्लुरूथी पुलिस थाने के एक अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि बच्चों के माता-पिता की शिकायत के आधार पर आश्रय गृह के पादरी को गिरफ्तार किया गया है.  उन्होंने कहा, 'बच्चों के माता-पिता की शिकायत के आधार पर पादरी को उठा लिया गया और रविवार को उसकी गिरफ्तारी हुई.' सात बच्चों के माता-पिता की शिकायत के अनुसार, पादरी काफी समय से बच्चों का यौन शोषण कर रहा था. बच्चों के माता-पिता की शिकायत के अनुसार, जब पादरी ने बच्चों के कथित यौन उत्पीड़न की कोशिश की तो बच्चे वहां से भाग गए. उन्होंने बताया कि पादरी पिछले वर्ष दिसंबर से छह बच्चों का कथित तौर पर यौन उत्पीड़न कर रहा था. पादरी गिरजाघर द्वारा संचालित लड़कों के आश्रय गृह का निदेशक था. इस आश्रय गृह में गरीब परिवारों के बच्चों को रहने की सुविधा और शिक्षा दी जाती है. पुलिस ने बताया कि यह मामला उस समय सामने आया जब आश्रय गृह के छह बच्चे वहां से भाग गए और उन्होंने शनिवार की रात रास्ते में मिले एक व्यक्ति की मदद से अपने माता-पिता को फोन किया. उन्होंने बताया कि पादरी के खिलाफ किशोर न्याय कानून और बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) की प्रासंगिक धाराओं के तहत आरोप तय किए गए हैं.
भारतीय मूल के Abhijit Banerjee समेत 3 लोगों को मिला अर्थशास्त्र का Nobel Prize
BREAKING NEWS: The 2019 Sveriges Riksbank Prize in Economic Sciences in Memory of Alfred Nobel has been awarded to Abhijit Banerjee, Esther Duflo and Michael Kremer “for their experimental approach to alleviating global poverty.”#NobelPrizepic.twitter.com/SuJfPoRe2N Hearty congratulations to Abhijit Banerjee, alumnus of South Point School & Presidency College Kolkata, for winning the Nobel Prize in Economics. Another Bengali has done the nation proud. We are overjoyed. জয় হিন্দ । জয় বাংলা । अभिजीत बनर्जी का जन्‍म कोलकाता में 21 फरवरी 1961 को हुआ था. उनकी मां का नाम निर्मला बनर्जी और पिता दीपक बनर्जी हैं. मां निर्मला सेंटर फॉर स्‍टडीज इन सोशल साइंसेज में अर्थशास्‍त्र की प्रोफेसर रह चुकी हैं, जबकि पिता दीपक कलकत्ता के प्रसिडेंट कॉले में अर्थशास्‍त्र विभाग के अध्‍यक्ष थे.
डार्विन की इस खास चिट्ठी को नीलामी से मिल सकते हैं 60 लाख रुपये
ब्रितानी प्रकृतिवादी चार्ल्स डार्विन ने अपने जिस हस्तलिखित पत्र में यह कबूल किया है कि वह बाइबिल को एक ईश्वरीय कथन और यीसू मसीह को ईश्वर का पुत्र नहीं मानते, उसके 90,000 डॉलर (करीब 60 लाख रुपये) में नीलाम होने की उम्मीद है। धर्म में डार्विन का विश्वास लंबे समय से बहस का मुद्दा बना हुआ है। डार्विन खुद भी इस पर सार्वजनिक बयान देने से परहेज करते थे, संभवत: ऐसा वे अपने दोस्तों और परिवार की भावनाओं का आदर करने के लिए करते थे। डार्विन का यह पत्र एक युवा वकील फ्रैंसिस मैकडरमॉट के पत्र का जवाब है। मैकडरमॉट ने 23 नवंबर, 1880 को डार्विन को एक अनोखे अनुरोध के साथ पत्र लिखा था। उन्होंने लिखा है, 'अगर मुझे आपकी किताबें पढ़कर अच्छा महसूस होता है तो इससे मुझे यह भी नहीं लगना चाहिए कि न्यू टेस्टामेंट से मेरा विश्वास खत्म हो गया है।' मैकडरमॉट ने लिखा, 'आपको पत्र लिखने का कारण यह है कि मैं इस बारे में आपका जवाब हां या ना में जानना चाहता हूं कि क्या आप भी न्यू टेस्टामेंट में यकीन रखते हैं..'टिप्पणियां मैकडरमॉट ने पत्र में यह वादा भी किया कि वह डार्विन के जवाब को सार्वजनिक नहीं करेंगे। डार्विन ने फिर अगले ही दिन इसका उत्तर दिया। डार्विन ने लिखा, 'प्रिय महोदय, आपको यह सूचित करते हुए मुझे खेद है कि मैं बाइबिल को एक ईश्वरीय कथन नहीं मानता और इसलिए यीसू मसीह (जीसस क्राइस्ट) को ईश्वर का पुत्र नहीं मानता।' मैकडरमॉट अपने वादे के पक्के निकले और यह पत्र पिछले 100 सालों से शोधकर्ताओं से अनजान रहा। अब न्यूयॉर्क में 21 सितंबर को बोनहैम्स हिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में इस पत्र की नीलामी होगी, और इस पत्र के 70,000 से 90,000 डॉलर में नीलाम होने की उम्मीद है। धर्म में डार्विन का विश्वास लंबे समय से बहस का मुद्दा बना हुआ है। डार्विन खुद भी इस पर सार्वजनिक बयान देने से परहेज करते थे, संभवत: ऐसा वे अपने दोस्तों और परिवार की भावनाओं का आदर करने के लिए करते थे। डार्विन का यह पत्र एक युवा वकील फ्रैंसिस मैकडरमॉट के पत्र का जवाब है। मैकडरमॉट ने 23 नवंबर, 1880 को डार्विन को एक अनोखे अनुरोध के साथ पत्र लिखा था। उन्होंने लिखा है, 'अगर मुझे आपकी किताबें पढ़कर अच्छा महसूस होता है तो इससे मुझे यह भी नहीं लगना चाहिए कि न्यू टेस्टामेंट से मेरा विश्वास खत्म हो गया है।' मैकडरमॉट ने लिखा, 'आपको पत्र लिखने का कारण यह है कि मैं इस बारे में आपका जवाब हां या ना में जानना चाहता हूं कि क्या आप भी न्यू टेस्टामेंट में यकीन रखते हैं..'टिप्पणियां मैकडरमॉट ने पत्र में यह वादा भी किया कि वह डार्विन के जवाब को सार्वजनिक नहीं करेंगे। डार्विन ने फिर अगले ही दिन इसका उत्तर दिया। डार्विन ने लिखा, 'प्रिय महोदय, आपको यह सूचित करते हुए मुझे खेद है कि मैं बाइबिल को एक ईश्वरीय कथन नहीं मानता और इसलिए यीसू मसीह (जीसस क्राइस्ट) को ईश्वर का पुत्र नहीं मानता।' मैकडरमॉट अपने वादे के पक्के निकले और यह पत्र पिछले 100 सालों से शोधकर्ताओं से अनजान रहा। अब न्यूयॉर्क में 21 सितंबर को बोनहैम्स हिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में इस पत्र की नीलामी होगी, और इस पत्र के 70,000 से 90,000 डॉलर में नीलाम होने की उम्मीद है। डार्विन का यह पत्र एक युवा वकील फ्रैंसिस मैकडरमॉट के पत्र का जवाब है। मैकडरमॉट ने 23 नवंबर, 1880 को डार्विन को एक अनोखे अनुरोध के साथ पत्र लिखा था। उन्होंने लिखा है, 'अगर मुझे आपकी किताबें पढ़कर अच्छा महसूस होता है तो इससे मुझे यह भी नहीं लगना चाहिए कि न्यू टेस्टामेंट से मेरा विश्वास खत्म हो गया है।' मैकडरमॉट ने लिखा, 'आपको पत्र लिखने का कारण यह है कि मैं इस बारे में आपका जवाब हां या ना में जानना चाहता हूं कि क्या आप भी न्यू टेस्टामेंट में यकीन रखते हैं..'टिप्पणियां मैकडरमॉट ने पत्र में यह वादा भी किया कि वह डार्विन के जवाब को सार्वजनिक नहीं करेंगे। डार्विन ने फिर अगले ही दिन इसका उत्तर दिया। डार्विन ने लिखा, 'प्रिय महोदय, आपको यह सूचित करते हुए मुझे खेद है कि मैं बाइबिल को एक ईश्वरीय कथन नहीं मानता और इसलिए यीसू मसीह (जीसस क्राइस्ट) को ईश्वर का पुत्र नहीं मानता।' मैकडरमॉट अपने वादे के पक्के निकले और यह पत्र पिछले 100 सालों से शोधकर्ताओं से अनजान रहा। अब न्यूयॉर्क में 21 सितंबर को बोनहैम्स हिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में इस पत्र की नीलामी होगी, और इस पत्र के 70,000 से 90,000 डॉलर में नीलाम होने की उम्मीद है। मैकडरमॉट ने पत्र में यह वादा भी किया कि वह डार्विन के जवाब को सार्वजनिक नहीं करेंगे। डार्विन ने फिर अगले ही दिन इसका उत्तर दिया। डार्विन ने लिखा, 'प्रिय महोदय, आपको यह सूचित करते हुए मुझे खेद है कि मैं बाइबिल को एक ईश्वरीय कथन नहीं मानता और इसलिए यीसू मसीह (जीसस क्राइस्ट) को ईश्वर का पुत्र नहीं मानता।' मैकडरमॉट अपने वादे के पक्के निकले और यह पत्र पिछले 100 सालों से शोधकर्ताओं से अनजान रहा। अब न्यूयॉर्क में 21 सितंबर को बोनहैम्स हिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में इस पत्र की नीलामी होगी, और इस पत्र के 70,000 से 90,000 डॉलर में नीलाम होने की उम्मीद है। मैकडरमॉट अपने वादे के पक्के निकले और यह पत्र पिछले 100 सालों से शोधकर्ताओं से अनजान रहा। अब न्यूयॉर्क में 21 सितंबर को बोनहैम्स हिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में इस पत्र की नीलामी होगी, और इस पत्र के 70,000 से 90,000 डॉलर में नीलाम होने की उम्मीद है।
दक्षिण अफ्रीका से टीम इंडिया के हार के पांच अहम कारण
आलोचना और तारीफ तक तो बात ठीक है, लेकिन जब टेस्ट कप्तान विराट कोहली को टी-20 और वनडे की कप्तानी सौंपने की बात होने लगती है तो कप्तान धोनी के फैसले से लेकर उनकी कप्तानी के कौशल पर प्रश्न लगने लगते हैं। अब जब मौसन ऐसा ही चल रहा है तो इस सबका असर धोनी की कप्तानी पर दिखाई दे रहा है। आज के मैच में कप्तान धोनी दबाव में दिखे। मैदान पर टेस्ट कप्तान कोहली जहां अकसर गेंदबाजों को सलाह देखे दिखते रहे हैं, वहीं धोनी गेंदबाजों से कोई बात नहीं करते दिखे।टिप्पणियां कहते हैं कि मैदान पर कोहली गेंदबाजों को अकसर सलाह देते रहते हैं जो धोनी क्यों नहीं करते उनसे बेहतर कोई नहीं बता सकता।इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ें पूरी मैच रिपोर्ट कहते हैं कि मैदान पर कोहली गेंदबाजों को अकसर सलाह देते रहते हैं जो धोनी क्यों नहीं करते उनसे बेहतर कोई नहीं बता सकता।इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ें पूरी मैच रिपोर्ट इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ें पूरी मैच रिपोर्ट
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियां पूरी, इन बातों पर रहेगी नजर...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले शुक्रवार को गोवा पहुंच रहे हैं. यह शिखर सम्मेलन इस तटीय राज्य में 15 अक्टूबर को शुरू होगा. गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने शिखर सम्मेलन के लिए व्यवस्था की समीक्षा से पूर्व संवाददाताओं को बताया, ‘सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को यहां आ रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि सभी देशों के राष्ट्राध्यक्ष तीन अलग-अलग पांच सितारा रिजॉर्ट्स में ठहरेंगे जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. 15-16 अक्टूबर को गोवा में होने वाले ब्रिक्स समिट और बिम्सटेक आउटरीच मीटिंग में इन बातों पर रहेगी नजर... ब्रिक्स - ये आठवां ब्रिक्स सम्मिट है. - 2011 में इसकी शुरुआत हुई. - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका इसके सदस्य हैं. - इसका मक़सद आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर पश्चिमी देशों के अधिपत्य को चुनौती. - इस समिट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ राष्ट्रपति टेमर (ब्राज़ील), राष्ट्रपति पुतिन (रूस), राष्ट्रपति शी जिंनपिंग (चीन) और राष्ट्रपति ज़ुमा (दक्षिण अफ्रीका) हिस्सा ले रहे हैं. बिम्सटेक (बे ऑफ बंगाल इनिसिएटिव फॉर टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन) - बिम्सटेक में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं. - पांच देश दक्षिण एशिया के और दो दक्षिण पूर्व एशिया के (म्यांमार और थाईलैंड). - भारत ने सार्क देशों की जगह बिम्सटेक देशों को आउटरीच मीटिंग के लिए बुलाया. - भारत के एक्ट इस्ट पॉलिसी पर ज़ोर के चलते ये फैसला. - पाकिस्तान में होने वाले सार्क समिट के टलने के बाद बिम्सटेक की बढ़ी अहमियत. भारत को होंगी ये उम्मीदें... - आतंकवाद के मुद्दे पर ब्रिक्स और बिम्सटेक देशों की तरफ एकजुट निंदा की उम्मीद - बिम्सटेक देशों - चीन और पाकिस्तान के कूटनीतिक रिश्तों के देखते हुए इसमें मुश्किल हो सकता है - आर्थिक मंदी के दौर में ब्रिक्स संगठन में जान फूंकने की कोशिश - आर्थिक मोर्चे पर आपसी सहयोग से मंदी से उबरने के उपाय द्विपक्षीय मुलाक़ातें - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ द्विपक्षीय मुलाक़ातें चीन - चीन और रूस के साथ द्विपक्षीय बातचीत अहम. - चीन से मसूद अज़हर पर यूएन प्रतिबंध को लेकर बात. - सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर साथ देने को लेकर बात. - एनएसजी में भारत की सदस्यता पर चीन से समर्थन हासिल करने की कोशिश. - भारत में चीनी निवेश बढ़ाने को लेकर बात.टिप्पणियां रूस - रूस और पाकिस्तान के सामरिक संबंधों को सीमित करने पर बात - रूस से आतंकवाद के मुद्दे पर पूरी तरह साथ लेने की कोशिश बिम्सटेक द्विपक्षीय अभी तक म्यांमार और बांग्लादेश के साथ होना तय. 15-16 अक्टूबर को गोवा में होने वाले ब्रिक्स समिट और बिम्सटेक आउटरीच मीटिंग में इन बातों पर रहेगी नजर... ब्रिक्स - ये आठवां ब्रिक्स सम्मिट है. - 2011 में इसकी शुरुआत हुई. - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका इसके सदस्य हैं. - इसका मक़सद आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर पश्चिमी देशों के अधिपत्य को चुनौती. - इस समिट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ राष्ट्रपति टेमर (ब्राज़ील), राष्ट्रपति पुतिन (रूस), राष्ट्रपति शी जिंनपिंग (चीन) और राष्ट्रपति ज़ुमा (दक्षिण अफ्रीका) हिस्सा ले रहे हैं. बिम्सटेक (बे ऑफ बंगाल इनिसिएटिव फॉर टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन) - बिम्सटेक में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं. - पांच देश दक्षिण एशिया के और दो दक्षिण पूर्व एशिया के (म्यांमार और थाईलैंड). - भारत ने सार्क देशों की जगह बिम्सटेक देशों को आउटरीच मीटिंग के लिए बुलाया. - भारत के एक्ट इस्ट पॉलिसी पर ज़ोर के चलते ये फैसला. - पाकिस्तान में होने वाले सार्क समिट के टलने के बाद बिम्सटेक की बढ़ी अहमियत. भारत को होंगी ये उम्मीदें... - आतंकवाद के मुद्दे पर ब्रिक्स और बिम्सटेक देशों की तरफ एकजुट निंदा की उम्मीद - बिम्सटेक देशों - चीन और पाकिस्तान के कूटनीतिक रिश्तों के देखते हुए इसमें मुश्किल हो सकता है - आर्थिक मंदी के दौर में ब्रिक्स संगठन में जान फूंकने की कोशिश - आर्थिक मोर्चे पर आपसी सहयोग से मंदी से उबरने के उपाय द्विपक्षीय मुलाक़ातें - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ द्विपक्षीय मुलाक़ातें चीन - चीन और रूस के साथ द्विपक्षीय बातचीत अहम. - चीन से मसूद अज़हर पर यूएन प्रतिबंध को लेकर बात. - सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर साथ देने को लेकर बात. - एनएसजी में भारत की सदस्यता पर चीन से समर्थन हासिल करने की कोशिश. - भारत में चीनी निवेश बढ़ाने को लेकर बात.टिप्पणियां रूस - रूस और पाकिस्तान के सामरिक संबंधों को सीमित करने पर बात - रूस से आतंकवाद के मुद्दे पर पूरी तरह साथ लेने की कोशिश बिम्सटेक द्विपक्षीय अभी तक म्यांमार और बांग्लादेश के साथ होना तय. ब्रिक्स - ये आठवां ब्रिक्स सम्मिट है. - 2011 में इसकी शुरुआत हुई. - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका इसके सदस्य हैं. - इसका मक़सद आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर पश्चिमी देशों के अधिपत्य को चुनौती. - इस समिट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ राष्ट्रपति टेमर (ब्राज़ील), राष्ट्रपति पुतिन (रूस), राष्ट्रपति शी जिंनपिंग (चीन) और राष्ट्रपति ज़ुमा (दक्षिण अफ्रीका) हिस्सा ले रहे हैं. बिम्सटेक (बे ऑफ बंगाल इनिसिएटिव फॉर टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन) - बिम्सटेक में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं. - पांच देश दक्षिण एशिया के और दो दक्षिण पूर्व एशिया के (म्यांमार और थाईलैंड). - भारत ने सार्क देशों की जगह बिम्सटेक देशों को आउटरीच मीटिंग के लिए बुलाया. - भारत के एक्ट इस्ट पॉलिसी पर ज़ोर के चलते ये फैसला. - पाकिस्तान में होने वाले सार्क समिट के टलने के बाद बिम्सटेक की बढ़ी अहमियत. भारत को होंगी ये उम्मीदें... - आतंकवाद के मुद्दे पर ब्रिक्स और बिम्सटेक देशों की तरफ एकजुट निंदा की उम्मीद - बिम्सटेक देशों - चीन और पाकिस्तान के कूटनीतिक रिश्तों के देखते हुए इसमें मुश्किल हो सकता है - आर्थिक मंदी के दौर में ब्रिक्स संगठन में जान फूंकने की कोशिश - आर्थिक मोर्चे पर आपसी सहयोग से मंदी से उबरने के उपाय द्विपक्षीय मुलाक़ातें - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ द्विपक्षीय मुलाक़ातें चीन - चीन और रूस के साथ द्विपक्षीय बातचीत अहम. - चीन से मसूद अज़हर पर यूएन प्रतिबंध को लेकर बात. - सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर साथ देने को लेकर बात. - एनएसजी में भारत की सदस्यता पर चीन से समर्थन हासिल करने की कोशिश. - भारत में चीनी निवेश बढ़ाने को लेकर बात.टिप्पणियां रूस - रूस और पाकिस्तान के सामरिक संबंधों को सीमित करने पर बात - रूस से आतंकवाद के मुद्दे पर पूरी तरह साथ लेने की कोशिश बिम्सटेक द्विपक्षीय अभी तक म्यांमार और बांग्लादेश के साथ होना तय. बिम्सटेक (बे ऑफ बंगाल इनिसिएटिव फॉर टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन) - बिम्सटेक में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं. - पांच देश दक्षिण एशिया के और दो दक्षिण पूर्व एशिया के (म्यांमार और थाईलैंड). - भारत ने सार्क देशों की जगह बिम्सटेक देशों को आउटरीच मीटिंग के लिए बुलाया. - भारत के एक्ट इस्ट पॉलिसी पर ज़ोर के चलते ये फैसला. - पाकिस्तान में होने वाले सार्क समिट के टलने के बाद बिम्सटेक की बढ़ी अहमियत. भारत को होंगी ये उम्मीदें... - आतंकवाद के मुद्दे पर ब्रिक्स और बिम्सटेक देशों की तरफ एकजुट निंदा की उम्मीद - बिम्सटेक देशों - चीन और पाकिस्तान के कूटनीतिक रिश्तों के देखते हुए इसमें मुश्किल हो सकता है - आर्थिक मंदी के दौर में ब्रिक्स संगठन में जान फूंकने की कोशिश - आर्थिक मोर्चे पर आपसी सहयोग से मंदी से उबरने के उपाय द्विपक्षीय मुलाक़ातें - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ द्विपक्षीय मुलाक़ातें चीन - चीन और रूस के साथ द्विपक्षीय बातचीत अहम. - चीन से मसूद अज़हर पर यूएन प्रतिबंध को लेकर बात. - सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर साथ देने को लेकर बात. - एनएसजी में भारत की सदस्यता पर चीन से समर्थन हासिल करने की कोशिश. - भारत में चीनी निवेश बढ़ाने को लेकर बात.टिप्पणियां रूस - रूस और पाकिस्तान के सामरिक संबंधों को सीमित करने पर बात - रूस से आतंकवाद के मुद्दे पर पूरी तरह साथ लेने की कोशिश बिम्सटेक द्विपक्षीय अभी तक म्यांमार और बांग्लादेश के साथ होना तय. भारत को होंगी ये उम्मीदें... - आतंकवाद के मुद्दे पर ब्रिक्स और बिम्सटेक देशों की तरफ एकजुट निंदा की उम्मीद - बिम्सटेक देशों - चीन और पाकिस्तान के कूटनीतिक रिश्तों के देखते हुए इसमें मुश्किल हो सकता है - आर्थिक मंदी के दौर में ब्रिक्स संगठन में जान फूंकने की कोशिश - आर्थिक मोर्चे पर आपसी सहयोग से मंदी से उबरने के उपाय द्विपक्षीय मुलाक़ातें - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ द्विपक्षीय मुलाक़ातें चीन - चीन और रूस के साथ द्विपक्षीय बातचीत अहम. - चीन से मसूद अज़हर पर यूएन प्रतिबंध को लेकर बात. - सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर साथ देने को लेकर बात. - एनएसजी में भारत की सदस्यता पर चीन से समर्थन हासिल करने की कोशिश. - भारत में चीनी निवेश बढ़ाने को लेकर बात.टिप्पणियां रूस - रूस और पाकिस्तान के सामरिक संबंधों को सीमित करने पर बात - रूस से आतंकवाद के मुद्दे पर पूरी तरह साथ लेने की कोशिश बिम्सटेक द्विपक्षीय अभी तक म्यांमार और बांग्लादेश के साथ होना तय. द्विपक्षीय मुलाक़ातें - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ द्विपक्षीय मुलाक़ातें चीन - चीन और रूस के साथ द्विपक्षीय बातचीत अहम. - चीन से मसूद अज़हर पर यूएन प्रतिबंध को लेकर बात. - सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर साथ देने को लेकर बात. - एनएसजी में भारत की सदस्यता पर चीन से समर्थन हासिल करने की कोशिश. - भारत में चीनी निवेश बढ़ाने को लेकर बात.टिप्पणियां रूस - रूस और पाकिस्तान के सामरिक संबंधों को सीमित करने पर बात - रूस से आतंकवाद के मुद्दे पर पूरी तरह साथ लेने की कोशिश बिम्सटेक द्विपक्षीय अभी तक म्यांमार और बांग्लादेश के साथ होना तय. चीन - चीन और रूस के साथ द्विपक्षीय बातचीत अहम. - चीन से मसूद अज़हर पर यूएन प्रतिबंध को लेकर बात. - सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर साथ देने को लेकर बात. - एनएसजी में भारत की सदस्यता पर चीन से समर्थन हासिल करने की कोशिश. - भारत में चीनी निवेश बढ़ाने को लेकर बात.टिप्पणियां रूस - रूस और पाकिस्तान के सामरिक संबंधों को सीमित करने पर बात - रूस से आतंकवाद के मुद्दे पर पूरी तरह साथ लेने की कोशिश बिम्सटेक द्विपक्षीय अभी तक म्यांमार और बांग्लादेश के साथ होना तय. रूस - रूस और पाकिस्तान के सामरिक संबंधों को सीमित करने पर बात - रूस से आतंकवाद के मुद्दे पर पूरी तरह साथ लेने की कोशिश बिम्सटेक द्विपक्षीय अभी तक म्यांमार और बांग्लादेश के साथ होना तय. बिम्सटेक द्विपक्षीय अभी तक म्यांमार और बांग्लादेश के साथ होना तय.
दिल्ली : नरेला में वीरेंद्र मान की हत्या की वारदात का सीसीटीवी फुटेज सामने आया
इस वारदात में हमलावरों ने 40 गोलियां चलाईं थी. इस घटना से दिल्ली पुलिस पर सवाल खड़ा हुआ है. इस मामले में दिल्ली के नम्बर वन वांटेड क्रिमिनल जितेंद्र गोगी का नाम सामने आया है. उस पर पांच लाख का इनाम घोषित है. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जितेंद्र गोगी  के गुर्गे कपिल को गिरफ्तार कर लिया है. गोगी की तलाश जारी है वीरेंद्र मान की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी कपिल को पिछले माह ही गिरफ्तार कर लिया था. कपिल गोगी गैंग का शार्पशूटर है. उस पर आठ संगीन मामले पहले से दर्ज हैं. वीरेंद्र मान भी नरेला इलाके का घोषित बदमाश था जो बीएसपी से विधानसभा चुनाव लड़ चुका था. पुलिस के मुताबिक 2018 में कपिल के चाचा बबलू की हत्या अशोक विहार में कर दी गई थी. हत्या के आरोप में प्रवेश को गिरफ्तार किया गया था. उस मामले में वीरेंद्र ने प्रवेश की काफी मदद की थी और उसे अपनी गाड़ी भी दी थी. इसी बात से कपिल नाराज था. कपिल और वीरेंद्र एक ही गांव खेड़ा के रहने वाले हैं.
ब्रिटेन में पाकिस्तानी सामुदायिक केंद्र पर लगाए गए नस्ली पोस्टर, पुलिस की जांच शुरू
ब्रिटेन के मैनचेस्टर में एक पाकिस्तानी साामुदायिक केंद्र, पुस्तकालय और प्राथमिक स्कूल पर नस्ली पोस्टर लगाए गए हैं जिसके बाद घृणा अपराध की जांच शुरू कर दी गई है. दक्षिण मैनचेस्टर के लॉन्गसाइट में घरों के दरवाजों और केंद्र के नलों पर भड़काऊ सामग्री भी लगाई गई है और पास के अर्डविक के स्थानीय पुस्तकालय और सेंट ल्यूक्स प्राथमिक स्कूल पर भी ऐसी ही सामग्री लगाई गई है. ‘इवनिंग स्टैंडर्ड’ ने खबर दी है कि पुलिस का मानना है कि पोस्टर गुरूवार को वितरित किए गए हैं और मामले को घृणा अपराध के तौर पर लिया जा रहा है.टिप्पणियां बहरहाल, पुलिस ने स्पष्ट नहीं बताया कि पोस्टर पर क्या है या नस्लवाद की क्या प्रकृति है. पुलिस ने एक युवक की सीसीटीवी तस्वीर जारी की है जिससे वे घटना के बाबत बात करना चाहते हैं. ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस के पुलिस अधीक्षक के हवाले से कहा गया है ‘मुझे यकीन है कि इन नफरत फैलाने वाले अपराधों के लिए जिम्मदार लोगों का पता लगा लिया जाएगा.’ (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) बहरहाल, पुलिस ने स्पष्ट नहीं बताया कि पोस्टर पर क्या है या नस्लवाद की क्या प्रकृति है. पुलिस ने एक युवक की सीसीटीवी तस्वीर जारी की है जिससे वे घटना के बाबत बात करना चाहते हैं. ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस के पुलिस अधीक्षक के हवाले से कहा गया है ‘मुझे यकीन है कि इन नफरत फैलाने वाले अपराधों के लिए जिम्मदार लोगों का पता लगा लिया जाएगा.’ (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
Mahatma Gandhi: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अपने जन्मदिन पर करते क्या थे, क्या खुद मनाते भी थे
गांधी जयंती के उपलक्ष्य में सरकार की तरफ से स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं. इस पर राही ने कहा, "अगर सफाई के बारे में सोचें तो पहला काम यह होना चाहिए कि देश में सफाई करने वालों को ऐसी सुविधाएं मुहैया कराई जानी चाहिए, जिससे उन्हें गटर में उतर कर सफाई न करनी पड़े. सफाईकर्मियों को मृत्यु के मुंह में धकेलना सरकार के लिए शर्म की बात है."टिप्पणियां उन्होंने कहा, "सफाई महत्वपूर्ण काम है, लेकिन जबतक भारत में सफाईकर्मी एक खास समूह में रहेगा, उसके जीवन को कोई सुरक्षा नहीं मिल सकेगी. यह समाज के माथे पर कलंक है, यह कलंक नहीं मिटेगा, तो गांधी जयंती मनाने से कुछ नहीं होगा."गौरतलब है कि महात्मा गांधी का जन्म दो अक्टूबर, 1969 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था. गांधीजी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था.  (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) उन्होंने कहा, "सफाई महत्वपूर्ण काम है, लेकिन जबतक भारत में सफाईकर्मी एक खास समूह में रहेगा, उसके जीवन को कोई सुरक्षा नहीं मिल सकेगी. यह समाज के माथे पर कलंक है, यह कलंक नहीं मिटेगा, तो गांधी जयंती मनाने से कुछ नहीं होगा."गौरतलब है कि महात्मा गांधी का जन्म दो अक्टूबर, 1969 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था. गांधीजी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था.  (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
राहुल द्रविड ने मानद डॉक्टरेट उपाधि लेने से किया इनकार, कहा मेहनत से डिग्री हासिल करुंगा
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व राहुल द्रविड़ ने बेंगलोर यूनिवर्सिटी की मानद डॉक्टरेट की उपाधि लेने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह खुद शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से यह उपाधि हासिल करेंगे. राहुल द्रविड़ बेंगलूरू में ही पले-बढ़े हैं और यही से उन्होंने शिक्षा हासिल की है. बेंगलोर विश्वविद्यालय 27 जनवरी को अपने 52वें वार्षिक सम्मेलन में द्रविड को यह उपाधि प्रदान करना चाहता था.टिप्पणियां विश्वविद्यालय के कुलपति बी. थिमे गौड़ा ने बताया कि राहुल द्रविड़ ने मानद उपाधि के लिए उन्हें चुने जाने पर बेंगलोर विश्वविद्यालय का शुक्रिया अदा करने के साथ यह संदेश दिया है कि वह मानद उपाधि लेने के बजाय खेल के क्षेत्र में अनुसंधान करने में किसी तरह का शिक्षण कार्य पूरा करके डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करेंगे.   Rahul Dravid declines Bangalore University Hon. degree, says would like to earn doctrate by accomplishing some academic research in sport pic.twitter.com/pP3xqo7EYz — ANI (@ANI_news) 25 जनवरी 2017 इससे पूर्व भी द्रविड़ ने 2014 में गुलबर्गा विश्वविद्यालय के 32वें दीक्षांत समारोह में भाग नहीं लिया था. तब उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि के लिए चुना गया था. googletag.cmd.push(function() { googletag.display('adslotNativeVideo'); }); राहुल द्रविड़ ने 2012 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था. तब से वे भारत 'ए' और अंडर -19 टीमों के कोच के रूप में युवा खिलाड़ियों को क्रिकेट के गुर बता रहे हैं. वे भारतीय टीम की दीवार यानी द वॉल के नाम से भी मशहूर रहे हैं. राहुल द्रविड़ बेंगलूरू में ही पले-बढ़े हैं और यही से उन्होंने शिक्षा हासिल की है. बेंगलोर विश्वविद्यालय 27 जनवरी को अपने 52वें वार्षिक सम्मेलन में द्रविड को यह उपाधि प्रदान करना चाहता था.टिप्पणियां विश्वविद्यालय के कुलपति बी. थिमे गौड़ा ने बताया कि राहुल द्रविड़ ने मानद उपाधि के लिए उन्हें चुने जाने पर बेंगलोर विश्वविद्यालय का शुक्रिया अदा करने के साथ यह संदेश दिया है कि वह मानद उपाधि लेने के बजाय खेल के क्षेत्र में अनुसंधान करने में किसी तरह का शिक्षण कार्य पूरा करके डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करेंगे.   Rahul Dravid declines Bangalore University Hon. degree, says would like to earn doctrate by accomplishing some academic research in sport pic.twitter.com/pP3xqo7EYz — ANI (@ANI_news) 25 जनवरी 2017 इससे पूर्व भी द्रविड़ ने 2014 में गुलबर्गा विश्वविद्यालय के 32वें दीक्षांत समारोह में भाग नहीं लिया था. तब उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि के लिए चुना गया था. राहुल द्रविड़ ने 2012 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था. तब से वे भारत 'ए' और अंडर -19 टीमों के कोच के रूप में युवा खिलाड़ियों को क्रिकेट के गुर बता रहे हैं. वे भारतीय टीम की दीवार यानी द वॉल के नाम से भी मशहूर रहे हैं. विश्वविद्यालय के कुलपति बी. थिमे गौड़ा ने बताया कि राहुल द्रविड़ ने मानद उपाधि के लिए उन्हें चुने जाने पर बेंगलोर विश्वविद्यालय का शुक्रिया अदा करने के साथ यह संदेश दिया है कि वह मानद उपाधि लेने के बजाय खेल के क्षेत्र में अनुसंधान करने में किसी तरह का शिक्षण कार्य पूरा करके डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करेंगे.   Rahul Dravid declines Bangalore University Hon. degree, says would like to earn doctrate by accomplishing some academic research in sport pic.twitter.com/pP3xqo7EYz — ANI (@ANI_news) 25 जनवरी 2017 इससे पूर्व भी द्रविड़ ने 2014 में गुलबर्गा विश्वविद्यालय के 32वें दीक्षांत समारोह में भाग नहीं लिया था. तब उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि के लिए चुना गया था. राहुल द्रविड़ ने 2012 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था. तब से वे भारत 'ए' और अंडर -19 टीमों के कोच के रूप में युवा खिलाड़ियों को क्रिकेट के गुर बता रहे हैं. वे भारतीय टीम की दीवार यानी द वॉल के नाम से भी मशहूर रहे हैं. Rahul Dravid declines Bangalore University Hon. degree, says would like to earn doctrate by accomplishing some academic research in sport pic.twitter.com/pP3xqo7EYz राहुल द्रविड़ ने 2012 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था. तब से वे भारत 'ए' और अंडर -19 टीमों के कोच के रूप में युवा खिलाड़ियों को क्रिकेट के गुर बता रहे हैं. वे भारतीय टीम की दीवार यानी द वॉल के नाम से भी मशहूर रहे हैं.
Sarkari Naukri: 10वीं पास के लिए ONGC और भारतीय डाक विभाग में निकली बंपर वैकेंसी, जानिए डिटेल
पद का नाम: मल्टी टास्किंग स्टाफ योग्यता: 10TH या ITI पदों की संख्या: 46 पद वेतन: 18000 रुपये अनुभव: फ्रेशर आवेदन करने की अंतिम तिथि: 28/02/2019 ऑफिशियल नोटिफिकेशन वैकेंसी की डिटेल के लिए यहां क्लिक करें. सरकारी नौकरी की खबरों के लिए यहां क्लिक करें.
'मन की बात' के लिए पीएम मोदी ने मांगे विचार, तंज कसते हुए राहुल गांधी बोले- ये 3 लीजिए
Dear @narendramodi, since you've requested some ideas for your #MannKiBaat monologue, tell us about how you plan to: 1. Get our youth JOBS 2. Get the Chinese out of DHOKA-LAM 3. Stop the RAPES in Haryana. pic.twitter.com/pwexqxKrTQ — Office of RG (@OfficeOfRG) January 19, 2018 1. Get our youth JOBS 2. Get the Chinese out of DHOKA-LAM 3. Stop the RAPES in Haryana. pic.twitter.com/pwexqxKrTQ
लादेन को समुद्र में दफनाने वाला युद्धपोत दिखाया गया
अमेरिकी अधिकारियों ने यूएसएस कार्ल विल्सन युद्धपोत पर पर्यटकों का स्वागत किया। इसी पोत से अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को समुद्र में दफनाया गया था, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने लादेन को मारने के लिए चलाए गए गोपनीय अभियान के बारे में किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं की, जो अमेरिका की संभावित जवाबी कार्रवाई के प्रति आशंका को दर्शाता है। अमेरिकी रक्षा अधिकारी पाकिस्तान के ऐबटाबाद में लादेन को मारने के लिए चलाए गए अभियान को अंजाम देने वाले कमांडो, खासतौर से नौसेना की सील टीम की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगे थे। कार्ल विन्सन के दक्षिणी चीनी सागर में बढ़ने के दौरान पत्रकारों के एक समूह को पोत पर आने और इस 97 हजार टन वजनी पोत के नाविकों से बातचीत करने के लिए आमंत्रित किया गया। इस पोत ने मनीला के तट पर तीन अन्य युद्धपोतों के साथ लंगर डाला हुआ था। कार्ल विन्सन पर पहुंचने के लिए 30 मिनट की नौका यात्रा के दौरान अमेरिकी दूतावास की प्रवक्ता वोसिनलेस मेजेंगिया ने करीब दो दर्जन पत्रकारों को बताया कि पोत पर सवार कोई भी व्यक्ति लादेन के बारे में बात नहीं करेगा। उन्होंने कहा, पोत पर मौजूद किसी को भी लादेन से संबंधित अभियान के बारे में बातचीत करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है।
अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद छगन भुजबल की याचिका खारिज की
पिछले महीने उच्चतम न्यायालय ने यह कहते हुए धनशोधन के आरोपी व्यक्ति के लिए जमानत की एक कठोर शर्त रद्द कर दी थी कि यह 'साफ तौर पर मनमानी' है. न्यायालय ने कहा था कि जमानत दिए जाने से पहले अभियोजक पक्ष के वकील से पक्ष सुनने जैसी शर्त तय करने वाली पीएमएलए की धारा 45 (1) 'तर्कहीन' है. उस समय दोनों नेताओं की जमानत याचिकाएं लंबित थीं. उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद स्थानीय अदालत ने नए सिरे से दलीलें सुनीं.
सोना का दाम 38,820 रुपये की नई ऊंचाई पर, चांदी में 1,140 रुपये का उछाल
आभूषण कारोबारियों के सतत लिवाली के समर्थन से दिल्ली सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने का भाव 50 रुपये की तेजी के साथ 38,820 रुपये की नई ऊंचाई को छू गया. अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं के ताजा उठाव की वजह से चांदी की कीमत भी 1,140 रुपये के उछाल के साथ 45,040 रुपये प्रति किग्रा हो गई. बाजार सूत्रों ने सोने की कीमतों में तेजी आने का श्रेय घरेलू हाजिर बाजार की मांग में आई तेजी को दिया. उन्होंने कहा कि हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी के रुख ने लाभ को कुछ सीमित कर दिया. उन्होंने कहा कि शेयर बाजार में नरमी के कारण भी सर्राफा कीमतों में तेजी आई क्योंकि सुस्त शेयर बाजार की जगह निवेशकों ने सर्राफा की ओर अपना रुझान दिखाया. अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में सोने की कीमत में कमजोरी रही लेकिन यह 1,500 डॉलर प्रति औंस के आसपास ही मंडराता रहा. न्यूयॉर्क मेंहाजिर सोने का भाव कम यानी 1,499.20 डॉलर प्रति औंस था जबकि चांदी गिरावट दर्शाता 17.08 डॉलर प्रति औंस था. राष्ट्रीय राजधानी में 99.9 और 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव 50 - 50 रुपये की तेजी के साथ क्रमश: 38,820 रुपये और 38,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. गिन्नी की कीमत 200 रुपये की तेजी के साथ 28,800 रुपये प्रति आठ ग्राम हो गई. इस बीच हाजिर चांदी 1,140 रुपये के उछाल के साथ 45,040 रुपये प्रति किग्रा और चांदी साप्ताहिक डिलीवरी का भाव 210 रुपये की तेजी दर्शाता 43,632 रुपये प्रति किग्रा हो गया. चांदी सिक्कों की भी अच्छी मांग थी और इसकी कीमत 2,000 रुपये की तेजी के साथ लिवाल 91,000 रुपये और बिकवाल 92,000 रुपये प्रति सैकड़ा हो गई.
हरियाणा : पानी विवाद को लेकर पिता-पुत्र की गोली मार कर हत्या
हरियाणा में सोनीपत जिले के एक गांव में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर गोली मार कर दो लोगों की हत्या कर दी. यह विवाद खेतों में पानी वितरण को लेकर शुरू हुआ था जिसमें पिता-पुत्र की हत्या हो गई. पुलिस ने बताया कि आरोपी ने गांव में 55 वर्षीय व्यक्तिऔर उसके बेटे (26) की गोली मार कर हत्या कर दी.टिप्पणियां उन्होंने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गये हैं. अधिकारी ने बताया कि आरोपी और उसके कुछ सहयोगियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है और मामले की जांच की जा रही है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) उन्होंने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गये हैं. अधिकारी ने बताया कि आरोपी और उसके कुछ सहयोगियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है और मामले की जांच की जा रही है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं युवा खिलाड़ी : धोनी
भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने इंग्लैंड के खिलाफ लगातार दो मैच में बड़ी जीत का श्रेय काफी हद तक युवा खिलाड़ियों को देते हुए सोमवार को कि कई बड़े नामों की अनुपस्थिति में इन क्रिकेटरों ने अपनी भूमिका अच्छी तरह से निभायी है। धोनी ने दूसरे मैच में आठ विकेट की जोरदार जीत के बाद कहा, जीत हमेशा महत्वपूर्ण होती है और जब यह जीत युवाओं के दम पर मिलती है तो वह खास हो जाती है। मुझे खुशी है कि युवा खिलाड़ियों ने जरूरत के समय अच्छा प्रदर्शन किया। हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बल्ले और गेंद से उनसे जैसे प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे थे वे वैसा कर रहे हैं। भारतीय कप्तान ने विशेषकर रूप से तेज गेंदबाज आर विनयकुमार, उमेश यादव, विराट कोहली और स्पिनरों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, जीत का श्रेय पूरी टीम को जाता है लेकिन युवाओं का योगदान अहम रहा। भारत इस मैच में सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, जहीर खान जैसे खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में खेल रहा है। धोनी ने कोहली के बारे में कहा, उसने वास्तव में बहुत अच्छी बल्लेबाजी की। वह युवा है और उसे ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी करने के अधिक मौके दिए जाना जरूरी था ताकि उसे अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में तब्दील करने का मौका मिल जाए। उसमें अब भी सुधार की जरूरत है लेकिन मुझे विश्वास है कि जिस तरह से उसने समय के साथ अपने खेल में सुधार जारी रखा है, वह आगे भी ऐसा करेगा। धोनी ने कहा, गंभीर की नंबर तीन पर पारी काफी महत्वपूर्ण रही। इंग्लैंड के गेंदबाजों को उस समय हल्की स्विंग मिल रही थी और ऐसे में विकेट पर जमे रहना अहम था। गौतम ने शानदार पारी खेली। उनके और कोहली के बीच की साझेदारी ने वास्तव में मैच कुछ हद तक एकतरफा कर दिया। उन्होंने यादव के बारे में कहा कि वह लगातार 130 और 140 किमी की गति से गेंदबाजी कर रहा है। लेकिन गति ही सब कुछ नहीं होती है। उसे सटीकता, जरूरत पड़ने पर बाउंसर, यार्कर और वैरीएशन भी सीखने होंगे। उम्मीद है कि अनुभव मिलने पर वह इन्हें सीखता रहेगा। इसके साथ ही उसे चोट से भी बचना होगा ताकि वह चोट के कारण कभी कोई मैच मिस नहीं करे। धोनी ने कहा, हम विनयकुमार और प्रवीण के योगदान को नहीं भूल सकते। उन्होंने हमें शुरू में ही सफलता दिलायी और फिर गेंदबाजों ने किसी भी समय लंबी साझेदारी नहीं बनने दी। यह काफी महत्वपूर्ण रहा। धोनी से जब पूछा गया कि भारत अपनी सरजमीं पर अच्छी जीत दर्ज कर रहा है जबकि इंग्लैंड में ऐसा नहीं कर पाया, उन्होंने कहा, मैं इसका एक कारण नहीं बता सकता। इसके कई कारण हो सकते हैं। मुझे लगता है कि वहां की परिस्थितियां हमारे स्पिनरों के अनुकूल नहीं थी जबकि वे हमारे आक्रमण के मुख्य अंग हैं। इसके अलावा वहां डकवर्थ लुईस के कारण भी हमारी कुछ मैच में हार हुई। इन जीत में कोच डंकन फ्लैचर के योगदान के बारे में उन्होंने कहा, फ्लैचर ने काफी प्रभाव डाला है। वह अब भी हमें वैसे ही इनपुट दे रहे हैं जैसे इंग्लैंड में दे रहे थे। कभी ये चल जाते हैं कभी नहीं चल पाते। आखिर में खेलना खिलाड़ियों को होता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर को सभी परिस्थितियों से तालमेल बिठाना आना जरूरी है। सही समय पर सही प्रदर्शन करना महत्व रखता है। हमने वैसे अपने एबीसी सभी प्लान तैयार रखे हैं।
विदेशी निवेशकों का गत सप्ताह खरीदारी पर रहा जोर
गत सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का रुझान रहने के बावजूद विदेशी निवेशकों ने कुल 1,250 करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी की। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा मुख्य दरों में 50 आधार अंकों की वृद्धि करने के बाद शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखी गई, इसके बावजूद विदेशी निवेशकों ने 29 जुलाई को समाप्त सप्ताह में यह खरीदारी की। बम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक आलोच्य सप्ताह में 525.10 अंकों की गिरावट के साथ 18,197.20 पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी इस अवधि में 152 अंकों की गिरावट के साथ 5,482 पर बंद हुआ। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई के पूरे महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख खरीददारी का रहा, जिन्होंने इस माह 1.8 अरब डॉलर की खरीददारी की। विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने घरेलू निवेशकों की तर्ज पर इसलिए बिकवाली नहीं की, क्योंकि उनके पास वैश्विक बाजार में कोई बेहतर विकल्प नहीं था। एंजल ब्रोकिंग ने एक टिप्पणी में कहा कि अगस्त के पहले सप्ताह में कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के सामने आने के बाद ही विदेशी निवेशक खरीदारी या बिकवाली को लेकर कोई रुझान अख्तियार कर सकते हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस वर्ष जुलाई तक शेयर बाजार में कुल लगभग 2.43 अरब डॉलर का निवेश किया है। वर्ष 2010 में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजारों में 28.83 अरब डॉलर का निवेश किया था।
हरियाणा का सुप्रीम कोर्ट में आश्वासन, मामले के निपटारे तक नहीं करेगा दिल्ली में पानी की सप्लाई बाधित
हालांकि हरियाणा सरकार ने कहा कि दिल्ली सरकार के 450 क्यूसेक पानी प्रतिदिन छोड़ने की मांग पर विचार करेगा. दरअसल राजधानी दिल्ली में पानी की दिक्कत पैदा होने को हवाला देते हुए दिल्ली जल बोर्ड ने हरियाणा सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.  दिल्ली जल बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह अंतरिम आदेश जारी कर हरियाणा सरकार को यमुना में कम से कम 450 क्यूसेक पानी प्रतिदिन छोड़ने का निर्देश दे.  हरियाणा इस समय 330 क्यूसेक पानी प्रतिदिन दिल्ली को दे रहा है.
NDTV EXCLUSIVE : दिल्ली के संगम विहार की 'लेडी डॉन' के साम्राज्य पर पुलिस का शिकंजा
अपराध की वजह से संगम विहार को लोग संकट विहार भी कहते हैं लेकिन पुलिस की हाल की कार्रवाई से अपराधियों में तो खौफ पैदा हुआ है, यहां के लोग भी खुश हैं.
समंदर में दिलेरी की दास्तान, फैलिन में फंसे जहाज को बचाया गया
बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान फैलिन की चपेट में चीन का मालवाहक जहाज एमवी बिंगो फंस गया था। इस जहाज में सवार 18 नाविकों को बचा लिया गया है, जो समंदर में करीब 48 घंटे तक मौत से जूझते रहे। दरअसल, भारतीय कोस्ट गार्ड के डोर्नियर विमान ने लगातर खराब मौसम के बीच सर्च ऑपरेशन चलाया, फिर दीघा के पास सोमवार इन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। बचाए गए लोगों में चीन के 17 और म्यांमार का एक नागरिक है। गौरतलब है कि शुक्रवार को चीन का यह जहाज पश्चिम बंगाल की हल्दिया बंदरगाह से निकला था। जहाज पर 2000 मीट्रिक टन कच्चा लोहा लदा था, लेकिन यह जहाज तूफानी हवाओें और उफनती लहरों के बीच समंदर में फंस गया।
काउंटी क्रिकेट : आपस में टकरा कर मैदान में बेहोश हुए हेनरिकेज़ और बर्न्स
इंग्लिश काउंटी में चल रहे नैटवेस्ट टी-20 क्रिकेट में ससेक्स और सर्रे के बीच खेले गए मुक़ाबले में एक कैच को लपकने की कोशिश में ऑस्ट्रेलिया ऑलराउंडर मोज़ेज़ हेनरिकेज़ और काउंटी क्रिकेटर रोरी बर्न्स आपस में टकरा गए। ये टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों क्रिकेटर मैदान में बेहोश हो गए। दोनों के इलाज के लिए आनन फानन में एंबुलेंस को मैदान में लाया गया। इसके बाद दोनों को होश आया और उन्हें अस्पताल में दाखिल कराया गया। सर्रे काउंटी की ओर से खेलने वाले ये दोनों क्रिकेटर ससैक्स के बल्लेबाज़ स्टीफन पायलट के हवा में उठा कर मारे गए शाट्स को लपकने की कोशिश कर रहे थे। टॉम कूरन की गेंद पर पायलट की इस शाट्स को पकड़ने के लिए बर्न्स और हेनरिकेज़ आपस में टकरा गए। टक्कर के दौरान दोनों के सिर में गंभीर चोट लगी और दोनों गिरने के बाद होश गंवा बैठे। सर्रे के बाकी खिलाड़ियों ने मौके की नज़ाकत को भांपते हुए तुरंत एंबुलेंस बुलवाया लिया। खिलाड़ियों के इलाज के ग्राउंड में तीन एंबुलेंस नजर आए। हेनरिकेज़ को जब स्ट्रैचर में उठाया गया तो उन्होंने दर्शकों की तरफ हाथ हिलाकर इशारा भी किया। दोनों क्रिकेटरों को चिचेस्टर स्थित सेंट रिचर्ड अस्पताल ले जाया गया। टिप्पणियां राहत की बात यह है कि हेनरिकेज और बर्न्स दोनों खतरे से बाहर हैं। टीम प्रबंधन के मुताबिक, हेनेरिकेज़ के जबड़े की हड्डी टूटी है या नहीं, इसका पता एक्स रे की रिपोर्ट के बाद ही चल पाएगा। जब ये हादसा हुआ तब ससैक्स ने 7 विकेट पर 141 रन बना लिए थे, लेकिन इस टक्कर के चलते मैच को रद्द कर दिया गया। 28 साल के हेनरिकेज़ ऑस्ट्रेलिया की ओर से 3 टेस्ट मैच, 6 वनडे और 4 टी-20 मैच खेल चुके हैं। ये टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों क्रिकेटर मैदान में बेहोश हो गए। दोनों के इलाज के लिए आनन फानन में एंबुलेंस को मैदान में लाया गया। इसके बाद दोनों को होश आया और उन्हें अस्पताल में दाखिल कराया गया। सर्रे काउंटी की ओर से खेलने वाले ये दोनों क्रिकेटर ससैक्स के बल्लेबाज़ स्टीफन पायलट के हवा में उठा कर मारे गए शाट्स को लपकने की कोशिश कर रहे थे। टॉम कूरन की गेंद पर पायलट की इस शाट्स को पकड़ने के लिए बर्न्स और हेनरिकेज़ आपस में टकरा गए। टक्कर के दौरान दोनों के सिर में गंभीर चोट लगी और दोनों गिरने के बाद होश गंवा बैठे। सर्रे के बाकी खिलाड़ियों ने मौके की नज़ाकत को भांपते हुए तुरंत एंबुलेंस बुलवाया लिया। खिलाड़ियों के इलाज के ग्राउंड में तीन एंबुलेंस नजर आए। हेनरिकेज़ को जब स्ट्रैचर में उठाया गया तो उन्होंने दर्शकों की तरफ हाथ हिलाकर इशारा भी किया। दोनों क्रिकेटरों को चिचेस्टर स्थित सेंट रिचर्ड अस्पताल ले जाया गया। टिप्पणियां राहत की बात यह है कि हेनरिकेज और बर्न्स दोनों खतरे से बाहर हैं। टीम प्रबंधन के मुताबिक, हेनेरिकेज़ के जबड़े की हड्डी टूटी है या नहीं, इसका पता एक्स रे की रिपोर्ट के बाद ही चल पाएगा। जब ये हादसा हुआ तब ससैक्स ने 7 विकेट पर 141 रन बना लिए थे, लेकिन इस टक्कर के चलते मैच को रद्द कर दिया गया। 28 साल के हेनरिकेज़ ऑस्ट्रेलिया की ओर से 3 टेस्ट मैच, 6 वनडे और 4 टी-20 मैच खेल चुके हैं। सर्रे काउंटी की ओर से खेलने वाले ये दोनों क्रिकेटर ससैक्स के बल्लेबाज़ स्टीफन पायलट के हवा में उठा कर मारे गए शाट्स को लपकने की कोशिश कर रहे थे। टॉम कूरन की गेंद पर पायलट की इस शाट्स को पकड़ने के लिए बर्न्स और हेनरिकेज़ आपस में टकरा गए। टक्कर के दौरान दोनों के सिर में गंभीर चोट लगी और दोनों गिरने के बाद होश गंवा बैठे। सर्रे के बाकी खिलाड़ियों ने मौके की नज़ाकत को भांपते हुए तुरंत एंबुलेंस बुलवाया लिया। खिलाड़ियों के इलाज के ग्राउंड में तीन एंबुलेंस नजर आए। हेनरिकेज़ को जब स्ट्रैचर में उठाया गया तो उन्होंने दर्शकों की तरफ हाथ हिलाकर इशारा भी किया। दोनों क्रिकेटरों को चिचेस्टर स्थित सेंट रिचर्ड अस्पताल ले जाया गया। टिप्पणियां राहत की बात यह है कि हेनरिकेज और बर्न्स दोनों खतरे से बाहर हैं। टीम प्रबंधन के मुताबिक, हेनेरिकेज़ के जबड़े की हड्डी टूटी है या नहीं, इसका पता एक्स रे की रिपोर्ट के बाद ही चल पाएगा। जब ये हादसा हुआ तब ससैक्स ने 7 विकेट पर 141 रन बना लिए थे, लेकिन इस टक्कर के चलते मैच को रद्द कर दिया गया। 28 साल के हेनरिकेज़ ऑस्ट्रेलिया की ओर से 3 टेस्ट मैच, 6 वनडे और 4 टी-20 मैच खेल चुके हैं। टॉम कूरन की गेंद पर पायलट की इस शाट्स को पकड़ने के लिए बर्न्स और हेनरिकेज़ आपस में टकरा गए। टक्कर के दौरान दोनों के सिर में गंभीर चोट लगी और दोनों गिरने के बाद होश गंवा बैठे। सर्रे के बाकी खिलाड़ियों ने मौके की नज़ाकत को भांपते हुए तुरंत एंबुलेंस बुलवाया लिया। खिलाड़ियों के इलाज के ग्राउंड में तीन एंबुलेंस नजर आए। हेनरिकेज़ को जब स्ट्रैचर में उठाया गया तो उन्होंने दर्शकों की तरफ हाथ हिलाकर इशारा भी किया। दोनों क्रिकेटरों को चिचेस्टर स्थित सेंट रिचर्ड अस्पताल ले जाया गया। टिप्पणियां राहत की बात यह है कि हेनरिकेज और बर्न्स दोनों खतरे से बाहर हैं। टीम प्रबंधन के मुताबिक, हेनेरिकेज़ के जबड़े की हड्डी टूटी है या नहीं, इसका पता एक्स रे की रिपोर्ट के बाद ही चल पाएगा। जब ये हादसा हुआ तब ससैक्स ने 7 विकेट पर 141 रन बना लिए थे, लेकिन इस टक्कर के चलते मैच को रद्द कर दिया गया। 28 साल के हेनरिकेज़ ऑस्ट्रेलिया की ओर से 3 टेस्ट मैच, 6 वनडे और 4 टी-20 मैच खेल चुके हैं। सर्रे के बाकी खिलाड़ियों ने मौके की नज़ाकत को भांपते हुए तुरंत एंबुलेंस बुलवाया लिया। खिलाड़ियों के इलाज के ग्राउंड में तीन एंबुलेंस नजर आए। हेनरिकेज़ को जब स्ट्रैचर में उठाया गया तो उन्होंने दर्शकों की तरफ हाथ हिलाकर इशारा भी किया। दोनों क्रिकेटरों को चिचेस्टर स्थित सेंट रिचर्ड अस्पताल ले जाया गया। टिप्पणियां राहत की बात यह है कि हेनरिकेज और बर्न्स दोनों खतरे से बाहर हैं। टीम प्रबंधन के मुताबिक, हेनेरिकेज़ के जबड़े की हड्डी टूटी है या नहीं, इसका पता एक्स रे की रिपोर्ट के बाद ही चल पाएगा। जब ये हादसा हुआ तब ससैक्स ने 7 विकेट पर 141 रन बना लिए थे, लेकिन इस टक्कर के चलते मैच को रद्द कर दिया गया। 28 साल के हेनरिकेज़ ऑस्ट्रेलिया की ओर से 3 टेस्ट मैच, 6 वनडे और 4 टी-20 मैच खेल चुके हैं। राहत की बात यह है कि हेनरिकेज और बर्न्स दोनों खतरे से बाहर हैं। टीम प्रबंधन के मुताबिक, हेनेरिकेज़ के जबड़े की हड्डी टूटी है या नहीं, इसका पता एक्स रे की रिपोर्ट के बाद ही चल पाएगा। जब ये हादसा हुआ तब ससैक्स ने 7 विकेट पर 141 रन बना लिए थे, लेकिन इस टक्कर के चलते मैच को रद्द कर दिया गया। 28 साल के हेनरिकेज़ ऑस्ट्रेलिया की ओर से 3 टेस्ट मैच, 6 वनडे और 4 टी-20 मैच खेल चुके हैं। जब ये हादसा हुआ तब ससैक्स ने 7 विकेट पर 141 रन बना लिए थे, लेकिन इस टक्कर के चलते मैच को रद्द कर दिया गया। 28 साल के हेनरिकेज़ ऑस्ट्रेलिया की ओर से 3 टेस्ट मैच, 6 वनडे और 4 टी-20 मैच खेल चुके हैं।
एयरटेल लाया नया अनलिमिटेड प्‍लान, असीमित कॉल के साथ इंटरनेट सुविधा भी
मोबाइल सेवा बाजार में लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच प्रमुख दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी भारती एयरटेल ने शुक्रवार को नई पोस्टपेड योजना की घोषणा की है. इसमें 3जी-4जी डेटा सुविधा के साथ असीमित मोबाइल कॉल सुविधा उपलब्ध होगी. नये पैक की कीमत 1,199 रुपये रखी गई है. एयरटेल की विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘1,199 रुपये के नये ‘इनफिनिटी’ पैक के साथ ग्राहकों को असीमित कॉल का लाभ मिलेगा. यह कॉल स्थानीय, एसटीडी और राष्ट्रीय रोमिंग कॉल हो सकती है. इसके साथ ही ग्राहक को एक जीबी 3जी-4जी, 100 एसएमएस प्रतिदिन डाटा के साथ विंक म्यूजिक और विंक फिल्म के लिये निशुल्क ग्राहक सुविधा उपलब्ध होगी.’’ एक अन्य पैक में 1,599 रुपये में असीमित मोबाइल कॉल करने के साथ साथ 100 एसएमएस प्रतिदिन, 5 जीबी 3जी/4जी के साथ विंक संगीत और विंक फिल्म की सुविधा पाने के लिये निशुल्क ग्राहक सेवा उपलब्ध होगी.टिप्पणियां इसमें कहा गया है कि विंक म्यूजिक और विंक मूवी के लिये ग्राहक बनने की सुविधा निशुल्क होगी लेकिन इसमें इंटरनेट शुल्क लागू होगा. रिलायंस जियो अगले एक महीने में अपनी 4जी सेवायें शुरू करने जा रही है. इसे देखते हुए पहले से मोबाइल सेवा क्षेत्र में कार्यरत भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया ने डाटा सेवाओं के क्षेत्र में नये मोर्चों पर काम शुरू कर दिया है. मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस जियो ने 4जी एलवाईएफ हैंडसेट का दाम 25 प्रतिशत घटाकर 2,999 रुपये कर दिया है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) नये पैक की कीमत 1,199 रुपये रखी गई है. एयरटेल की विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘1,199 रुपये के नये ‘इनफिनिटी’ पैक के साथ ग्राहकों को असीमित कॉल का लाभ मिलेगा. यह कॉल स्थानीय, एसटीडी और राष्ट्रीय रोमिंग कॉल हो सकती है. इसके साथ ही ग्राहक को एक जीबी 3जी-4जी, 100 एसएमएस प्रतिदिन डाटा के साथ विंक म्यूजिक और विंक फिल्म के लिये निशुल्क ग्राहक सुविधा उपलब्ध होगी.’’ एक अन्य पैक में 1,599 रुपये में असीमित मोबाइल कॉल करने के साथ साथ 100 एसएमएस प्रतिदिन, 5 जीबी 3जी/4जी के साथ विंक संगीत और विंक फिल्म की सुविधा पाने के लिये निशुल्क ग्राहक सेवा उपलब्ध होगी.टिप्पणियां इसमें कहा गया है कि विंक म्यूजिक और विंक मूवी के लिये ग्राहक बनने की सुविधा निशुल्क होगी लेकिन इसमें इंटरनेट शुल्क लागू होगा. रिलायंस जियो अगले एक महीने में अपनी 4जी सेवायें शुरू करने जा रही है. इसे देखते हुए पहले से मोबाइल सेवा क्षेत्र में कार्यरत भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया ने डाटा सेवाओं के क्षेत्र में नये मोर्चों पर काम शुरू कर दिया है. मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस जियो ने 4जी एलवाईएफ हैंडसेट का दाम 25 प्रतिशत घटाकर 2,999 रुपये कर दिया है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) इसके साथ ही ग्राहक को एक जीबी 3जी-4जी, 100 एसएमएस प्रतिदिन डाटा के साथ विंक म्यूजिक और विंक फिल्म के लिये निशुल्क ग्राहक सुविधा उपलब्ध होगी.’’ एक अन्य पैक में 1,599 रुपये में असीमित मोबाइल कॉल करने के साथ साथ 100 एसएमएस प्रतिदिन, 5 जीबी 3जी/4जी के साथ विंक संगीत और विंक फिल्म की सुविधा पाने के लिये निशुल्क ग्राहक सेवा उपलब्ध होगी.टिप्पणियां इसमें कहा गया है कि विंक म्यूजिक और विंक मूवी के लिये ग्राहक बनने की सुविधा निशुल्क होगी लेकिन इसमें इंटरनेट शुल्क लागू होगा. रिलायंस जियो अगले एक महीने में अपनी 4जी सेवायें शुरू करने जा रही है. इसे देखते हुए पहले से मोबाइल सेवा क्षेत्र में कार्यरत भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया ने डाटा सेवाओं के क्षेत्र में नये मोर्चों पर काम शुरू कर दिया है. मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस जियो ने 4जी एलवाईएफ हैंडसेट का दाम 25 प्रतिशत घटाकर 2,999 रुपये कर दिया है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) इसमें कहा गया है कि विंक म्यूजिक और विंक मूवी के लिये ग्राहक बनने की सुविधा निशुल्क होगी लेकिन इसमें इंटरनेट शुल्क लागू होगा. रिलायंस जियो अगले एक महीने में अपनी 4जी सेवायें शुरू करने जा रही है. इसे देखते हुए पहले से मोबाइल सेवा क्षेत्र में कार्यरत भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया ने डाटा सेवाओं के क्षेत्र में नये मोर्चों पर काम शुरू कर दिया है. मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस जियो ने 4जी एलवाईएफ हैंडसेट का दाम 25 प्रतिशत घटाकर 2,999 रुपये कर दिया है. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
स्टूडेंट यूथ असेंबली के लिए मुंबई में जुटे कई विश्वविद्यालयों के छात्र, केंद्र सरकार पर साधा निशाना
हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, एफटीआईआई के छात्र मुंबई में स्टूडेंट यूथ असेंबली के लिए मिले। इनमें राष्ट्रद्रोह के आरोप में जेल जा चुके जेएनयू छात्र संघ के नेता कन्हैया कुमार भी शामिल हुए। पहले कार्यक्रम वर्ली में होना था, लेकिन इजाज़त नहीं मिलने की वजह से इसका आयोजन तिलक नगर के आदर्श विद्यालय में हुआ। इस अवसर पर सभी वक्ताओं के निशाने पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही रहे। राष्ट्रद्रोह के आरोप झेल रहे, जेएएनयू छात्रसंघ नेता कन्हैया कुमार मुंबई पहुंचे तो उनका जोरदार स्वागत हुआ। मंच पर कई विश्वविद्यालयों के छात्र संघ के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता भी जुटे, लेकिन इंतज़ार कन्हैया का था। कन्हैया ने आते ही कह दिया कि वो एक्टर नहीं फाइटर हैं।टिप्पणियां कन्हैया कुमार ने कहा सेल्फी खींचने वाले पीएम के साथ, सेल्फी खींचकर आप आंदोलन नहीं जीत सकते। जुमलेबाज़ों और जांबाज़ों में संघर्ष छिड़ा है। इनकी नफरत देखिए हर शहर में मुझ पर जूता फेंकते हैं, लेकिन वो भी सिर्फ दाएं पैर का, अगर लेफ्ट भी फेंक दें तो जोड़ी बन जाए। कन्हैया यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा सरकार कई कार्यक्रम चला रही है, लेकिन ये 'मेक इन इंडिया' नहीं फेक इन इंडिया है। कन्हैया ने बीजेपी के साइबर सेल पर झूठे वीडियो बनाने का भी आरोप लगाया। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ भी पहुंची, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान जयंती पर शुभकामना देना शर्मनाक लगा। पूर्व जस्टिस कोशले पाटिल और फिल्मकार आनंद पटवर्धन के निशाने पर भी केंद्र सरकार ही रही। पहले कार्यक्रम वर्ली में होना था, लेकिन इजाज़त नहीं मिलने की वजह से इसका आयोजन तिलक नगर के आदर्श विद्यालय में हुआ। इस अवसर पर सभी वक्ताओं के निशाने पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही रहे। राष्ट्रद्रोह के आरोप झेल रहे, जेएएनयू छात्रसंघ नेता कन्हैया कुमार मुंबई पहुंचे तो उनका जोरदार स्वागत हुआ। मंच पर कई विश्वविद्यालयों के छात्र संघ के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता भी जुटे, लेकिन इंतज़ार कन्हैया का था। कन्हैया ने आते ही कह दिया कि वो एक्टर नहीं फाइटर हैं।टिप्पणियां कन्हैया कुमार ने कहा सेल्फी खींचने वाले पीएम के साथ, सेल्फी खींचकर आप आंदोलन नहीं जीत सकते। जुमलेबाज़ों और जांबाज़ों में संघर्ष छिड़ा है। इनकी नफरत देखिए हर शहर में मुझ पर जूता फेंकते हैं, लेकिन वो भी सिर्फ दाएं पैर का, अगर लेफ्ट भी फेंक दें तो जोड़ी बन जाए। कन्हैया यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा सरकार कई कार्यक्रम चला रही है, लेकिन ये 'मेक इन इंडिया' नहीं फेक इन इंडिया है। कन्हैया ने बीजेपी के साइबर सेल पर झूठे वीडियो बनाने का भी आरोप लगाया। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ भी पहुंची, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान जयंती पर शुभकामना देना शर्मनाक लगा। पूर्व जस्टिस कोशले पाटिल और फिल्मकार आनंद पटवर्धन के निशाने पर भी केंद्र सरकार ही रही। राष्ट्रद्रोह के आरोप झेल रहे, जेएएनयू छात्रसंघ नेता कन्हैया कुमार मुंबई पहुंचे तो उनका जोरदार स्वागत हुआ। मंच पर कई विश्वविद्यालयों के छात्र संघ के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता भी जुटे, लेकिन इंतज़ार कन्हैया का था। कन्हैया ने आते ही कह दिया कि वो एक्टर नहीं फाइटर हैं।टिप्पणियां कन्हैया कुमार ने कहा सेल्फी खींचने वाले पीएम के साथ, सेल्फी खींचकर आप आंदोलन नहीं जीत सकते। जुमलेबाज़ों और जांबाज़ों में संघर्ष छिड़ा है। इनकी नफरत देखिए हर शहर में मुझ पर जूता फेंकते हैं, लेकिन वो भी सिर्फ दाएं पैर का, अगर लेफ्ट भी फेंक दें तो जोड़ी बन जाए। कन्हैया यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा सरकार कई कार्यक्रम चला रही है, लेकिन ये 'मेक इन इंडिया' नहीं फेक इन इंडिया है। कन्हैया ने बीजेपी के साइबर सेल पर झूठे वीडियो बनाने का भी आरोप लगाया। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ भी पहुंची, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान जयंती पर शुभकामना देना शर्मनाक लगा। पूर्व जस्टिस कोशले पाटिल और फिल्मकार आनंद पटवर्धन के निशाने पर भी केंद्र सरकार ही रही। कन्हैया कुमार ने कहा सेल्फी खींचने वाले पीएम के साथ, सेल्फी खींचकर आप आंदोलन नहीं जीत सकते। जुमलेबाज़ों और जांबाज़ों में संघर्ष छिड़ा है। इनकी नफरत देखिए हर शहर में मुझ पर जूता फेंकते हैं, लेकिन वो भी सिर्फ दाएं पैर का, अगर लेफ्ट भी फेंक दें तो जोड़ी बन जाए। कन्हैया यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा सरकार कई कार्यक्रम चला रही है, लेकिन ये 'मेक इन इंडिया' नहीं फेक इन इंडिया है। कन्हैया ने बीजेपी के साइबर सेल पर झूठे वीडियो बनाने का भी आरोप लगाया। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ भी पहुंची, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान जयंती पर शुभकामना देना शर्मनाक लगा। पूर्व जस्टिस कोशले पाटिल और फिल्मकार आनंद पटवर्धन के निशाने पर भी केंद्र सरकार ही रही। कन्हैया ने बीजेपी के साइबर सेल पर झूठे वीडियो बनाने का भी आरोप लगाया। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ भी पहुंची, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान जयंती पर शुभकामना देना शर्मनाक लगा। पूर्व जस्टिस कोशले पाटिल और फिल्मकार आनंद पटवर्धन के निशाने पर भी केंद्र सरकार ही रही।
Nach Baliye 9: 'नच बलिए' में इस हफ्ते होगी Wild Card Entry, ये जोड़ी करेगी वापसी
Nach Baliye 9: स्टार प्लस पर आने वाले शो 'नच बलिए 9' अपने हर एपिसोड में कोई न कोई धमाल जरूर मचाता है. ऐसा ही धमाल इस हफ्ते भी 'नच बलिए 9 (Nach Baliye 9)' में देखने को मिलेगा, क्योंकि इस बार शो में वाइल्ड कार्ड एंट्री होगी. शो में जहां एक्स कपल मधुरिमा तुली और आदित्य राज सिंह के वापसी करने के पहले ही कयास लगाए जा रहे थे, अब पिंकविला की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब शो से एलिमिनेट हुई उर्वशी ढोलकिया (Urvashi Dholakia) और अनुज सचदेवा (Anuj Sachdeva) की जोड़ी वापसी करेगी. Kabhi main kahoon kabhi tum kaho.. . . @starplus @banijayasia @apnanuj #UrUj #UrvashiDholakia #UrvashiDholakia9 A post shared by Urvashi Dholakia (@urvashidholakia9) on Aug 24, 2019 at 7:22am PDT रिपोर्ट के मुताबिक अब कुछ ही दिन में शो से एलिमिनेट हुए उर्वशी ढोलकिया (Urvashi Dholakia) और अनुज सचदेवा (Anuj Sachdeva) एक बार फिर वापसी करेंगे और कुछ ही दिन में ये दोनों शो की शूटिंग भी शुरू कर देंगे. बता दें उर्वशी ढोलकिया ने शो से एलिमिनेट होने के बाद कहा था कि शो के जजों ने जानबूझकर ऐसा किया है. And today is our last performance.. Hope you guys enjoy it!! Tonight at 8pm only @starplus @banijayasia ????????????#vishaladityasingh A post shared by Madhurima Tuli (@madhurimatuli) on Aug 31, 2019 at 11:07pm PDT अब शो में ये दोनों एलिमिनेट हुई जोड़ियां 'वाइल्ड कार्ड एंट्री' के लिए आपस में मुकाबला करती नजर आएंगी. इनके अलावा शो में नई जोड़ियां अविनाश सचदेवा (Avinash Sachdeva) और पलक भी इसके लिए मुकाबला करेंगी. वहीं पूजा बनर्जी (Pooja Banerjee) अपने पति संदीप सेजवाल के साथ शो में हिस्सा ले सकती हैं.
ट्रिपल तलाक बिल से बहुत लोगों का जीवन प्रभावित होगा, पहले सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए : कांग्रेस
राज्यसभा में सोमवार को तीन तलाक संबंधी विधेयक  को कांग्रेस ने संयुक्त प्रवर समिति में भेजने की मांग करते हुए कहा कि इससे बहुत सारे लोगों का जीवन प्रभावित होगा. हालांकि सरकार की ओर से कहा गया कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकार से जुड़े इस विधेयक को विपक्ष जानबूझ कर लटकाना चाहता है. उच्च सदन में एक बार के अवकाश के बाद दोपहर दो बजे जब बैठक फिर शुरू हुई तो मुस्लिम महिला विवाह अधिकार सरंक्षण विधेयक 2018 को जब चर्चा के लिए लाया गया. तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि अधिकतर विपक्षी दल के सदस्य जब इस विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजना चाहते हैं तो इसे सरकार प्रवर समिति के पास क्यों नहीं भेज रही है. डेरेक ने उप सभापति हरिवंश से कहा कि इस विधेयक पर चर्चा कराने से पहले सदन में सामान्य स्थिति बहाल की जानी चाहिए. इस बीच द्रमुक एवं अन्नाद्रमुक के सदस्य आसन के समक्ष आकर कावेरी नदी पर बांध बनाने के मुद्दे पर नारेबाजी करने लगे.  हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह एक ऐसा विधेयक है जो बहुत से लोगों के जीवन को प्रभावित करेगा. उन्होंने कहा कि इस लिए जरूरी है कि इस विधेयक को संयुक्त प्रवर समिति में भेजकर इस पर विस्तार से चर्चा करे. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह संसदीय परंपराओं की अनदेखी कर अधिकतर विधेयकों को स्थायी या प्रवर समिति में भेजे बिना इन्हें सीधे संसद में पारित करवाना चाहती है. आजाद ने कहा कि यह मुस्लिम महिलाओं के विवाह से जुड़ा एक अति महत्वपूर्ण विधेयक है और इसे प्रवर समिति में भेज कर इस पर चर्चा करवाया जाना आवश्यक है. इसके बाद संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने कहा कि यह मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा अति महत्वपूर्ण विधेयक है तथा कांग्रेस इस विधेयक को जान बूझकर अटकाना चाहती है. इसीलिए वह इसे प्रवर समिति में भेजने की मांग कर रही है. उन्होंने कहा कि ऐसा क्या हो गया कि जब लोकसभा में कांग्रेस ने इस विधेयक का समर्थन किया था तो वह अब इसको पारित नहीं करवाने दे रही है. उन्होंने विपक्ष पर इस विधेयक पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया. इस मुद्दे पर सदन में कोई सहमति बनने न देख उपसभापति ने दोपहर दो बजकर करीब दस मिनट पर बैठक को पन्द्रह मिनट के लिए स्थगित कर दिय लेकिन बाद में राज्यसभा को स्थगित कर दिया गया और अब 2 जनवरी को फिर कार्यवाही शुरू होगी.
World Cup 2019: टीम इंडिया उतरी मैदान पर तो पीएम मोदी ने किया ट्वीट, लिखा- 'खेल जीतो और...'
World Cup 2019, India Vs South Africa: विश्व कप 2019 (Cricket World Cup 2019) में भारत ने अपने अभियान की शुरुआत कर दी है. साउथ अफ्रीका (Ind Vs SA) के खिलाफ टीम इंडिया ने पहला मैच खेला. जैसे ही विराट कोहली (Virat Kohli) की कप्तानी में टीम इंडिया (Team India) ग्राउंड पर पहुंची तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने टीम इंडिया को शुभकामनाएं दीं. ट्विटर पर उन्होंने टीम इंडिया को शुभकामनाएं दी हैं. वर्ल्ड कप के 8वें दिन भारत ने अपना पहला मैच खेला. टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जीतने का प्रबल दावेदार बताया जा रहा है. ग्राउंड पर उतरते ही पीएम मोदी ने टीम इंडिया को शुभकामनाएं देते हुए लिखा- 'टीम इंडिया आज वर्ल्ड कप 2019 की शुरुआत कर चुकी है. मेरी तरफ उनको शुभकामनाएं. उम्मीद है कि यह टूर्नामेंट अच्छे क्रिकेट का गवाह बने और खेल भावना का जश्न मना सके. खेल भी जीतो और दिल भी...' As #TeamIndia begins it's #CWC19 journey today, best wishes to the entire Team. May this tournament witness good cricket and celebrate the spirit of sportsmanship. खेल भी जीतो और दिल भी ! #INDvSA टीम इंडिया ने प्‍लेइंग इलेवन में मोहम्‍मद शमी के स्‍थान पर भुवनेश्‍वर को स्‍थान दिया है. केएल राहुल और केदार जाधव भी टीम में हैं. दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीकी टीम में हाशिम अमला की वापसी हुई है. चोट के कारण लुंगी एनगिडी टीम से बाहर हैं. न्यूजीलैंड के खिलाफ अभ्यास मैच में स्विंग के सामने भारतीय बल्लेबाज बिखर गए थे. ऐसे में दक्षिण अफ्रीका के दो मुख्य गेंदबाजों का न होना निश्चित ही भारतीय बल्लेबाजों के लिए राहत की बात है.
दिल्ली एसीबी चीफ का आदेश, पूछे बिना FIR दर्ज न करें अफसर : सूत्र
सूत्रों के हवाले से खबर है कि दिल्ली एंटी करप्शन ब्यूरो के चीफ मुकेश मीणा ने एसीबी में तैनात अफसरों को एक आदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है अफसर बिना उनसे पूछे कोई FIR या जांच न करें।टिप्पणियां एसीबी चीफ मुकेश मीणा का ये आदेश एसीबी के एडिशनल कमिश्नर, डीसीपी, एसीपी और एसएचओ को दिया गया है। ख़ास बात ये है कि ये आदेश गुरुवार को ही उस समय जारी हुआ, जब एसीबी चीफ मुकेश मीणा पर करप्शन के आरोप में ही FIR दर्ज होने की खबर चल रही है। ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि अपने खिलाफ FIR रोकने की मंशा से मीणा ने ऐसा आदेश क्यों जारी किया और ऐसा आदेश कितना संवैधानिक है। एसीबी चीफ मुकेश मीणा का ये आदेश एसीबी के एडिशनल कमिश्नर, डीसीपी, एसीपी और एसएचओ को दिया गया है। ख़ास बात ये है कि ये आदेश गुरुवार को ही उस समय जारी हुआ, जब एसीबी चीफ मुकेश मीणा पर करप्शन के आरोप में ही FIR दर्ज होने की खबर चल रही है। ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि अपने खिलाफ FIR रोकने की मंशा से मीणा ने ऐसा आदेश क्यों जारी किया और ऐसा आदेश कितना संवैधानिक है। ख़ास बात ये है कि ये आदेश गुरुवार को ही उस समय जारी हुआ, जब एसीबी चीफ मुकेश मीणा पर करप्शन के आरोप में ही FIR दर्ज होने की खबर चल रही है। ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि अपने खिलाफ FIR रोकने की मंशा से मीणा ने ऐसा आदेश क्यों जारी किया और ऐसा आदेश कितना संवैधानिक है।
जम्मू कश्मीर के शोपियां में पंजाब के सेब व्यापारी की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या की
Jammu & Kashmir: Two Punjab based apple traders, Charanjeet Singh & Sanjeev shot at by terrorists in Trenz, Shopian at around 7:30 pm today. Charanjeet succumbed to his injuries, while Sanjeev is stated to be in a critical condition. बता दें कि इससे पहले आज ही दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में आतंकवादियों ने एक मजदूर की गोली मारकर हत्या कर दी थी. पुलिस ने बताया कि छत्तीसगढ़ के बांसोली इलाके का निवासी एस के सागर पुलवामा में ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता था. पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा, 'यह घटना पुलवामा के काकापोरा इलाके में हुई. हमने हत्यारों को पकड़ने के लिए कई हिस्सों में पुलिस टीमें भेज दी हैं.'  इससे पहले बीते सोमवार को शोपियां में ही आतंकियों ने एक ट्रक को निशाना बनाकर राजस्थान के एक ट्रक ड्राइवर की गोली मारकर हत्या कर दी थी. साथ ही वहां मौजूद एक बाग मालिक की भी पिटाई की गई थी. पुलिस के अनुसार इस घटना में शामिल एक आतंकी का पाकिस्तान से कनेक्शन बताया गया था.
राहुल ने चुनाव आयोग को भेजा जवाब, 'पार्टी की विचारधारा को सामने रखा'
चार दिन की मोहलत के बाद आज मुजफ्फरनगर दंगों पर विवादित बयान देने के मामले में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ई−मेल के जरिये चुनाव आयोग को जवाब भेजा है। दरअसल चुनाव आयोग ने राहुल के विवादित भाषण के संबंध में उन्हें नोटिस भेजा था। राहुल ने कहा, उन्होंने आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया, बल्कि पार्टी की विचारधारा को सामने रखा था, जिसमें कुछ गलत नहीं है। वैसे, राहुल गांधी को 4 नवंबर तक इस नोटिस का जवाब देना था, लेकिन उन्होंने इसके लिए कुछ दिनों का समय मांगा था। आज जवाब देने का अंतिम दिन था। गौरतलब है कि राहुल गांधी ने एक भाषण में कहा था कि मुझफ्फरनगर दंगों के पीड़ित युवकों से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने संपर्क किया है, जिसके बाद बीजेपी ने इस बात की चुनाव आयोग से शिकायत की थी। राहुल का जवाब आयोग द्वारा तय किए गए 11.30 बजे तक की समय सीमा से कुछ देर पहले एक सीलबंद लिफाफे में मुख्य चुनाव आयुक्त तक पहुंचा। मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में चुनाव आयोग राहुल गांधी के जवाब पर विचार कर रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप की 5 साल की नातिन ने किया कुछ ऐसा कि दंग रह गए चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 5 साल की नातिन ने चीनी लोक गीत और कविता से चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का मन मोह लिया. इवांका ट्रंप और जेएयर्ड कुशनर की बेटी अराबेला कुशनर ने फ्लोरिडा में शी चिनफिंग और दूसरे मेहमानों की मौजूदगी में मंदारिन भाषा में गीत और कविता सुनाई. अराबेला के साथ उनका तीन साल का भाई जोसेफ कुशनर भी था. शी और ट्रंप के बीच पहली शिखर बैठक से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति की नातिन ने अपना हुनर दिखाया. अराबेला ने इस दौरान नीले और सफेद रंग की पोशाक पहन रखी थी. उन्होंने शी और पेंग को चीन के तांग वंश के समय के कवि ली बाई की दो कविताएं सुनाईं. इवांका ने अपने बच्चों के बारे में ट्वीट किया, 'अराबेला और जोसेफ पर बहुत गर्व है.'   Very proud of Arabella and Joseph for their performance in honor of President Xi Jinping and Madame Peng Liyuan's official visit to the US! pic.twitter.com/fu3RIh26UO — Ivanka Trump (@IvankaTrump) April 7, 2017 उधर, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनके अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप की पहली मुलाकात में दोनों पक्षों ने 'गलत रणनीतिक आकलनों' से बचने के प्रयासों पर जोर दिया, हालांकि मुद्रा और व्यापार जैसे जटिल मुद्दों लेकर मतभेद बने हुए हैं.टिप्पणियां सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने शिखर बैठक का हवाला देते हुए कहा कि 'उपयोगी' शिखर बैठक से चीन-अमेरिका संबंधों में नया आयाम आया है और इसने यह स्पष्ट संदेश भेजा है कि दुनिया के दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मतभेदों के बावजूद महान सहयोगात्मक साझेदार बन सकते हैं. googletag.cmd.push(function() { googletag.display('adslotNativeVideo'); });(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) शी और ट्रंप के बीच पहली शिखर बैठक से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति की नातिन ने अपना हुनर दिखाया. अराबेला ने इस दौरान नीले और सफेद रंग की पोशाक पहन रखी थी. उन्होंने शी और पेंग को चीन के तांग वंश के समय के कवि ली बाई की दो कविताएं सुनाईं. इवांका ने अपने बच्चों के बारे में ट्वीट किया, 'अराबेला और जोसेफ पर बहुत गर्व है.'   Very proud of Arabella and Joseph for their performance in honor of President Xi Jinping and Madame Peng Liyuan's official visit to the US! pic.twitter.com/fu3RIh26UO — Ivanka Trump (@IvankaTrump) April 7, 2017 उधर, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनके अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप की पहली मुलाकात में दोनों पक्षों ने 'गलत रणनीतिक आकलनों' से बचने के प्रयासों पर जोर दिया, हालांकि मुद्रा और व्यापार जैसे जटिल मुद्दों लेकर मतभेद बने हुए हैं.टिप्पणियां सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने शिखर बैठक का हवाला देते हुए कहा कि 'उपयोगी' शिखर बैठक से चीन-अमेरिका संबंधों में नया आयाम आया है और इसने यह स्पष्ट संदेश भेजा है कि दुनिया के दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मतभेदों के बावजूद महान सहयोगात्मक साझेदार बन सकते हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) Very proud of Arabella and Joseph for their performance in honor of President Xi Jinping and Madame Peng Liyuan's official visit to the US! pic.twitter.com/fu3RIh26UO सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने शिखर बैठक का हवाला देते हुए कहा कि 'उपयोगी' शिखर बैठक से चीन-अमेरिका संबंधों में नया आयाम आया है और इसने यह स्पष्ट संदेश भेजा है कि दुनिया के दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मतभेदों के बावजूद महान सहयोगात्मक साझेदार बन सकते हैं. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
पाकिस्‍तान ने फिर अलापा वही राग, कहा- 'कश्‍मीर मुद्दा अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर उठाते रहेंगे'
पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने कहा कि पाकिस्तान जम्मू एवं कश्मीर का मुद्दा और कश्मीरियों के खिलाफ 'भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे अत्याचारों को' अंतरराष्‍ट्रीय स्तरों पर उजागर करता रहेगा. हुसैन ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मसूद खान को आश्वासन दिया कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार, आत्मनिर्णय के अधिकार को हासिल करने के उनके संघर्ष के साथ खड़ा रहेगा.टिप्पणियां हुसैन ने उम्मीद जताई कि नव निर्वाचित राष्ट्रपति अपने विस्तृत अनुभव और योग्यता को कश्मीर मुद्दे को उजागर करने के अलावा जनता की सेवा में लगाएंगे. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) हुसैन ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मसूद खान को आश्वासन दिया कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार, आत्मनिर्णय के अधिकार को हासिल करने के उनके संघर्ष के साथ खड़ा रहेगा.टिप्पणियां हुसैन ने उम्मीद जताई कि नव निर्वाचित राष्ट्रपति अपने विस्तृत अनुभव और योग्यता को कश्मीर मुद्दे को उजागर करने के अलावा जनता की सेवा में लगाएंगे. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) हुसैन ने उम्मीद जताई कि नव निर्वाचित राष्ट्रपति अपने विस्तृत अनुभव और योग्यता को कश्मीर मुद्दे को उजागर करने के अलावा जनता की सेवा में लगाएंगे. (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
ममता, नीतीश ने AIIMS जाकर पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी का हाल जाना
सूत्रों के अनुसार 93 वर्षीय वाजपेयी की स्थिति में सुधार हो रहा है. हालांकि वह लगातार अस्पताल के कार्डियो थोरैसिक सेंटर के आईसीयू में हैं. वाजपेयी को किडनी में संक्रमण, सीने में जकड़न और यूरीन आउटपुट कम होने के कारण 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था.
नौकरशाही में बदलाव के नाम पर मोदी सरकार का नया स्टंट
इसीलिए इसे नौटंकी कहता हूं. अब जब सवाल पूछे जाएंगे तो नौकरशाही में पेशेवर कमी को पेश कर दो. उस प्रोपेगैंडा का क्या हुआ कि नौकरशाही पर मोदी का संपूर्ण नियंत्रण हैं. सच्चाई में है भी. मोदी ही बताएं कि नतीजा इतना औसत क्यों है...? वह खुद भी तो कथित रूप से दिन-रात काम करते हैं. वही बता सकते हैं कि घंटों भाषण और उसके लिए दिनों यात्राएं करने के अलावा वह काम कब करते हैं. बीच-बीच में प्रचार के लिए वीडियो शूट भी करते हैं और किताब भी लिखते हैं...! कमियां नौकरशाही में हैं या नीतियों में हैं...? ख़राब नीतियों की जवाबदेही किस पर होनी चाहिए...? इसका जवाब आप दें...? बाहर से 10 संयुक्त सचिवों की तैनाती ठीक है, मगर यह स्टंट भी है, जिसमें यह सरकार माहिर है.
तेज विकास के लिए रिजर्व बैंक ने मुख्य दरें घटाई
बैंक दर : (9.5) 9.00 रेपो दर : (8.5) 8.00 रिवर्स रेपो दर : (7.5) 7.00 मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर (9.5) 9.00 नकदी आरक्षी अनुपात (4.75) 4.75 वैधानिक तरलता अनुपात (24) 24.00 आरबीआई के अनुसार, इन नीतिगत निर्णयों से अर्थव्यवस्था के विकास में तेजी लाने, महंगाई कम करने तथा व्यवस्था में तरलता बढ़ाने में मदद मिलेगी।टिप्पणियां मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था का आकलन प्रस्तुत करते हुए सुब्बाराव ने कहा कि आरबीआई का अनुमान है कि 2012-13 सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रह सकती है। बैंक ने कहा, "घरेलू मांग-पूर्ति संतुलन, जिंसों की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों और मांगों को देखते हुए मार्च 2013 के लिए थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर का अनुमान 6.5 फीसदी रखा जाता है।" आरबीआई के अनुसार, इन नीतिगत निर्णयों से अर्थव्यवस्था के विकास में तेजी लाने, महंगाई कम करने तथा व्यवस्था में तरलता बढ़ाने में मदद मिलेगी।टिप्पणियां मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था का आकलन प्रस्तुत करते हुए सुब्बाराव ने कहा कि आरबीआई का अनुमान है कि 2012-13 सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रह सकती है। बैंक ने कहा, "घरेलू मांग-पूर्ति संतुलन, जिंसों की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों और मांगों को देखते हुए मार्च 2013 के लिए थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर का अनुमान 6.5 फीसदी रखा जाता है।" मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था का आकलन प्रस्तुत करते हुए सुब्बाराव ने कहा कि आरबीआई का अनुमान है कि 2012-13 सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रह सकती है। बैंक ने कहा, "घरेलू मांग-पूर्ति संतुलन, जिंसों की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों और मांगों को देखते हुए मार्च 2013 के लिए थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर का अनुमान 6.5 फीसदी रखा जाता है।" बैंक ने कहा, "घरेलू मांग-पूर्ति संतुलन, जिंसों की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों और मांगों को देखते हुए मार्च 2013 के लिए थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर का अनुमान 6.5 फीसदी रखा जाता है।"
BJP ने पहली लिस्ट में घोषित किए यूपी के 28 सहित 184 उम्मीदवार, बिहार के नामों का ऐलान अभी नहीं
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे. गृह मंत्री राजनाथ सिंह पुरानी सीट लखनऊ से लड़ेंगे जबकि नितिन गडकरी नागपुर से प्रत्याशी होंगे. स्मृति ईरानी अमेठी से चुनाव लड़ेंगी. ईरानी के सामने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मुकाबले में होंगे. गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) से डॉ. महेश शर्मा, मुज्जफरनगर से संजीव बालियान, गजियाबाद से वी के सिंह, बागपत से सत्यपाल सिंह, मथुरा से हेमा मालिनी को टिकट दिया गया है. उन्नाव से साक्षी महाराज को टिकट दिया गया है.  केन्द्रीय मंत्री कृष्णा राज की जगह अरुण सागर को शाहजहांपुर से भाजपा उम्मीदवार बनाया गया. छत्तीसगढ़ से पांच सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित किये गए हैं जिसमें बस्तर से बैदूराम कश्यप शामिल हैं. अरूणाचल ईस्ट से किरण रिजिजू को टिकट दिया गया है. धारवाड़ से प्रह्लाद जोशी को टिकट दिया गया है. तिरूवनंतपुरम से के राजशेखरन को टिकट दिया गया है. उधमपुर से जितेन्द्र सिंह को टिकट दिया गया है. केंद्रपाड़ा से बैजयंत पांडा को टिकट दिया गया है. कन्याकुमारी से पी राधाकृष्णन को टिकट दिया गया है. राजस्थान के जोधपुर से गजेन्द्र सिंह शेखावत, बीकानेर से अर्जुन राम मेघवाल, झालावाड़ से दुष्यंत सिंह को टिकट दिया गया है. पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रमुख दिलीप घोष मेदिनीपुर, केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो आसनसोल से चुनाव लड़ेंगे. भाजपा ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, गुजरात,छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा समेत कई राज्यों के उम्मीदवारों की घोषणा की.   BJP candidates for #UttarPradesh: Rajveer Singh (Raju Bhaiya) from Etah, Santosh Kumar Gangwar from Bareilly, Satyapal Singh from Baghpat, Rajendra Agrawal from Meerut, Parmeshwar Lal Saini from Sambhal, Raghav Lakhanpal from Saharanpur. इस लिस्ट में यूपी के 28 उम्मीदवारों का ऐलान किया गया है, लेकिन बिहार के उम्मीदवारों की घोषणा बाद में की जाएगी. यूपी के 28, महाराष्ट्र के 16, असम के आठ, अरुणाचल प्रदेश के दो, छत्तीसगढ़ के छह, अंडमान निकोबार द्वीप सह और दादर नगर हवेली के एक-एक, जम्मू कश्मीर के पांच, कर्नाटक के 21, केरल के 13, लक्षद्वीप के एक, मणिपुर के एक, मिजोरम के दो, ओडिशा के दस, राजस्थान के 16, सिक्किम के एक, तमिलनाडु के पांच, तेलंगाना के दस, त्रिपुरा के दो, उत्तराखंड के पांच, आंध्र प्रदेश के 2 और पश्चिम बंगाल के 28 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया गया है.  नड्डा ने बताया कि भाजपा ने बिहार से पार्टी के सभी 17 उम्मीदवारों के नामों को भी अंतिम रूप दे दिया है और सूची राज्य इकाई को भेज दी गई है जिसकी घोषणा गठबंधन सहयोगियों के साथ की जायेगी. सात चरणों में होने वाले लोकसभा चुनाव 11 अप्रैल से शुरू होंगे और 19 मई तक चलेंगे. मतगणना 23 मई को होगी. देशभर में लोकसभा चुनाव 11 अप्रैल, 18 अप्रैल, 23 अप्रैल, 29 अप्रैल, छह मई, 12 मई और 19 मई को होंगे. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अभी तक उम्मीदवारों के नामों की छह लिस्ट जारी कर चुकी है. मंगलवार को कांग्रेस ने अपनी छठी सूची जारी की थी, जिसमें महाराष्ट्र के 7 और केरल के दो उम्मीदवारों के नाम थे. महाराष्ट्र के यवतमाल वाशिम सीट से महाराष्ट्र कांग्रेस से पूर्व अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे और मुंबई साउथ सेंट्रल से एकनाथ गायकवाड उम्मीदवार होंगे. अलापुज़ा से कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की जगह शनिमोल उस्मान को टिकट दिया गया. कांग्रेस ने अब तक अपने 146 उम्मीदवारों के नाम का एलान कर दिया है. आपको बता दें कि दो दिन पहले ही कांग्रेस ने उम्मीदवारों की पांचवीं सूची जारी की थी. जिसमें उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और लक्षद्वीप की 56 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम शामिल थे.
शूटिंग से वक्त निकालकर आमिर खान के साथ मूवी डेट पर निकले अमिताभ बच्चन
T 2452 - A Sunday and stepped out with my co stars Aamir and Fatima to a movie .. walking care free on the streets, to a movie theatre ! YO pic.twitter.com/hVfqVWrIgB (बॉलीवुड की अन्य बड़ी खबरों को पढ़ने के लिए क्लिक करें)
बिहार में ट्रक व कार की टक्कर में कांवड़िए की मौत, 3 घायल
बिहार के लखीसराय जिले के बरहिया थाना क्षेत्र में मंगलवार को एक ट्रक और एक कार के बीच हुई टक्कर में एक कांवड़िए की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए.टिप्पणियां पुलिस के अनसार, झारखंड के देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम से जल चढ़ाकर (पूजा अर्चना कर) कई कावंड़िए एक कार से हाजीपुर लौट रहे थे, तभी संबलगढ़ गांव के निकट सड़क के किनारे खड़े एक ट्रक से कार टकरा गई. इस घटना में कार में सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि तीन अन्य कार सवार घायल हो गए. बरहिया के थाना प्रभारी नीरज कुमार ने बताया कि मृतक की पहचान पतेन्द्र कुमार (22) के रूप में की गई है. उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद ट्रक का चालक वाहन लेकर फरार हो गया. उन्होंने बताया कि घायल लोगों को स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है. पुलिस के अनसार, झारखंड के देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम से जल चढ़ाकर (पूजा अर्चना कर) कई कावंड़िए एक कार से हाजीपुर लौट रहे थे, तभी संबलगढ़ गांव के निकट सड़क के किनारे खड़े एक ट्रक से कार टकरा गई. इस घटना में कार में सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि तीन अन्य कार सवार घायल हो गए. बरहिया के थाना प्रभारी नीरज कुमार ने बताया कि मृतक की पहचान पतेन्द्र कुमार (22) के रूप में की गई है. उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद ट्रक का चालक वाहन लेकर फरार हो गया. उन्होंने बताया कि घायल लोगों को स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है. बरहिया के थाना प्रभारी नीरज कुमार ने बताया कि मृतक की पहचान पतेन्द्र कुमार (22) के रूप में की गई है. उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद ट्रक का चालक वाहन लेकर फरार हो गया. उन्होंने बताया कि घायल लोगों को स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है.
भाकपा के वरिष्ठ नेता चतुरानन मिश्र का निधन
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाकपा के वरिष्ठ नेता चतुरानन मिश्र का शनिवार को देहांत हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थे। एम्स में पिछले कुछ समय से उपचार करा रहे 86 वर्षीय वयोवृद्ध नेता का अस्पताल में ही निधन हुआ। स्वतंत्रता सेनानी चतुरानन ने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया। उनका जन्म 7 अप्रैल, 1925 को मधुबनी में हुआ था। वह बिहार विधानसभा के लिए 1969 से 1980 के बीच तीन बार चुने गए। 1984 और 1990 में वह राज्यसभा के लिए और 1996 में मधुबनी से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। संयुक्त मोर्चा सरकार में एचडी देवेगौड़ा और आईके गुजराल के प्रधानमंत्रित्व काल में 1996 में वह कृषि मंत्री रहे। वह ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। भाकपा महासचिव डी राजा ने शोक जताते हुए कहा कि चतुरानन के निधन से पार्टी को बड़ी क्षति पंहुची है। उन्होंने कहा कि चतुरानन तीसरी पीढ़ी के प्रमुख नेता थे और उन्होंने पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
खालिस्तानी आतंकियों की रिहाई पर अकाली दल के रुख से बीजेपी की मुश्किल बढ़ी
खालिस्तानी आतंकियों की रिहाई को लेकर लिखी गई मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की चिट्ठी से पंजाब में एक बार फिर सियासी तूफ़ान खड़ा हो गया है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात के मुख्यमंत्रियों के अलावा दिल्ली के उप- राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक को लिखे अपने खत में मुख्यमंत्री बादल ने अलग-अलग जेलों में सज़ायाफ्ता पंजाब के 13 आतंकियों की रिहाई की मांग रखी है। अपनी बात केंद्र सरकार तक पहुंचाने के मक़सद से उप-मुख्यमंत्री सुखबीर बादल अकाली दल के नेताओं के साथ गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलने दिल्ली पहुंचे। मुलाक़ात के बाद सुखबीर बादल ने कहा, 'जो लोग अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, हमने उनकी रिहाई पर नरमी दिखाने की अपील की है। अकाली दल ने हमेशा मुल्क़ के साथ हर लड़ाई लड़ी है, लेकिन मीडिया ने इसका गलत मतलब निकला है।' सुखबीर बादल ने बताया कि राजनाथ सिंह ने उन्हें इस मसले पर कानूनी राय लेने का भरोसा दिया है। अकाली दल जिन आतंकियों की रिहाई की मांग कर रहा है उनमें पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे और 1993 के दिल्ली में युवा कांग्रेस मुख्यालय पर बम हमले में शामिल सज़ायाफ्ता (जगतार सिंह, परमजीत सिंह भेओरा, देविन्दर पाल सिंह भुल्लर और दया सिंह) लाहोरिया दिल्ली की तिहाड़ जेल में क़ैद हैं। लखविंदर सिंह, शमशेर सिंह, गुरमीत सिंह, सुबेग सिंह और नन्द सिंह चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में हैं, जबकि गुरमीत सिंह फौजी राजस्थान की टोंक जेल, गुरदीप सिंह खैर कर्नाटक की गुलबर्ग जेल, वरयाम सिंह बरेली सेंट्रल जेल और लाल सिंह पंजाब की नभ जेल में क़ैद हैं। पंजाब में सिख कट्टरपंथी संगठन रिहाई को लेकर आए दिन प्रदर्शन कर रहे हैं। दरअसल, अम्बाला में एक पूर्व आतंकी गुरबक्स सिंह के धरने को पंजाब में मिल रहे समर्थन के बाद अकाली दल ने ये मुद्दा लपक लिया है। लेकिन, सहयोगी दल बीजेपी को ये सब रास नहीं आ रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव तरुण चुघ का कहना है की, 'अकाली दल को अपनी बात रखने का हक़ है, लेकिन देश में ऐसी मसलों के लिए कानून हैं, जिनका पालन होना चाहिए।' वहीं, विरोधी दल कांग्रेस सत्ताधारी दलों पर आतंक को लेकर सियासत करने का आरोप लगा रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रताप बाजवा ने कहा, 'मैं मुख्यमंत्री से गुज़ारिश करूंगा कि वह पंजाब की एकता के साथ सियासत न करें, ये सब जनता को उल्लू बनाने के लिए हो रहा है।' बाजवा ने आरोप लगाया की, 'पिछले 8 साल से दोनों पार्टियां मिलकर लोगों को लूट रही हैं, अब इनके रास्ते अलग हो रहे हैं, इसलिए बहाने ढूंढ रहे हैं।' इस बीच पंजाब पुलिस ने साफ़ किया है कि उसकी जेल में सिर्फ एक कैदी है जिसे गुजरात में सजा मिली है, लेकिन राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट की पाबन्दी के चलते आजीवन कारावास भुगत रहे कैदियों की रिहाई के बारे में कोई फैसला नहीं ले सकती।
गैर-जिम्मेदाराना शाट्स खेलने की जरूरत नहीं थी : धोनी
सनराइजर्स हैदराबाद के हाथों आईपीएल के मैच में पराजय झेलने के बाद चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा कि बल्लेबाजों को गैर-जिम्मेदाराना शाट्स खेलने की जरूरत नहीं थी।टिप्पणियां धोनी ने कहा, ‘‘इस मैदान पर 180-190 का लक्ष्य बड़ा था। हमने अच्छी शुरुआत नहीं की और शार्ट गेंदें फेंकी। गेंदबाजी अच्छी नहीं थी। एक बार जब उन्होंने 190 रन बना लिये तो हर रन अहम हो गया था। मेरे और फाफ के आउट होने के बाद हम मैच गंवा चुके थे। हमें गैर जिम्मेदाराना शाट्स नहीं खेलने चाहिए थे।’’ मैन ऑफ द मैच डेविड वार्नर ने कहा, ‘‘सर्वाधिक रन बनाकर अच्छा लग रहा है। अभी तक मैने और शिखर ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इतनी शानदार पिच बनाने का श्रेय क्यूरेटर को जाता है।’’ धोनी ने कहा, ‘‘इस मैदान पर 180-190 का लक्ष्य बड़ा था। हमने अच्छी शुरुआत नहीं की और शार्ट गेंदें फेंकी। गेंदबाजी अच्छी नहीं थी। एक बार जब उन्होंने 190 रन बना लिये तो हर रन अहम हो गया था। मेरे और फाफ के आउट होने के बाद हम मैच गंवा चुके थे। हमें गैर जिम्मेदाराना शाट्स नहीं खेलने चाहिए थे।’’ मैन ऑफ द मैच डेविड वार्नर ने कहा, ‘‘सर्वाधिक रन बनाकर अच्छा लग रहा है। अभी तक मैने और शिखर ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इतनी शानदार पिच बनाने का श्रेय क्यूरेटर को जाता है।’’ मैन ऑफ द मैच डेविड वार्नर ने कहा, ‘‘सर्वाधिक रन बनाकर अच्छा लग रहा है। अभी तक मैने और शिखर ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इतनी शानदार पिच बनाने का श्रेय क्यूरेटर को जाता है।’’
जन्मदिन विशेष : मां जैसी अभिनेत्री बनना चाहती थीं सायरा बानो
सायरा बानो उन मशहूर अभिनेत्रियों की गिनती में शुमार रही हैं, जो अपनी खूबसूरती और अभिनय प्रतिभा से सभी का दिल जीतने में सफल रही हैं. उनके अंदाज-ए-बयां ने लोगों को अपना मुरीद बनाया है. सायरा का जन्म 23 अगस्त, 1944 को भारत में हुआ था. उनकी मां नसीम बानो भी अपने समय की मशहूर अभिनेत्री रही हैं. उनके पिता मियां एहसान-उल-हक फिल्म निर्माता थे, जिन्होंने मुंबई में 'फूल' और पाकिस्तान में 'वादा' नामक फिल्म का निर्माण किया. सायरा की दादी छमियां बाई दिल्ली में तवायफ थीं, उन्हें शमशाद बेगम के नाम से भी जाना जाता था. शायरा का अधिकांश बचपन लंदन में बीता, जहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारत लौटीं. स्कूल से ही उन्हें अभिनय से लगाव था और उन्हें वहां अभिनय के लिए कई पदक मिले थे. सायरा कहती हैं कि 12 साल की उम्र से ही वह अल्लाह से प्रार्थना करती थीं कि वह उन्हें अम्मी जैसी हीरोइन बनाए. उल्लेखनीय है कि 17 साल की उम्र में ही सायरा बानो ने बॉलीवुड में कदम रख दिया. उन्होंने 1961 में शम्मी कपूर के साथ फिल्म 'जंगली' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की. उन्होंने इस फिल्म में अपनी अदाओं के ऐसे जलवे बिखेरे कि उनकी छवि एक रोमांटिक हीरोइन की बन गई. उनकी यह फिल्म अपने जमाने की हिट फिल्मों में शुमार हुई. फिर क्या कहना था, सायरा बानो का करियर चल पड़ा. इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया. इसके बाद सायरा बानो ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया. 60 और 70 के दशक में सायरा बानो एक सफल अभिनेत्री के रूप में बॉलीवुड में जगह बना चुकी थीं. वर्ष 1968 की फिल्म 'पड़ोसन' ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया. इस फिल्म ने उनके करियर को जैसे पंख लगा दिए. इसके बाद शायरा ने दिलीप कुमार के साथ 'गोपी', 'सगीना', 'बैराग' जैसी हिट फिल्मों में काम किया. सायरा ने 11 अक्टूबर, 1966 को 22 साल की उम्र में अपने से दोगुने उम्र के दिलीप कुमार से शादी की थी. उस समय दिलीप कुमार 44 साल के थे. दोनों की मुलाकात, प्यार और फिर शादी की कहानी बिल्कुल फिल्मी हैं. बॉलीवुड के प्रेमी जोड़ों की जब भी बात की जाती है तो सायरा बानो और दिलीप कुमार का नाम जरूर आता है. शादी के बाद भी सायरा ने फिल्मों में काम जारी रखा. दिलीप साहब के अलावा वह दूसरे नायकों की भी नायिका बनती रहीं. दिलीप कुमार और सायरा इन दिनों बुढ़ापे की दहलीज पर हैं. दिलीप कुमार अल्जाइमर की बीमारी से पीड़ित हैं और सायरा उनकी एकमात्र सहारा हैं. हर कहीं दोनों एक साथ आते-जाते हैं और एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं. दोनों को कई पार्टियों और फिल्मी प्रीमियर के मौके पर साथ देखा जाता है. सायरा अपने खाली समय को समाज सेवा में लगाती हैं.टिप्पणियां सायरा ने 'जंगली' (1961), 'शादी' (1962),'ब्लफ मास्टर' (1963),'दूर की आवाज' (1964),'आई मिलन की बेला' (1964),'अप्रैल फूल' (1964),'ये जिंदगी कितनी हसीन है' (1966),'प्यार मोहब्बत '(1966),'शागिर्द' (1966),'दीवाना' (1967),'अमन' (1967),'पड़ोसन' (1968),'झुक गया आसमान' (1968),'आदमी और इंसान' (1969), 'पूरब और पश्चिम' (1970),'गोपी' (1970),'बलिदान' (1971),'विक्टोरिया नं. 203' (1972),'दामन और आग' (1973),'आरोप' (1973),'ज्वार भाटा' (1973),'पैसे की गुड़िया' (1974),'दुनिया' (1984), 'फैसला' (1988) जैसी फिल्मों में अभिनय किया.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) सायरा का जन्म 23 अगस्त, 1944 को भारत में हुआ था. उनकी मां नसीम बानो भी अपने समय की मशहूर अभिनेत्री रही हैं. उनके पिता मियां एहसान-उल-हक फिल्म निर्माता थे, जिन्होंने मुंबई में 'फूल' और पाकिस्तान में 'वादा' नामक फिल्म का निर्माण किया. सायरा की दादी छमियां बाई दिल्ली में तवायफ थीं, उन्हें शमशाद बेगम के नाम से भी जाना जाता था. शायरा का अधिकांश बचपन लंदन में बीता, जहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारत लौटीं. स्कूल से ही उन्हें अभिनय से लगाव था और उन्हें वहां अभिनय के लिए कई पदक मिले थे. सायरा कहती हैं कि 12 साल की उम्र से ही वह अल्लाह से प्रार्थना करती थीं कि वह उन्हें अम्मी जैसी हीरोइन बनाए. उल्लेखनीय है कि 17 साल की उम्र में ही सायरा बानो ने बॉलीवुड में कदम रख दिया. उन्होंने 1961 में शम्मी कपूर के साथ फिल्म 'जंगली' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की. उन्होंने इस फिल्म में अपनी अदाओं के ऐसे जलवे बिखेरे कि उनकी छवि एक रोमांटिक हीरोइन की बन गई. उनकी यह फिल्म अपने जमाने की हिट फिल्मों में शुमार हुई. फिर क्या कहना था, सायरा बानो का करियर चल पड़ा. इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया. इसके बाद सायरा बानो ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया. 60 और 70 के दशक में सायरा बानो एक सफल अभिनेत्री के रूप में बॉलीवुड में जगह बना चुकी थीं. वर्ष 1968 की फिल्म 'पड़ोसन' ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया. इस फिल्म ने उनके करियर को जैसे पंख लगा दिए. इसके बाद शायरा ने दिलीप कुमार के साथ 'गोपी', 'सगीना', 'बैराग' जैसी हिट फिल्मों में काम किया. सायरा ने 11 अक्टूबर, 1966 को 22 साल की उम्र में अपने से दोगुने उम्र के दिलीप कुमार से शादी की थी. उस समय दिलीप कुमार 44 साल के थे. दोनों की मुलाकात, प्यार और फिर शादी की कहानी बिल्कुल फिल्मी हैं. बॉलीवुड के प्रेमी जोड़ों की जब भी बात की जाती है तो सायरा बानो और दिलीप कुमार का नाम जरूर आता है. शादी के बाद भी सायरा ने फिल्मों में काम जारी रखा. दिलीप साहब के अलावा वह दूसरे नायकों की भी नायिका बनती रहीं. दिलीप कुमार और सायरा इन दिनों बुढ़ापे की दहलीज पर हैं. दिलीप कुमार अल्जाइमर की बीमारी से पीड़ित हैं और सायरा उनकी एकमात्र सहारा हैं. हर कहीं दोनों एक साथ आते-जाते हैं और एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं. दोनों को कई पार्टियों और फिल्मी प्रीमियर के मौके पर साथ देखा जाता है. सायरा अपने खाली समय को समाज सेवा में लगाती हैं.टिप्पणियां सायरा ने 'जंगली' (1961), 'शादी' (1962),'ब्लफ मास्टर' (1963),'दूर की आवाज' (1964),'आई मिलन की बेला' (1964),'अप्रैल फूल' (1964),'ये जिंदगी कितनी हसीन है' (1966),'प्यार मोहब्बत '(1966),'शागिर्द' (1966),'दीवाना' (1967),'अमन' (1967),'पड़ोसन' (1968),'झुक गया आसमान' (1968),'आदमी और इंसान' (1969), 'पूरब और पश्चिम' (1970),'गोपी' (1970),'बलिदान' (1971),'विक्टोरिया नं. 203' (1972),'दामन और आग' (1973),'आरोप' (1973),'ज्वार भाटा' (1973),'पैसे की गुड़िया' (1974),'दुनिया' (1984), 'फैसला' (1988) जैसी फिल्मों में अभिनय किया.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) शायरा का अधिकांश बचपन लंदन में बीता, जहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारत लौटीं. स्कूल से ही उन्हें अभिनय से लगाव था और उन्हें वहां अभिनय के लिए कई पदक मिले थे. सायरा कहती हैं कि 12 साल की उम्र से ही वह अल्लाह से प्रार्थना करती थीं कि वह उन्हें अम्मी जैसी हीरोइन बनाए. उल्लेखनीय है कि 17 साल की उम्र में ही सायरा बानो ने बॉलीवुड में कदम रख दिया. उन्होंने 1961 में शम्मी कपूर के साथ फिल्म 'जंगली' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की. उन्होंने इस फिल्म में अपनी अदाओं के ऐसे जलवे बिखेरे कि उनकी छवि एक रोमांटिक हीरोइन की बन गई. उनकी यह फिल्म अपने जमाने की हिट फिल्मों में शुमार हुई. फिर क्या कहना था, सायरा बानो का करियर चल पड़ा. इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया. इसके बाद सायरा बानो ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया. 60 और 70 के दशक में सायरा बानो एक सफल अभिनेत्री के रूप में बॉलीवुड में जगह बना चुकी थीं. वर्ष 1968 की फिल्म 'पड़ोसन' ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया. इस फिल्म ने उनके करियर को जैसे पंख लगा दिए. इसके बाद शायरा ने दिलीप कुमार के साथ 'गोपी', 'सगीना', 'बैराग' जैसी हिट फिल्मों में काम किया. सायरा ने 11 अक्टूबर, 1966 को 22 साल की उम्र में अपने से दोगुने उम्र के दिलीप कुमार से शादी की थी. उस समय दिलीप कुमार 44 साल के थे. दोनों की मुलाकात, प्यार और फिर शादी की कहानी बिल्कुल फिल्मी हैं. बॉलीवुड के प्रेमी जोड़ों की जब भी बात की जाती है तो सायरा बानो और दिलीप कुमार का नाम जरूर आता है. शादी के बाद भी सायरा ने फिल्मों में काम जारी रखा. दिलीप साहब के अलावा वह दूसरे नायकों की भी नायिका बनती रहीं. दिलीप कुमार और सायरा इन दिनों बुढ़ापे की दहलीज पर हैं. दिलीप कुमार अल्जाइमर की बीमारी से पीड़ित हैं और सायरा उनकी एकमात्र सहारा हैं. हर कहीं दोनों एक साथ आते-जाते हैं और एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं. दोनों को कई पार्टियों और फिल्मी प्रीमियर के मौके पर साथ देखा जाता है. सायरा अपने खाली समय को समाज सेवा में लगाती हैं.टिप्पणियां सायरा ने 'जंगली' (1961), 'शादी' (1962),'ब्लफ मास्टर' (1963),'दूर की आवाज' (1964),'आई मिलन की बेला' (1964),'अप्रैल फूल' (1964),'ये जिंदगी कितनी हसीन है' (1966),'प्यार मोहब्बत '(1966),'शागिर्द' (1966),'दीवाना' (1967),'अमन' (1967),'पड़ोसन' (1968),'झुक गया आसमान' (1968),'आदमी और इंसान' (1969), 'पूरब और पश्चिम' (1970),'गोपी' (1970),'बलिदान' (1971),'विक्टोरिया नं. 203' (1972),'दामन और आग' (1973),'आरोप' (1973),'ज्वार भाटा' (1973),'पैसे की गुड़िया' (1974),'दुनिया' (1984), 'फैसला' (1988) जैसी फिल्मों में अभिनय किया.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) उल्लेखनीय है कि 17 साल की उम्र में ही सायरा बानो ने बॉलीवुड में कदम रख दिया. उन्होंने 1961 में शम्मी कपूर के साथ फिल्म 'जंगली' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की. उन्होंने इस फिल्म में अपनी अदाओं के ऐसे जलवे बिखेरे कि उनकी छवि एक रोमांटिक हीरोइन की बन गई. उनकी यह फिल्म अपने जमाने की हिट फिल्मों में शुमार हुई. फिर क्या कहना था, सायरा बानो का करियर चल पड़ा. इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया. इसके बाद सायरा बानो ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया. 60 और 70 के दशक में सायरा बानो एक सफल अभिनेत्री के रूप में बॉलीवुड में जगह बना चुकी थीं. वर्ष 1968 की फिल्म 'पड़ोसन' ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया. इस फिल्म ने उनके करियर को जैसे पंख लगा दिए. इसके बाद शायरा ने दिलीप कुमार के साथ 'गोपी', 'सगीना', 'बैराग' जैसी हिट फिल्मों में काम किया. सायरा ने 11 अक्टूबर, 1966 को 22 साल की उम्र में अपने से दोगुने उम्र के दिलीप कुमार से शादी की थी. उस समय दिलीप कुमार 44 साल के थे. दोनों की मुलाकात, प्यार और फिर शादी की कहानी बिल्कुल फिल्मी हैं. बॉलीवुड के प्रेमी जोड़ों की जब भी बात की जाती है तो सायरा बानो और दिलीप कुमार का नाम जरूर आता है. शादी के बाद भी सायरा ने फिल्मों में काम जारी रखा. दिलीप साहब के अलावा वह दूसरे नायकों की भी नायिका बनती रहीं. दिलीप कुमार और सायरा इन दिनों बुढ़ापे की दहलीज पर हैं. दिलीप कुमार अल्जाइमर की बीमारी से पीड़ित हैं और सायरा उनकी एकमात्र सहारा हैं. हर कहीं दोनों एक साथ आते-जाते हैं और एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं. दोनों को कई पार्टियों और फिल्मी प्रीमियर के मौके पर साथ देखा जाता है. सायरा अपने खाली समय को समाज सेवा में लगाती हैं.टिप्पणियां सायरा ने 'जंगली' (1961), 'शादी' (1962),'ब्लफ मास्टर' (1963),'दूर की आवाज' (1964),'आई मिलन की बेला' (1964),'अप्रैल फूल' (1964),'ये जिंदगी कितनी हसीन है' (1966),'प्यार मोहब्बत '(1966),'शागिर्द' 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में काम किया. सायरा ने 11 अक्टूबर, 1966 को 22 साल की उम्र में अपने से दोगुने उम्र के दिलीप कुमार से शादी की थी. उस समय दिलीप कुमार 44 साल के थे. दोनों की मुलाकात, प्यार और फिर शादी की कहानी बिल्कुल फिल्मी हैं. बॉलीवुड के प्रेमी जोड़ों की जब भी बात की जाती है तो सायरा बानो और दिलीप कुमार का नाम जरूर आता है. शादी के बाद भी सायरा ने फिल्मों में काम जारी रखा. दिलीप साहब के अलावा वह दूसरे नायकों की भी नायिका बनती रहीं. दिलीप कुमार और सायरा इन दिनों बुढ़ापे की दहलीज पर हैं. दिलीप कुमार अल्जाइमर की बीमारी से पीड़ित हैं और सायरा उनकी एकमात्र सहारा हैं. हर कहीं दोनों एक साथ आते-जाते हैं और एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं. दोनों को कई पार्टियों और फिल्मी प्रीमियर के मौके पर साथ देखा जाता है. सायरा अपने खाली समय को समाज सेवा में लगाती हैं.टिप्पणियां सायरा ने 'जंगली' (1961), 'शादी' (1962),'ब्लफ मास्टर' (1963),'दूर की आवाज' (1964),'आई मिलन की बेला' (1964),'अप्रैल फूल' (1964),'ये जिंदगी कितनी हसीन है' (1966),'प्यार मोहब्बत '(1966),'शागिर्द' (1966),'दीवाना' (1967),'अमन' (1967),'पड़ोसन' (1968),'झुक गया 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है तो सायरा बानो और दिलीप कुमार का नाम जरूर आता है. शादी के बाद भी सायरा ने फिल्मों में काम जारी रखा. दिलीप साहब के अलावा वह दूसरे नायकों की भी नायिका बनती रहीं. दिलीप कुमार और सायरा इन दिनों बुढ़ापे की दहलीज पर हैं. दिलीप कुमार अल्जाइमर की बीमारी से पीड़ित हैं और सायरा उनकी एकमात्र सहारा हैं. हर कहीं दोनों एक साथ आते-जाते हैं और एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं. दोनों को कई पार्टियों और फिल्मी प्रीमियर के मौके पर साथ देखा जाता है. सायरा अपने खाली समय को समाज सेवा में लगाती हैं.टिप्पणियां सायरा ने 'जंगली' (1961), 'शादी' (1962),'ब्लफ मास्टर' (1963),'दूर की आवाज' (1964),'आई मिलन की बेला' (1964),'अप्रैल फूल' (1964),'ये जिंदगी कितनी हसीन है' (1966),'प्यार मोहब्बत '(1966),'शागिर्द' (1966),'दीवाना' (1967),'अमन' (1967),'पड़ोसन' (1968),'झुक गया आसमान' (1968),'आदमी और इंसान' (1969), 'पूरब और पश्चिम' (1970),'गोपी' (1970),'बलिदान' (1971),'विक्टोरिया नं. 203' (1972),'दामन और आग' (1973),'आरोप' (1973),'ज्वार भाटा' (1973),'पैसे की गुड़िया' (1974),'दुनिया' (1984), 'फैसला' (1988) जैसी फिल्मों में अभिनय किया.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) वर्ष 1968 की फिल्म 'पड़ोसन' ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया. इस फिल्म ने उनके करियर को जैसे पंख लगा दिए. इसके बाद शायरा ने दिलीप कुमार के साथ 'गोपी', 'सगीना', 'बैराग' जैसी हिट फिल्मों में काम किया. सायरा ने 11 अक्टूबर, 1966 को 22 साल की उम्र में अपने से दोगुने उम्र के दिलीप कुमार से शादी की थी. उस समय दिलीप कुमार 44 साल के थे. दोनों की मुलाकात, प्यार और फिर शादी की कहानी बिल्कुल फिल्मी हैं. बॉलीवुड के प्रेमी जोड़ों की जब भी बात की जाती है तो सायरा बानो और दिलीप कुमार का नाम जरूर आता है. शादी के बाद भी सायरा ने फिल्मों में काम जारी रखा. दिलीप साहब के अलावा वह दूसरे नायकों की भी नायिका बनती रहीं. दिलीप कुमार और सायरा इन दिनों बुढ़ापे की दहलीज पर हैं. दिलीप कुमार अल्जाइमर की बीमारी से पीड़ित हैं और सायरा उनकी एकमात्र सहारा हैं. हर कहीं दोनों एक साथ आते-जाते हैं और एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं. दोनों को कई पार्टियों और फिल्मी प्रीमियर के मौके पर साथ देखा जाता है. सायरा अपने खाली समय को समाज सेवा में लगाती हैं.टिप्पणियां सायरा ने 'जंगली' (1961), 'शादी' (1962),'ब्लफ मास्टर' (1963),'दूर की आवाज' (1964),'आई मिलन की बेला' (1964),'अप्रैल फूल' (1964),'ये जिंदगी कितनी हसीन है' (1966),'प्यार मोहब्बत '(1966),'शागिर्द' (1966),'दीवाना' (1967),'अमन' (1967),'पड़ोसन' (1968),'झुक गया आसमान' (1968),'आदमी और इंसान' (1969), 'पूरब और पश्चिम' (1970),'गोपी' (1970),'बलिदान' (1971),'विक्टोरिया नं. 203' (1972),'दामन और आग' (1973),'आरोप' (1973),'ज्वार भाटा' (1973),'पैसे की गुड़िया' (1974),'दुनिया' (1984), 'फैसला' (1988) जैसी फिल्मों में अभिनय किया.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) सायरा ने 11 अक्टूबर, 1966 को 22 साल की उम्र में अपने से दोगुने उम्र के दिलीप कुमार से शादी की थी. उस समय दिलीप कुमार 44 साल के थे. दोनों की मुलाकात, प्यार और फिर शादी की कहानी बिल्कुल फिल्मी हैं. बॉलीवुड के प्रेमी जोड़ों की जब भी बात की जाती है तो सायरा बानो और दिलीप कुमार का नाम जरूर आता है. शादी के बाद भी सायरा ने फिल्मों में काम जारी रखा. दिलीप साहब के अलावा वह दूसरे नायकों की भी नायिका बनती रहीं. दिलीप कुमार और सायरा इन दिनों बुढ़ापे की दहलीज पर हैं. दिलीप कुमार अल्जाइमर की बीमारी से पीड़ित हैं और सायरा उनकी एकमात्र सहारा हैं. हर कहीं दोनों एक साथ आते-जाते हैं और एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं. दोनों को कई पार्टियों और फिल्मी प्रीमियर के मौके पर साथ देखा जाता है. सायरा अपने खाली समय को समाज सेवा में लगाती हैं.टिप्पणियां सायरा ने 'जंगली' (1961), 'शादी' (1962),'ब्लफ मास्टर' (1963),'दूर की आवाज' (1964),'आई मिलन की बेला' (1964),'अप्रैल फूल' (1964),'ये जिंदगी कितनी हसीन है' (1966),'प्यार मोहब्बत '(1966),'शागिर्द' (1966),'दीवाना' (1967),'अमन' (1967),'पड़ोसन' (1968),'झुक गया आसमान' (1968),'आदमी और इंसान' (1969), 'पूरब और पश्चिम' (1970),'गोपी' (1970),'बलिदान' (1971),'विक्टोरिया नं. 203' (1972),'दामन और आग' (1973),'आरोप' (1973),'ज्वार भाटा' (1973),'पैसे की गुड़िया' (1974),'दुनिया' (1984), 'फैसला' (1988) जैसी फिल्मों में अभिनय किया.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) बॉलीवुड के प्रेमी जोड़ों की जब भी बात की जाती है तो सायरा बानो और दिलीप कुमार का नाम जरूर आता है. शादी के बाद भी सायरा ने फिल्मों में काम जारी रखा. दिलीप साहब के अलावा वह दूसरे नायकों की भी नायिका बनती रहीं. दिलीप कुमार और सायरा इन दिनों बुढ़ापे की दहलीज पर हैं. दिलीप कुमार अल्जाइमर की बीमारी से पीड़ित हैं और सायरा उनकी एकमात्र सहारा हैं. हर कहीं दोनों एक साथ आते-जाते हैं और एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं. दोनों को कई पार्टियों और फिल्मी प्रीमियर के मौके पर साथ देखा जाता है. सायरा अपने खाली समय को समाज सेवा में लगाती हैं.टिप्पणियां सायरा ने 'जंगली' (1961), 'शादी' (1962),'ब्लफ मास्टर' (1963),'दूर की आवाज' (1964),'आई मिलन की बेला' (1964),'अप्रैल फूल' (1964),'ये जिंदगी कितनी हसीन है' (1966),'प्यार मोहब्बत '(1966),'शागिर्द' (1966),'दीवाना' (1967),'अमन' (1967),'पड़ोसन' (1968),'झुक गया आसमान' (1968),'आदमी और इंसान' (1969), 'पूरब और पश्चिम' (1970),'गोपी' (1970),'बलिदान' (1971),'विक्टोरिया नं. 203' (1972),'दामन और आग' (1973),'आरोप' (1973),'ज्वार भाटा' (1973),'पैसे की गुड़िया' (1974),'दुनिया' (1984), 'फैसला' (1988) जैसी फिल्मों में अभिनय किया.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) दिलीप कुमार और सायरा इन दिनों बुढ़ापे की दहलीज पर हैं. दिलीप कुमार अल्जाइमर की बीमारी से पीड़ित हैं और सायरा उनकी एकमात्र सहारा हैं. हर कहीं दोनों एक साथ आते-जाते हैं और एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं. दोनों को कई पार्टियों और फिल्मी प्रीमियर के मौके पर साथ देखा जाता है. सायरा अपने खाली समय को समाज सेवा में लगाती हैं.टिप्पणियां सायरा ने 'जंगली' (1961), 'शादी' (1962),'ब्लफ मास्टर' (1963),'दूर की आवाज' (1964),'आई मिलन की बेला' (1964),'अप्रैल फूल' (1964),'ये जिंदगी कितनी हसीन है' (1966),'प्यार मोहब्बत '(1966),'शागिर्द' (1966),'दीवाना' (1967),'अमन' (1967),'पड़ोसन' (1968),'झुक गया आसमान' (1968),'आदमी और इंसान' (1969), 'पूरब और पश्चिम' (1970),'गोपी' (1970),'बलिदान' (1971),'विक्टोरिया नं. 203' (1972),'दामन और आग' (1973),'आरोप' (1973),'ज्वार भाटा' (1973),'पैसे की गुड़िया' (1974),'दुनिया' (1984), 'फैसला' (1988) जैसी फिल्मों में अभिनय किया.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) सायरा ने 'जंगली' (1961), 'शादी' (1962),'ब्लफ मास्टर' (1963),'दूर की आवाज' (1964),'आई मिलन की बेला' (1964),'अप्रैल फूल' (1964),'ये जिंदगी कितनी हसीन है' (1966),'प्यार मोहब्बत '(1966),'शागिर्द' (1966),'दीवाना' (1967),'अमन' (1967),'पड़ोसन' (1968),'झुक गया आसमान' (1968),'आदमी और इंसान' (1969), 'पूरब और पश्चिम' (1970),'गोपी' (1970),'बलिदान' (1971),'विक्टोरिया नं. 203' (1972),'दामन और आग' (1973),'आरोप' (1973),'ज्वार भाटा' (1973),'पैसे की गुड़िया' (1974),'दुनिया' (1984), 'फैसला' (1988) जैसी फिल्मों में अभिनय किया.(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
अमेरिका में मोटल चलाने वाले भारतीय दंपत्ति को मानव तस्करी के आरोप में सजा
पीड़ित श्रमिक मोटल में आए एक गेस्ट की मदद से वहां से निकल सका. इसके बाद उसे कानूनी मदद मिली.
स्विस बैंकों में जमा कुल धन का 0.07 प्रतिशत पैसा भारतीय नागरिकों का 
स्विस बैंकों में भारतीयों द्वारा रखे जाने वाले धन के मामले में भारत का स्थान एक पायदान नीचे फिसलकर 74वें स्थान पर आ गया है. जबकि ब्रिटेन अब भी शीर्ष स्थान पर बना हुआ है. स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक स्विस नेशनल बैंक द्वारा जारी आंकड़ों में यह बात सामने आयी है. दुनियाभर के लोगों ने जितना धन स्विटजरलैंड के बैंकों में जमा कराया है उसका मात्र 0.07 प्रतिशत धन ही भारतीयों का वहां जमा है. पिछले साल इस सूची में भारत का स्थान 73वां था जबकि उससे पिछले साल यह 88वें पर था. केंद्रीय बैंक के आंकड़ों का आकलन दिखाता है कि भारतीयों या भारतीय कंपनियों ने स्विस बैंकों में कम पैसा जमा कराया है. दुनियाभर के ग्राहकों द्वारा स्विस बैंकों में जमा कराए गए कुल धन का यह मात्र 0.07 प्रतिशत है.   ब्रिटेन इस सूची में शीर्ष पर है. 2018 के अंत तक ब्रिटेन के निवासियों या कंपनियों ने स्विस बैंकों में जमा कराए कुल विदेशियों के धन का करीब 26 प्रतिशत जमा किया है.    ब्रिटेन के बाद इस सूची में क्रमश: अमेरिका, वेस्ट इंडीज, फ्रांस और हांगकांग का स्थान है. शीर्ष पांच देशों द्वारा स्विस बैंक में जमा कराया गया धन कुल विदेशियों द्वारा जमा कराए गए धन के 50 प्रतिशत से अधिक है. जबकि शीर्ष-15 देशों की सूची में यह धन 75 प्रतिशत के आसपास पहुंच जाता है जबकि शीर्ष-30 की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत है. शीर्ष-10 की सूची में बहमास, जर्मनी, लक्जमबर्ग, केमैन आईलैंड और सिंगापुर शामिल है.
बैंकिंग क्षेत्र में प्रवेश पर विचार कर रहा रिलायंस : अम्बानी
रिलायंस धीरूभाई अम्बानी समूह के प्रमुख अनिल अम्बानी ने कहा है कि सहायक कम्पनी रिलायंस कैपिटल बोनस शेयर जारी करने और बैंकिंग क्षेत्र में प्रवेश करने पर विचार कर सकती है। साथ ही उन्होंने आशा जताई कि समूह जीवन बीमा शाखा में जापानी कम्पनी, निप्पन लाइफ इंस्योरेंस को 26 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को जल्द ही पूरा कर लेगा। अम्बानी ने रिलायंस कैपिटल की यहां आयोजित वार्षिक आम बैठक में कहा, "बैंकिंग नए विकास का एक अवसर है। हम इस उच्च वृद्धि वाले क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए अवसरों का मूल्यांकन करेंगे और इस लिहाज से नियामक घटनाक्रमों पर नजर रख रहे हैं।" उन्होंने कहा, "भारत में वित्तीय उत्पादों और सेवाओं की दूर-दूर तक सुलभता हमारे विकास के लिए लगातार अपार अवसर पैदा करता रहेगा। हम अपने सम्पत्ति प्रबंधन समूह का उभर रहे बाजारों में विस्तार करेंगे और अपने सम्पत्ति प्रबंधन और निजी इक्वि टी कारोबार को बढ़ाएंगे।" नई वित्तीय शाखा नाम रिलायंस बैंक होगा। बैठक के दौरान पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में अम्बानी ने यह भी कहा कि बोनस शेयर जारी करने के एक मुद्दे पर शेयरधारकों की ओर से आए अनुरोध को कम्पनी के निदेशक मंडल को भेजा जाएगा, जो इस पर विचार करेगा। अम्बानी ने कहा कि रिलायंस कैपिटल ने अपने पहले मूल्य आधारित लेन-देन में निप्पन लाइफ इंस्योरेंस को रिलायंस लाइफ इंस्योरेंस की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए इस वर्ष के प्रारम्भ में एक समझौता किया था। यह समझौता नियामक से मंजूरी मिलने के बाद लागू हो जाएगा। अम्बानी ने कहा कि इसके जरिए आने वाली 3,000 करोड़ रुपये की राशि कम्पनी की देनदारियों को नया स्वरूप देने में मददगार होगी। उन्होंने कहा कि कम्पनी ने रिलायंस कैपिटल द्वारा संचालित सभी वित्तीय कारोबार में रणनीतिक साझेदारी और सहयोगी अवसरों के लिए निप्पन के साथ इस महीने के प्रारम्भ में एक समझौता भी किया था। अम्बानी के अनुसार, रिलायंस कैपिटल इस समय देश की शीर्ष गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनी है, जिसकी शुद्ध कीमत लगभग 8,000 करोड़ रुपये है।
पंजाब-हरियाणा में बसे दक्षिण भारत के लोग भयभीत, केरल के सीएम ने पीएम मोदी को पत्र लिखा
मुख्यमंत्री ने यह इच्छा भी जताई है कि केंद्र हिंसा की घटनाओं के पीछे मौजूद लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे. (इनपुट एजेंसी से)
जल्दी कीजिए, एयर एशिया का 'न्यू ईयर सेल' ऑफर, ऑफर सीमित समय के लिए...
एयर एशिया इंडिया हवाई यात्रा के इच्छुक लोगों के लिए नए साल का तोहफा लेकर आई है. एयर एशिया ने 'न्यू ईयर सेल' ऑफर पेश किया है. इस ऑफर के तहत एयर एशिया 917 रुपए (सभी कर सहित) में हवाई यात्रा का टिकट दे रही है. यह फर 1 जनवरी 2017 तक के लिए खुला है. ये 1 मार्च 2017 से लेकर 31 अक्टूबर 2017 तक की यात्राओं पर लागू होगा.टिप्पणियां एयर एशिया इंडिया का 917 रुपए की टिकट का ऑफर बेंगलुरु-कोच्चि, बेंगलुरु-गोवा, बेंगलुरु-हैदराबाद रूट की हवाई यात्राओं पर लागू होगा. नई दिल्ली-गोवा, नई दिल्ली-बेंगलुरु रूट का किराया क्रमश: 2,917 रुपए और 2,217 रुपए है. एयर एशिया वर्तमान समय में 11 डेस्टिनेशन्स के लिए उड़ान भर रही है. इस ऑफर के तहत बेंगलुरु-गुवाहाटी यात्रा का किराया 2,217 से शुरू है जबकि बेंगलुरु-चंडीगढ़ का 2,917 रुपए, बेंगलुरु-जयपुर का किराया 2,917 रुपए, बेंगलुरु-विशाखापट्टनम का 1,417 रुपए होगा. बता दें कि एयर एशिया टाटा और मलेशिया की एयर एशिया बरहद का संयुक्त उपक्रम है. 917 रुपए के वाले ऑफर के तहत नंबर ऑफ सीट्स का खुलासा नहीं किया गया है.   एयर एशिया इंडिया का 917 रुपए की टिकट का ऑफर बेंगलुरु-कोच्चि, बेंगलुरु-गोवा, बेंगलुरु-हैदराबाद रूट की हवाई यात्राओं पर लागू होगा. नई दिल्ली-गोवा, नई दिल्ली-बेंगलुरु रूट का किराया क्रमश: 2,917 रुपए और 2,217 रुपए है. एयर एशिया वर्तमान समय में 11 डेस्टिनेशन्स के लिए उड़ान भर रही है. इस ऑफर के तहत बेंगलुरु-गुवाहाटी यात्रा का किराया 2,217 से शुरू है जबकि बेंगलुरु-चंडीगढ़ का 2,917 रुपए, बेंगलुरु-जयपुर का किराया 2,917 रुपए, बेंगलुरु-विशाखापट्टनम का 1,417 रुपए होगा. बता दें कि एयर एशिया टाटा और मलेशिया की एयर एशिया बरहद का संयुक्त उपक्रम है. 917 रुपए के वाले ऑफर के तहत नंबर ऑफ सीट्स का खुलासा नहीं किया गया है.   इस ऑफर के तहत बेंगलुरु-गुवाहाटी यात्रा का किराया 2,217 से शुरू है जबकि बेंगलुरु-चंडीगढ़ का 2,917 रुपए, बेंगलुरु-जयपुर का किराया 2,917 रुपए, बेंगलुरु-विशाखापट्टनम का 1,417 रुपए होगा. बता दें कि एयर एशिया टाटा और मलेशिया की एयर एशिया बरहद का संयुक्त उपक्रम है. 917 रुपए के वाले ऑफर के तहत नंबर ऑफ सीट्स का खुलासा नहीं किया गया है.
AAP नेता आशीष खेतान को मिला धमकी भरा पत्र, लिखा - हिंदू राष्ट्र में तुम्हारे जैसे...
आम आदमी पार्टी में जारी घमासान के बीच आप के नेता आशीष खेतान ने शनिवार को दावा किया कि उन्हें कट्टरपंथी हिंदू संगठनों द्वारा जान से मारने की कथित धमकी मिली है. खेतान ने धमकी की सूचना केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को देते हुए उनसे इस पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है. हालांकि गृह मंत्रालय की ओर से इस पर कोई प्रतिकिया देखने को नहीं मिली. खेतान ने सिंह को लिखे पत्र में कहा है कि उन्हें गत 9 मई को धमकी भरा पत्र मिला. इसमें कहा गया है कि हिंदू संतों के खिलाफ उनके पापों का घड़ा भर गया है.टिप्पणियां धमकी भरे पत्र में खेतान को ही साध्वी प्रज्ञा और वीरेन्द्र सिंह तावड़े जैसे संतों के आज जेल में होने के लिये जिम्मेदार ठहराया गया है. इसमें कहा गया है कि "तुम्हारे (खेतान) जैसे दुर्जन हिंदू राष्ट्र में सिर्फ मृत्युदंड के पात्र हैं, और यह कार्य ईश्वर की इच्छा से बहुत जल्द ही सम्पन्न होगा." इतना ही नहीं धमकी भरे पत्र में खेतान पर यह आरोप भी लगाया गया है कि "सीबीआई में बैठे नंद कुमार नायर जैसे दुर्जनों की मदद से इन संतों के साथ छल किया है." खेतान ने गृह मंत्री को लिखे पत्र में दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा तमाम पत्रकारों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी ऐसे ही धमकी भरे पत्र मिलने की बात कही है. इस बीच आप संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी खेतान को धमकी मिलने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुये गृह मंत्री से इस पर तत्काल प्रभाव से संज्ञान लेते हुये प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है. दिल्ली संवाद आयोग के उपाध्यक्ष खेतान को इससे पहले पिछले साल भी धमकी भरा पत्र मिला था. केजरीवाल ने ट्वीट किया कि आशीष खेतान को जान से मारने की धमकी मिली है. उम्मीद है कि राजनाथ सिंह इस पर कार्रवाई करेंगे. धमकी भरे पत्र में खेतान को ही साध्वी प्रज्ञा और वीरेन्द्र सिंह तावड़े जैसे संतों के आज जेल में होने के लिये जिम्मेदार ठहराया गया है. इसमें कहा गया है कि "तुम्हारे (खेतान) जैसे दुर्जन हिंदू राष्ट्र में सिर्फ मृत्युदंड के पात्र हैं, और यह कार्य ईश्वर की इच्छा से बहुत जल्द ही सम्पन्न होगा." इतना ही नहीं धमकी भरे पत्र में खेतान पर यह आरोप भी लगाया गया है कि "सीबीआई में बैठे नंद कुमार नायर जैसे दुर्जनों की मदद से इन संतों के साथ छल किया है." खेतान ने गृह मंत्री को लिखे पत्र में दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा तमाम पत्रकारों, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी ऐसे ही धमकी भरे पत्र मिलने की बात कही है. इस बीच आप संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी खेतान को धमकी मिलने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुये गृह मंत्री से इस पर तत्काल प्रभाव से संज्ञान लेते हुये प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है. दिल्ली संवाद आयोग के उपाध्यक्ष खेतान को इससे पहले पिछले साल भी धमकी भरा पत्र मिला था. केजरीवाल ने ट्वीट किया कि आशीष खेतान को जान से मारने की धमकी मिली है. उम्मीद है कि राजनाथ सिंह इस पर कार्रवाई करेंगे. इस बीच आप संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी खेतान को धमकी मिलने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुये गृह मंत्री से इस पर तत्काल प्रभाव से संज्ञान लेते हुये प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है. दिल्ली संवाद आयोग के उपाध्यक्ष खेतान को इससे पहले पिछले साल भी धमकी भरा पत्र मिला था. केजरीवाल ने ट्वीट किया कि आशीष खेतान को जान से मारने की धमकी मिली है. उम्मीद है कि राजनाथ सिंह इस पर कार्रवाई करेंगे.
भारतीय मूल के दंपत्ति के बीच तलाक का मामला, अंतरिक्ष की टिकट को लेकर विवाद
रोज़ाना अखबार और टीवी पर तलाक के अलग अलग मामले सामने आते हैं. लेकिन कभी कभी पति-पत्नी अलग होने के लिए दी जाने वाली दलीलों में कुछ ऐसी चीज़ों को बीच में लाते हैं जो थोड़ा हैरान कर जाती हैं. मसलन, ब्रिटेन का यह मामला जहां भारतीय मूल के एक दंपति के बीच 1,60,000 पाउंड के उस टिकट को लेकर टकराव बढ़ गया जो ब्रिटिश उद्यमी रिचर्ड ब्रैनसन की अंतरिक्ष उड़ान के लिए बुक कराया गया है. मीरा माणिक और उनके पति आशीष ठक्कर के बीच पहले से ही तलाक का मामला चल रहा है लेकिन अंतरिक्ष की इस टिकट को लेकर विवाद और बढ़ गया है. बताया जा रहा है कि मीरा माणिक अपने पति के खिलाफ ब्रिटिश हाई कोर्ट पहुंचने वाली हैं जहां वह आशीष के इस दावे को चुनौती देंगी जिसके मुताबिक उनके शौहर के पास सिर्फ 4,45,542 पाउंड की संपत्ति है. स्थानीय समाचार पत्र के अनुसार 33 साल की फूड राइटर और ब्लॉगर मीरा का कहना है कि आशीष अरबपति है और वह जो संपत्ति का ब्यौरा दे रहा है, वह दरअसल पूरा नहीं है.टिप्पणियां एक सूत्र के मुताबिक अदालत में ब्रैनसन की परियोजना, वर्जिन गैलेस्टिक की उड़ान के बारे में चर्चा की जाएगी. यह ऐसी संपत्ति है जो अब भी आशीष के पास है और उनकी पूरी संपत्ति की जांच में यह भी शामिल होगा. मीरा मांग करेंगी कि आशीष की संपत्ति का ब्यौरा तैयार करने में टिकट की कीमत को भी शामिल किया जाए जो कि 1 लाख 60 हज़ार पाउंड की है. बता दें कि आशीष ठक्कर उन शुरूआती लोगों में शामिल हैं जिन्होंने ब्रैनसन के इस परियोजना में टिकट बुक कराया था जो आपको अंतरिक्ष की सैर करवाएगी. इस टिकट का पूरा पैसा बुकिंग के वक्त ही देना पड़ता है लेकिन आप इसे फ्लाइट से पहले कभी भी रिफंड करवा सकते हैं. अब ब्रिटिश हाइकोर्ट इस मामले की सुनवाई सोमवार से शुरू करेगी जहां यह तय किया जाएगा कि ठक्कर की संपत्ति का कूल मूल्य कितना है और उसमें से कितना तलाक के बाद माणिक को मिलना चाहिए. ठक्कर दुबई के व्यापारी हैं और मारा ग्रुप के मालिक बताए जाते हैं. मीरा माणिक से उनकी शादी 2008 में हुई थी. यह दोनों 2013 से अलग अलग रह रहे हैं. जल्द ही ठक्कर से तलाक लेने वाली उनकी पत्नी माणिक का दावा है कि उनके पति विदेशों में कई कंपनियों में लाभभोक्ता है. लेकिन ठक्कर ने हाइकोर्ट में कहा है कि मारा ग्रुप की उत्तराधिकारी दरअसल उनकी मां और बहन है. बताया जा रहा है कि मीरा माणिक अपने पति के खिलाफ ब्रिटिश हाई कोर्ट पहुंचने वाली हैं जहां वह आशीष के इस दावे को चुनौती देंगी जिसके मुताबिक उनके शौहर के पास सिर्फ 4,45,542 पाउंड की संपत्ति है. स्थानीय समाचार पत्र के अनुसार 33 साल की फूड राइटर और ब्लॉगर मीरा का कहना है कि आशीष अरबपति है और वह जो संपत्ति का ब्यौरा दे रहा है, वह दरअसल पूरा नहीं है.टिप्पणियां एक सूत्र के मुताबिक अदालत में ब्रैनसन की परियोजना, वर्जिन गैलेस्टिक की उड़ान के बारे में चर्चा की जाएगी. यह ऐसी संपत्ति है जो अब भी आशीष के पास है और उनकी पूरी संपत्ति की जांच में यह भी शामिल होगा. मीरा मांग करेंगी कि आशीष की संपत्ति का ब्यौरा तैयार करने में टिकट की कीमत को भी शामिल किया जाए जो कि 1 लाख 60 हज़ार पाउंड की है. बता दें कि आशीष ठक्कर उन शुरूआती लोगों में शामिल हैं जिन्होंने ब्रैनसन के इस परियोजना में टिकट बुक कराया था जो आपको अंतरिक्ष की सैर करवाएगी. इस टिकट का पूरा पैसा बुकिंग के वक्त ही देना पड़ता है लेकिन आप इसे फ्लाइट से पहले कभी भी रिफंड करवा सकते हैं. अब ब्रिटिश हाइकोर्ट इस मामले की सुनवाई सोमवार से शुरू करेगी जहां यह तय किया जाएगा कि ठक्कर की संपत्ति का कूल मूल्य कितना है और उसमें से कितना तलाक के बाद माणिक को मिलना चाहिए. ठक्कर दुबई के व्यापारी हैं और मारा ग्रुप के मालिक बताए जाते हैं. मीरा माणिक से उनकी शादी 2008 में हुई थी. यह दोनों 2013 से अलग अलग रह रहे हैं. जल्द ही ठक्कर से तलाक लेने वाली उनकी पत्नी माणिक का दावा है कि उनके पति विदेशों में कई कंपनियों में लाभभोक्ता है. लेकिन ठक्कर ने हाइकोर्ट में कहा है कि मारा ग्रुप की उत्तराधिकारी दरअसल उनकी मां और बहन है. एक सूत्र के मुताबिक अदालत में ब्रैनसन की परियोजना, वर्जिन गैलेस्टिक की उड़ान के बारे में चर्चा की जाएगी. यह ऐसी संपत्ति है जो अब भी आशीष के पास है और उनकी पूरी संपत्ति की जांच में यह भी शामिल होगा. मीरा मांग करेंगी कि आशीष की संपत्ति का ब्यौरा तैयार करने में टिकट की कीमत को भी शामिल किया जाए जो कि 1 लाख 60 हज़ार पाउंड की है. बता दें कि आशीष ठक्कर उन शुरूआती लोगों में शामिल हैं जिन्होंने ब्रैनसन के इस परियोजना में टिकट बुक कराया था जो आपको अंतरिक्ष की सैर करवाएगी. इस टिकट का पूरा पैसा बुकिंग के वक्त ही देना पड़ता है लेकिन आप इसे फ्लाइट से पहले कभी भी रिफंड करवा सकते हैं. अब ब्रिटिश हाइकोर्ट इस मामले की सुनवाई सोमवार से शुरू करेगी जहां यह तय किया जाएगा कि ठक्कर की संपत्ति का कूल मूल्य कितना है और उसमें से कितना तलाक के बाद माणिक को मिलना चाहिए. ठक्कर दुबई के व्यापारी हैं और मारा ग्रुप के मालिक बताए जाते हैं. मीरा माणिक से उनकी शादी 2008 में हुई थी. यह दोनों 2013 से अलग अलग रह रहे हैं. जल्द ही ठक्कर से तलाक लेने वाली उनकी पत्नी माणिक का दावा है कि उनके पति विदेशों में कई कंपनियों में लाभभोक्ता है. लेकिन ठक्कर ने हाइकोर्ट में कहा है कि मारा ग्रुप की उत्तराधिकारी दरअसल उनकी मां और बहन है. अब ब्रिटिश हाइकोर्ट इस मामले की सुनवाई सोमवार से शुरू करेगी जहां यह तय किया जाएगा कि ठक्कर की संपत्ति का कूल मूल्य कितना है और उसमें से कितना तलाक के बाद माणिक को मिलना चाहिए. ठक्कर दुबई के व्यापारी हैं और मारा ग्रुप के मालिक बताए जाते हैं. मीरा माणिक से उनकी शादी 2008 में हुई थी. यह दोनों 2013 से अलग अलग रह रहे हैं. जल्द ही ठक्कर से तलाक लेने वाली उनकी पत्नी माणिक का दावा है कि उनके पति विदेशों में कई कंपनियों में लाभभोक्ता है. लेकिन ठक्कर ने हाइकोर्ट में कहा है कि मारा ग्रुप की उत्तराधिकारी दरअसल उनकी मां और बहन है.
बैडमिंटन: दोनों गेम में बढ़त बनाने के बावजूद हारे श्रीकांत, जर्मन ओपन में चुनौती समाप्‍त
देश के शीर्ष भारतीय शटलर के. श्रीकांत जर्मन ओपन ग्रांप्री बैडमिंटन चैंपियनशिप से बाहर हो गए हैं.  प्रतियोगिता के प्री क्वार्टरफाइनल में उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा. श्रीकांत ने चीन के ओलिंपिक चैम्पियन चेन लोंग के खिलाफ चुनौतीपूर्ण खेल दिखाया लेकिन उनकी हार के साथ ही भारत काप्रतियोगिता का अभियान खत्म हो गया. 12वें वरीयता के भारतीय खिलाड़ी को बीती रात यहां 47 मिनट तक चले पुरुष एकल के मैच में दो बार के वर्ल्‍ड चैम्पियन और आल इंग्लैंड चैम्पियन चेन लोंग से 19-21 20-22 से हार का मुंह देखना पड़ा. टखने की चोट से वापसी कर रहे श्रीकांत ने दूसरे वरीय खिलाड़ी के खिलाफ दोनों गेम में 12-6 और 16-12 की बढ़त बनाई  हुई थी लेकिन आखिर में वह दोनों गेम गंवा बैठे. दूसरे दौर के मुकाबलों में शुभांकर डे को हांगकांग के पांचवें वरीय एनजी का लोंग एंगस से 14-21 8-21 से जबकि हर्षित अग्रवाल को हांगकांग के आठवें वरीय हु युन से 15-21 11-21 से पराजय मिली. श्रीकांत ने इससे पहले प्रतियोगिता के दूसरे दौर में जापान के युसुके ओनोडेरा को हराया था.  श्रीकांत ने जापानी खिलाड़ी को महज 30 मिनट में युसुके को 21-17, 21-18 से मात दी थी.श्रीकांत ने पहले दौर में मंगलवार को स्लोवेनिया के एलेन रोज को 21 मिनट तक चले मुकाबले में 21-4, 21-11 से शिकस्‍त दी थी. 12वें वरीयता के भारतीय खिलाड़ी को बीती रात यहां 47 मिनट तक चले पुरुष एकल के मैच में दो बार के वर्ल्‍ड चैम्पियन और आल इंग्लैंड चैम्पियन चेन लोंग से 19-21 20-22 से हार का मुंह देखना पड़ा. टखने की चोट से वापसी कर रहे श्रीकांत ने दूसरे वरीय खिलाड़ी के खिलाफ दोनों गेम में 12-6 और 16-12 की बढ़त बनाई  हुई थी लेकिन आखिर में वह दोनों गेम गंवा बैठे. दूसरे दौर के मुकाबलों में शुभांकर डे को हांगकांग के पांचवें वरीय एनजी का लोंग एंगस से 14-21 8-21 से जबकि हर्षित अग्रवाल को हांगकांग के आठवें वरीय हु युन से 15-21 11-21 से पराजय मिली. श्रीकांत ने इससे पहले प्रतियोगिता के दूसरे दौर में जापान के युसुके ओनोडेरा को हराया था.  श्रीकांत ने जापानी खिलाड़ी को महज 30 मिनट में युसुके को 21-17, 21-18 से मात दी थी.श्रीकांत ने पहले दौर में मंगलवार को स्लोवेनिया के एलेन रोज को 21 मिनट तक चले मुकाबले में 21-4, 21-11 से शिकस्‍त दी थी.
Simmba Box Office Collection Day 4: रणवीर सिंह को मिला New Year का गिफ्ट, 'सिंबा' की कमाई 100 करोड़ के पार...
Simmba Box Office Collection Day 4: रणवीर सिंह (Ranveer Singh) की 'सिंबा' (Simmba) ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है. सोमवार को रणवीर सिंह (Ranveer Singh) और सारा अली खान (Sara Ali Khan) की फिल्म 'सिंबा' (Simmba) ने करीब 22 करोड़ की कमाई कर डाली है. इस खबर की जानकारी फिल्म ट्रेड एक्सपर्ट रमेश बाला ने दी. रणवीर सिंह (Ranveer Singh) की 'सिंबा' (Simmba) की बॉकिस ऑफिस पर कमाई 100 करोड़ के पार पहुंच गई है. बॉक्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, रणवीर सिंह (Ranveer Singh) और सारा आली खान (Sara Ali Khan) की फिल्म ने करीब 115 करोड़ की कमाई कर ली है. फिल्म 'सिंबा' को सुपरहिट का दर्जा भी मिल गया है. नए साल के मौके पर पूरी उम्मीद है कि यह फिल्म और धमाल मचाएगी. 'सिंबा' में पुलिस ऑफिसर बने रणवीर सिंह का अंदाज लोगों को खूब भा रहा है. फिल्म सिंबा ने रविवार को भी जमकर कमाई की थी. इस फिल्म ने रविवार को 31 करोड़ की कमाई की थी.    #Simbba 's Monday, Dec 31st Early Estimates for All-India Nett is around a huge ₹ 22 Crs.. Crossing ₹ 100 Crs this morning..   रणवीर सिंह (Ranveer Singh) की फिल्म 'सिंबा' (Simmba) ने चार दिन में ही 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है. इससे पता चलता है कि लोग इस फिल्म को कितना पसंद कर रहे हैं.  रणवीर सिंह (Ranveer Singh) ने इस फिल्म के जरिए उन्होंने अपने ऊपर सक्सेसफुल एक्टर का ठप्पा भी लगवा लिया. रणवीर सिंह की यह साल की दूसरी फिल्म है, जो सुपरहिट साबित हुई दिख रही है. पहले दिन फिल्म ने 20.72 करोड़ रुपए कमाकर अपनी ही फिल्म का रिकॉर्ड तोड़ दिया था. इससे पहले रणवीर सिंह की फिल्म 'पद्मावत' से 19 करोड़ रुपए का फर्स्ट डे कलेक्शन किया था. फिल्म 'सिंबा' में सारा अली खान (Sara Ali Khan) ने अपने अभिनय से सबका दिल जीत लिया है.   रणवीर सिंह (Ranveer Singh) की 'सिंबा' (Simmba) रोहित शेट्टी (Rohit Shetty) द्वारा निर्मित है. इस फिल्म में रणवीर सिंह के अलावा अजय देवगन (Ajay Devgan) का भी कैमियो रोल है, जिसमें वह 'सिंघम' का किरदार निभाते हुए नजर आए. फिल्म में सरप्राइज एलिमेंट होने की वजह से दर्शकों को क्लाइमेक्स ज्यादा पसंद भी आई.  फिल्म 'सिंबा' का बजट करीब 80 करोड़ रु. बताया जा रहा है. कुल मिलाकर इ फिल्म ने धमाल मचा दिया है.
यासीन मलिक गिरफ्तार, जेकेएलएफ का जुलूस रुका
पुलिस ने सोमवार को अलगाववादी संगठन जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के जुलूस को रोक दिया, और संगठन के अध्यक्ष यासीन मलिक सहित उनके कई समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया। मलिक को श्रीनगर के मैसुमा इलाके से गिरफ्तार किया गया, जहां से वह जुलूस शुरू करने वाले थे और लाल चौक पर पहुंचकर 'कश्मीर छोड़ो' आंदोलन की शुरुआत की घोषणा करने वाले थे। पुलिस मलिक और उनके समर्थकों को गिरफ्तार कर कोठी बाग पुलिस थाने ले गई। मलिक गिरफ्तारी से बचने के लिए कुछ दिनों पहले ही भूमिगत हो गए थे। प्रशासन ने जेकेएलएफ के जुलूस को नाकाम करने के उद्देश्य से लाल चौक और आस पास के इलाकों में निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा, पेट्रोल पंप पर मिलावट रोकने के लिए क्या उपाय किए
पेट्रोल व डीजल में केरोसिन की मिलावट के मामले में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के तेवर सख्त रहे. चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि ये कोई सुखद हालात नहीं. राजनेताओं और कॉर्पोरेट लोगों के ही पंप हैं जो नहीं चाहते कि नियम कानून में बदलाव हो. दूरदराज के हालात और भी खराब हैं. उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सीकरी से बसपा की सांसद सीमा उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह तल्ख टिप्पणी की.  टिप्पणियां याचिका में आरोप लगाया है कि हाथरस के पास सादाबाद से विधायक देवेंद्र अग्रवाल पेट्रोल और डीजल में केरोसिन में मिलाते हैं और फिर अपने पंपों से बेचते हैं. इसी तरह करोड़ों रुपये की संपत्ति कमा ली है. कोर्ट ने हाथरस के पास सादाबाद से SP के विधायक देवेंद्र अग्रवाल के खिलाफ जांच के आदेश दिए. इतना ही नहीं पेट्रोलियम मंत्रालय को चार हफ्ते में जांच रिपोर्ट देने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि पेट्रोलियम मंत्रालय 6 हफ्ते में ये बताए कि पेट्रोल पंप पर मिलावट को रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं. इसके अलावा क्या ये संभव है कि पंपों पर कोई ऐसा उपकरण लगाया जा सकता है जिससे अगर मिलावट की गई हो तो पेट्रोल या डीजल बाहर ही न आए. याचिका में आरोप लगाया है कि हाथरस के पास सादाबाद से विधायक देवेंद्र अग्रवाल पेट्रोल और डीजल में केरोसिन में मिलाते हैं और फिर अपने पंपों से बेचते हैं. इसी तरह करोड़ों रुपये की संपत्ति कमा ली है. कोर्ट ने हाथरस के पास सादाबाद से SP के विधायक देवेंद्र अग्रवाल के खिलाफ जांच के आदेश दिए. इतना ही नहीं पेट्रोलियम मंत्रालय को चार हफ्ते में जांच रिपोर्ट देने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि पेट्रोलियम मंत्रालय 6 हफ्ते में ये बताए कि पेट्रोल पंप पर मिलावट को रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं. इसके अलावा क्या ये संभव है कि पंपों पर कोई ऐसा उपकरण लगाया जा सकता है जिससे अगर मिलावट की गई हो तो पेट्रोल या डीजल बाहर ही न आए. कोर्ट ने हाथरस के पास सादाबाद से SP के विधायक देवेंद्र अग्रवाल के खिलाफ जांच के आदेश दिए. इतना ही नहीं पेट्रोलियम मंत्रालय को चार हफ्ते में जांच रिपोर्ट देने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि पेट्रोलियम मंत्रालय 6 हफ्ते में ये बताए कि पेट्रोल पंप पर मिलावट को रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं. इसके अलावा क्या ये संभव है कि पंपों पर कोई ऐसा उपकरण लगाया जा सकता है जिससे अगर मिलावट की गई हो तो पेट्रोल या डीजल बाहर ही न आए.
सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म आर्टिकल 15 पर रोक लगाने से किया इंकार
आयुष्मान खुराना की फिल्म 'आर्टिकल 15'  को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने 'ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया संस्था' की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें इस फिल्म पर रोक लगाने की मांग की गई थी.  सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता संस्था को कहा कि वह संबंधित फ़ोरम में अर्जी दाखिल करे. हालांकि फिल्म 28 जून को ही रिलीज हो चुकी है. ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया संस्था की ओर से नेमिनाथ चतुर्वेदी ने याचिका दाखिल कर फिल्म का विरोध करते हुए कहा है कि फिल्म के जाति आधारित संवाद समाज में नफरत फैला सकते हैं. सच्ची आपराधिक घटना की पृष्ठभूमि बताते हुए फिल्म में झूठी, गलत और तोड़-मरोड़ कर कहानी पेश की गई है जिसके जाति आधारित संवाद आपत्तिजनक, अफवाह फैलाने वाले और समाज में नफरत पैदा करने वाले हैं.  याचिका में फिल्म के शीर्षक 'आर्टिकल 15' पर आपत्ति उठाते हुए कहा गया है कि इससे संविधान के आर्टिकल 15 के प्रति लोगों में गलत अवधारणा बनेगी. भारत सरकार की इजाजत के बगैर फिल्म का नाम 'आर्टिकल 15' नहीं रखा जा सकता.  याचिका में मांग की गई है कि फिल्म प्रमाणन बोर्ड को निर्देश दिया जाए कि वह फिल्म के प्रदर्शन का जारी प्रमाणपत्र निरस्त करे.
बच्चे को बचाने के लिए गोरिल्ला को मारा, चिड़ियाघर ने अपनी कार्रवाई का किया बचाव
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
UP Police Result 2013: यूपी पुलिस में 3,295 पदों पर हुई परीक्षा का रिजल्ट जारी, ये है डायरेक्ट लिंक
यूपी पुलिस ने कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा का रिजल्ट (UP Police Constable Result) जारी कर दिया है. सिपाही एवं समक्षक पदों पर सीधी भर्ती 2013 के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए रिक्त 3295 पदों पर हुई भर्ती परीक्षा का रिजल्ट (Upprpb Up Police Result) जारी किया गया है. उम्मीदवारों का रिजल्ट उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (Upprpb) की ऑफिशियल वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जारी किया गया है. उम्मीदवार अपना रिजल्ट (UP Police Result 2013) इस वेबसाइट पर जाकर ही चेक कर सकते हैं. चयनित हुए उम्मीदवारों की लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड की गई है. लिस्ट में रोल नंबर और नाम दिए गए हैं. उम्मीदवार  नीचे दिए गए डायरेक्ट लिंक्स की मदद से अपना रिजल्ट आसानी से चेक कर सकते हैं. List01 2013 CP MALES ROLL WISEList01a  2013 CP FEMALES ROLL WISEList01b 2013 CP DFF ROLL WISEList02 2013 PAC MALES ROLL WISEList03 2013 FIREMEN MALES ROLL WISE बोर्ड ने कट-ऑफ भी जारी की है. इसमें अनारक्षित श्रेणी के लिए कट आफ मार्क्स 313.616, अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी के लिए 307.233, अनुसूचित जाति के लिए 283.4033 और अनुसूचित जनजाति के लिए 247.2333 है.
Honour Killing के खिलाफ राजस्थान पुलिस, बोली- 'मुगल-ए-आजम का जमाना गया, खुलकर प्यार करिए...'
''मुगले आजम का जमाना गया ... जब प्यार किया तो डरना क्या.'' यह किसी फिल्म का डायलॉग नहीं बल्कि राजस्थान पुलिस की सलाह है जो वह सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को दे रही है. दरअसल यह ‘ऑनर किलिंग' (झूठी शान के नाम पर हत्या) के खिलाफ हाल ही में पारित एक विधेयक के प्रति लोगों को जागरुक बनाने की उसकी पहल का हिस्सा है और लोगों ने इसे काफी पसंद किया है. राजस्थान विधानसभा ने ‘ऑनर किलिंग' के खिलाफ एक विधेयक ''राजस्थान सम्मान और परम्परा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक संशोधित 2019'' पांच अगस्त को पारित किया. इस विधेयक में दोषी को अधिकतम आजीवन कारावास एवं पांच लाख रूपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. इस तरह की पहल करने वाला राजस्थान अपनी तरह का पहला राज्य है. पुलिस ने इसके बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए अनूठा तरीका निकाला। उसने प्रसिद्ध फिल्म मुगले आजम के की एक फोटो लेते हुए एक ट्वीट किया जिसमें लिखा गया,''सावधान, मुगले आजम का जमाना गया.'' इसमें आगे लिखा गया है,''अगर प्यार करने वालों को कोई शारीरिक नुकसान पहुंचाता है ते उसे आजीवन कारावास की सजा हो सकती है, पांच लाख रुपये तक का जुर्माना भी लग सकता है.'' इसके नीचे दिल की इमोजी के साथ लिखा गया है,'' क्योंकि प्यार करना कोई गुनाह नहीं.'' फोटो में कैप्शन के साथ लिखा गया है,'' क्योंकि प्यार किया तो डरना क्या क्योंकि अब राजस्थान सरकार का कानून है आनर किलिंग के खिलाफ.'' पुलिस के सोशल मीडिया प्रभारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बीएल सोनी ने इस ट्वीट को अनूठा आइडिया बताया। उन्होंने कहा कि लोगों को नये कानून के प्रति जागरुक बनाने के लिए यह ट्वीट बनाया गया जिसे लोगों ने काफी पसंद किया है. पुलिस की सोशल मीडिया टीम पहले भी इस तरह के कई ‘अनूठे ट्वीट' कर चुकी है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट किया था कि राजस्थान आज देश का पहला राज्य बन गया है जिसने आनर किलिंग को संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध बनाने का बिल पारित किया है. इस विधेयक के अनुसार जो कोई भी किसी युगल या उनमें से किसी भी हत्या इस आधार पर करता है कि ऐसे युगल के विवाह से जाति, समुदाय, या कुटुंब का अनादर हुआ है या बदनामी हुई है तो उसे आजीवन कारावास और जुर्माने से, जो पांच लाख रूपये तक का हो सकेगा, दंडित किया जायेगा.
एक महीने बाद बनने वाली थी दुल्हन, पार्टी के बाद हुआ ऐसा कि सभी रह गए SHOCKED
हादसे से एक दिन पहले मीना ने इंस्टाग्राम पर एक फोटो पोस्ट की थी. हादसे के कुछ ही घंटे बाद उनकी इस तस्वीर पर 7 हजार कमेंट आ चुके हैं.  बात दें, जिस विमान से हादसा हुआ वो मीना के पिता का ही था.
इस तारीख को रिलीज होगी Padmavat, लेगी अक्षय कुमार की फिल्म PadMan से पंगा
#Padmavat to release on 25 Jan 2018... #RepublicDayWeekend A post shared by Akshay Kumar (@akshaykumar) on Dec 21, 2017 at 9:12pm PST
अमेठी में ग्राम पंचायत चुनाव एक जुलाई को
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में ग्राम पंचायत चुनाव एक जुलाई को होंगे. अमेठी के जिला मजिस्ट्रेट योगेश कुमार ने बताया कि इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है. कुमार ने ग्राम पंचायत स्तर के चुनाव कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि नौ प्रखंडों से 24 ग्राम पंचायत सदस्यों का चुनाव एक जुलाई को होगा. नामांकन प्रक्रिया 20 जून से शुरू होगी और नामांकन 24 जून को वापस जिए जा सकते हैं.  (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लिखा अंग्रेजी का ऐसा शब्द, समझने के लिए डिक्शनरी खोलकर बैठ गए लोग
My new book, THE PARADOXICAL PRIME MINISTER, is more than just a 400-page exercise in floccinaucinihilipilification. Pre-order it to find out why!https://t.co/yHuCh2GZDM I hope it comes with a free dictionary!!!.. Please make sure u attached a copy of Oxford Dictionary
राहुल गांधी आज से दो दिन के कर्नाटक दौरे पर, किसानों से बांटेंगे दर्द
कांग्रेस कार्यालय के अनुसार, राहुल गांधी को हेलीकॉप्टर से वहां आना था और 9 किलोमीटर की पदयात्रा पर जाना था। बताया जा रहा है कि 9 किलोमीटर के इस मार्ग को पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है ताकि उनके नेता को किसी प्रकार की समस्या न हो। लोगों का कहना है कि राहुल गांधी की इस रैली के लिए मैदान पर उन गड्ढ़ों को भी पाट दिया गया है जहां राहुल गांधी की रैली होनी है और जहां से उन्हें गुजरना है। बता दें कि राज्य में कांग्रेस पार्टी की सरकार है। लोगों का कहना है कि राहुल गांधी की इस रैली के लिए मैदान पर उन गड्ढ़ों को भी पाट दिया गया है जहां राहुल गांधी की रैली होनी है और जहां से उन्हें गुजरना है। बता दें कि राज्य में कांग्रेस पार्टी की सरकार है।
Danish Zehen ने 21 साल की उम्र में छुआ बुलंदियों को, मशहूर यूट्यूबर के 5 शानदार Video
MTV के रियलिटी शो ‘Ace of Space' के कंटेस्टेंट और मशहूर यूट्यूबर और दानिश जेहन (Danish Zehen) के अचानक निधन की खबर ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया. दानिश जेहन (Danish Zehen) के निधन पर उनके फैंस को अभी भी भरोसा नहीं हो रहा है. दानिश जेहन (Danish Zehen) का बीते गुरुवार को एक कार हादसे में निधन हो गया. बता दें कि दानिश जेहन एक शादी से लौट रहे थे, तभी वाशी में उनका कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई और इस हादसे में दानिश का निधन हो गया. 21 साल के दानिश जेहन (Danish Zehen) मस्तमौला इंसान थे, जिसकी झलक उनके वीडियो में साफतौर पर दिखाई देती है. दानिश अपने हेयर स्टाइल और बिंदास अंदाज के लिए जाने जाते थे. दानिश जेहन (Danish Zehen) के वीडियो हमेशा ही धमाल मचाते थे. दानिश जेहन सोशल मीडिया पर जाना पहचाना नाम था और उनकी फैन फॉलोविंग भी काफी थी. दानिश जेहन (Danish Zehen) की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनकी आखिरी यात्रा में फैन्स की जबरदस्त भीड़ जुटी थी. दानिश जेहन (Danish Zehen) की मौत की खबर से उनके दोस्तों और फैंस को काफी बड़ा झटका लगा है. उनके निधन के बाद भी इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स की संख्या बढ़ती ही जा रही थी. अब खबर है कि उनके इंस्टाग्राम अकाउंट को डिलीट कर दिया गया है. बता दें कि दानिश जेहन ने (Danish Zehen) एक्सिडेंट से कुछ घंटे पहले ही अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया था. सोशल मीडिया पर अपने वीडियो और तस्वीरों से धमाल मचा देने वाले दानिश जेहन (Danish Zehen) ने बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान (Sara Ali Khan) का दिल भी जीत लिया था.    Danish Zehen ने सारा अली खान को यूं किया था इम्प्रेस, Video हो रहा वायरल दानिश जेहन (Danish Zehen) और सारा अली खान (Sara Ali Khan) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में सारा अली खान एक सोफे पर बैठी हैं और दानिश जेहन अपना स्वैग दिखा रहे हैं. दानिश जेहन अपने स्वैग से सारा अली खान को इम्प्रेस करते हैं और सारा अली खान उनके स्टाइल से हैरान रह जाते हैं. लेकिन दानिश का इस तरह चले जाने ने उनके फैन्स को जबरदस्त झटका पहुंचाया है. हम आपको दानिश जेहन (Danish Zehen) के कुछ चर्चित वीडियो दिखाते हैं, जिसमें उन्होंने सभी दिल का जीत लिया था. बता दें कि दानिश जेहन (Danish Zehen) के निधन की खबर 'Ace of Space' के होस्ट विकास गुप्ता (Vikas Gupta) ने दी थी.   ...और भी हैं बॉलीवुड से जुड़ी ढेरों ख़बरें...
स्नैपडील-फ्लिपकार्ट सौदे से कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, 193 करोड़ रुपये का होगा फायदा
किसी कंपनी की बिक्री उसके कर्मचारियों को लिए फायदे का सौदा नहीं होती. लेकिन स्नैपडील के मामले में ऐसा नहीं है. यदि घरेलू ई-कामर्स कंपनी स्नैपडील की उसकी बड़ी प्रतिद्वंद्वी फ्लिपकार्ट के साथ बिक्री का सौदा पूरा हो जाता है तो वह अपने कर्मचारियों को 193 करोड़ रुपये की पेशकश करेगी. सूत्रों ने कहा कि यदि यह सौदा अंजाम तक पहुंचता है तो कंपनी के संस्थापक खुद को मिलने वाली राशि में से आधी यानी तीन करोड़ डॉलर प्रस्तावित योजना के लिए देंगे, जिसके दायरे में स्नैपडील के सभी मौजूदा कर्मचारी आएंगे. स्नैपडील के कर्मचारियों की संख्या 1,500 से 2,000 है. कंपनी के संस्थापकों ने बोर्ड से कहा है कि वे उनको मिलने वाले निपटान भुगतान का आधा यानी 192 करोड़ रुपये स्नैपडील की टीम को दें. वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी भी तरीके से उनकी टीम अलगथलग न पड़े. पिछले 12 माह के दौरान कंपनी छोड़ने वाले कुछ पूर्व वरिष्ठ कार्यकारियों को भी इस प्रक्रिया से लाभ मिलेगा. इस बारे में स्नैपडील को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला. इसके पीछे मंशा इसॉप के लिए भी मुआवजा देना है जो वरिष्ठ कार्यकारियों को जारी किया गया है. एक सूत्र ने कहा कि उनके शेयर और विकल्प का मूल्य नीचे आया है और एक बार करार पर दस्तखत के बाद इसका कोई मूल्य नहीं रह जाएगा. दिलचस्प तथ्य यह है कि सौदे से संबंधित भुगतान का लाभ उन कर्मचारियांे को भी मिलेगा, जिनके पास इसॉप नहीं है. यह उन कर्मचारियांे के लिए फ्लिपकार्ट के साथ प्रस्तावित सौदा पूरा होने तक रके रहने का पुरस्कार होगा. यदि यह सौदा पूरा हो जाता है तो स्नैपडील के संस्थापकांे को कुल मिलाकर 6 करोड़ डॉलर मिलेंगे, जिसमें से आधी राशि कर्मचारियों को दी जाएगी. जापानी समूह और स्नैपडील की सबसे बड़ी निवेशक सॉफ्टबैंक ने इस संकटग्रस्त ऑनलाइन मार्केटप्लेस को उसकी बड़ी प्रतिद्वंद्वी फ्लिपार्ट को बेचने की प्रक्रिया शुरू की है. टिप्पणियां  (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) कंपनी के संस्थापकों ने बोर्ड से कहा है कि वे उनको मिलने वाले निपटान भुगतान का आधा यानी 192 करोड़ रुपये स्नैपडील की टीम को दें. वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी भी तरीके से उनकी टीम अलगथलग न पड़े. पिछले 12 माह के दौरान कंपनी छोड़ने वाले कुछ पूर्व वरिष्ठ कार्यकारियों को भी इस प्रक्रिया से लाभ मिलेगा. इस बारे में स्नैपडील को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला. इसके पीछे मंशा इसॉप के लिए भी मुआवजा देना है जो वरिष्ठ कार्यकारियों को जारी किया गया है. एक सूत्र ने कहा कि उनके शेयर और विकल्प का मूल्य नीचे आया है और एक बार करार पर दस्तखत के बाद इसका कोई मूल्य नहीं रह जाएगा. दिलचस्प तथ्य यह है कि सौदे से संबंधित भुगतान का लाभ उन कर्मचारियांे को भी मिलेगा, जिनके पास इसॉप नहीं है. यह उन कर्मचारियांे के लिए फ्लिपकार्ट के साथ प्रस्तावित सौदा पूरा होने तक रके रहने का पुरस्कार होगा. यदि यह सौदा पूरा हो जाता है तो स्नैपडील के संस्थापकांे को कुल मिलाकर 6 करोड़ डॉलर मिलेंगे, जिसमें से आधी राशि कर्मचारियों को दी जाएगी. जापानी समूह और स्नैपडील की सबसे बड़ी निवेशक सॉफ्टबैंक ने इस संकटग्रस्त ऑनलाइन मार्केटप्लेस को उसकी बड़ी प्रतिद्वंद्वी फ्लिपार्ट को बेचने की प्रक्रिया शुरू की है. टिप्पणियां  (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) एक सूत्र ने कहा कि उनके शेयर और विकल्प का मूल्य नीचे आया है और एक बार करार पर दस्तखत के बाद इसका कोई मूल्य नहीं रह जाएगा. दिलचस्प तथ्य यह है कि सौदे से संबंधित भुगतान का लाभ उन कर्मचारियांे को भी मिलेगा, जिनके पास इसॉप नहीं है. यह उन कर्मचारियांे के लिए फ्लिपकार्ट के साथ प्रस्तावित सौदा पूरा होने तक रके रहने का पुरस्कार होगा. यदि यह सौदा पूरा हो जाता है तो स्नैपडील के संस्थापकांे को कुल मिलाकर 6 करोड़ डॉलर मिलेंगे, जिसमें से आधी राशि कर्मचारियों को दी जाएगी. जापानी समूह और स्नैपडील की सबसे बड़ी निवेशक सॉफ्टबैंक ने इस संकटग्रस्त ऑनलाइन मार्केटप्लेस को उसकी बड़ी प्रतिद्वंद्वी फ्लिपार्ट को बेचने की प्रक्रिया शुरू की है. टिप्पणियां  (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)  (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।) (हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
सिंडिकेट बैंक घूसकांड : सीबीआई ने भूषण स्टील के उपाध्यक्ष को गिरफ्तार किया
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सिंडिकेट बैंक के सीएमडी एसके जैन से जुड़े 50 लाख रुपये के घूसकांड के संबंध में आज भूषण स्टील लिमिटेड के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नीरज सिंघल को गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि कथित रूप से गिरफ्तारी से बच रहे सिंघल को यहां पकड़ा गया। एजेंसी द्वारा छापेमारी करने के बाद से वह अपने घर से कथित रूप से गायब हो गया था और शनिवार को पूछताछ के लिए एजेंसी के अधिकारियों के सामने पेश नहीं हुआ। सिंघल ने अग्रिम जमानत याचिका दायर किया थी, लेकिन स्वर्णकांता शर्मा की विशेष सीबीआई अदालत से इसे खारिज कर दिया। शर्मा ने सिंघल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मामले का कथित अपराध गंभीर प्रकृति का है, क्योंकि इसमें सार्वजनिक कोष की बड़ी राशि जुड़ी है। सीबीआई ने बैंकिंग नियमों का उल्लंघन करके कुछ कंपनियों की क्रेडिट सीमा बढ़ाने के लिए 50 लाख रुपये की रिश्वत कथित रूप से लेने के लिए दो अगस्त को सिंडिकेट बैंक के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक एसके जैन सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गौरतलब है कि सीबीआई ने 50 लाख रुपये की रिश्वत और आधिकारिक पद का दुरूपयोग करने के आरोप में जैन के खिलाफ दो मामले दर्ज किए थे।
बीजेपी के निलंबित सांसद कीर्ति आजाद ने अपने जवाब में शामिल किए चार वीडियो
बीजेपी के निलंबित सांसद कीर्ति आजाद ने पार्टी को दिए अपने 'लंबे' जवाब में चार वीडियो रिकार्डिंग्‍स को भी शामिल किया है। गौरतलब है कि बीजेपी ने कीर्ति आजाद को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण उन्‍हें क्‍यों न पार्टी से निकाल दिया जाए। पूर्व क्रिकेटर और बिहार से सांसद कीर्ति पर यह आरोप केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने के फलस्‍वरूप लगाए गए हैं। कीर्ति ने बतौर दिल्‍ली जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) अध्‍यक्ष जेटली के 13 वर्ष के कार्यकाल में कथित वित्‍तीय और अन्‍य गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। जेटली वर्ष 1999 से 2013 तक डीडीसीए के अध्‍यक्ष रहे। हालांकि पार्टी का कहना है कि इस दौरान वे गैर कार्यकारी अध्‍यक्ष थे और संगठन की दिन-प्रतिदिन की गतिवधियों में शामिल नहीं थे।टिप्पणियां आजाद के करीबी एक सूत्र के अनुसार, 53 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर ने अपने जवाब में दावा किया है कि उन्‍होंने पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह के साथ मुलाकात में जेटली के साथ एक बैठक का अनुरोध किया था ताकि डीडीसीए के मसले पर चर्चा की जा सके। लेकिन इस बारे में कुछ प्रगति नहीं हुई तो उन्‍हें लगा कि डीडीसीए में भ्रष्‍टाचार के मसले से बीजेपी का कोई लेना-देना नहीं है। इसके साथ ही आजाद ने बीजेपी से उन अखबारों और मीडिया रिपोर्टस को उपलब्‍ध कराने की मांग की है जिससे यह साबित हो कि उन्‍होंने बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व पर निशाना साधा था। आजाद की ओर से पार्टी को जो चार वीडियो रिकॉर्डिंग सौंपी गई है उनमें उनकी 20 दिसंबर की प्रेस कान्‍फ्रेंस का वीडियो भी शामिल है। इस वीडियो ने उन्‍होंने सार्वजनिक तौर पर पहली बार डीडीसीए में भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाए थे।   पूर्व क्रिकेटर और बिहार से सांसद कीर्ति पर यह आरोप केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने के फलस्‍वरूप लगाए गए हैं। कीर्ति ने बतौर दिल्‍ली जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) अध्‍यक्ष जेटली के 13 वर्ष के कार्यकाल में कथित वित्‍तीय और अन्‍य गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। जेटली वर्ष 1999 से 2013 तक डीडीसीए के अध्‍यक्ष रहे। हालांकि पार्टी का कहना है कि इस दौरान वे गैर कार्यकारी अध्‍यक्ष थे और संगठन की दिन-प्रतिदिन की गतिवधियों में शामिल नहीं थे।टिप्पणियां आजाद के करीबी एक सूत्र के अनुसार, 53 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर ने अपने जवाब में दावा किया है कि उन्‍होंने पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह के साथ मुलाकात में जेटली के साथ एक बैठक का अनुरोध किया था ताकि डीडीसीए के मसले पर चर्चा की जा सके। लेकिन इस बारे में कुछ प्रगति नहीं हुई तो उन्‍हें लगा कि डीडीसीए में भ्रष्‍टाचार के मसले से बीजेपी का कोई लेना-देना नहीं है। इसके साथ ही आजाद ने बीजेपी से उन अखबारों और मीडिया रिपोर्टस को उपलब्‍ध कराने की मांग की है जिससे यह साबित हो कि उन्‍होंने बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व पर निशाना साधा था। आजाद की ओर से पार्टी को जो चार वीडियो रिकॉर्डिंग सौंपी गई है उनमें उनकी 20 दिसंबर की प्रेस कान्‍फ्रेंस का वीडियो भी शामिल है। इस वीडियो ने उन्‍होंने सार्वजनिक तौर पर पहली बार डीडीसीए में भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाए थे।   आजाद के करीबी एक सूत्र के अनुसार, 53 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर ने अपने जवाब में दावा किया है कि उन्‍होंने पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह के साथ मुलाकात में जेटली के साथ एक बैठक का अनुरोध किया था ताकि डीडीसीए के मसले पर चर्चा की जा सके। लेकिन इस बारे में कुछ प्रगति नहीं हुई तो उन्‍हें लगा कि डीडीसीए में भ्रष्‍टाचार के मसले से बीजेपी का कोई लेना-देना नहीं है। इसके साथ ही आजाद ने बीजेपी से उन अखबारों और मीडिया रिपोर्टस को उपलब्‍ध कराने की मांग की है जिससे यह साबित हो कि उन्‍होंने बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व पर निशाना साधा था। आजाद की ओर से पार्टी को जो चार वीडियो रिकॉर्डिंग सौंपी गई है उनमें उनकी 20 दिसंबर की प्रेस कान्‍फ्रेंस का वीडियो भी शामिल है। इस वीडियो ने उन्‍होंने सार्वजनिक तौर पर पहली बार डीडीसीए में भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाए थे।
एक छोटी सी लव स्टोरी! इस लड़की ने अजनबी लड़के को मां के सामने किया KISS, फिर...
उसके बाद जो हुआ वो काफी दुखद है. जूलियाना गेविन का नंबर लेना भूल गईं और फिर दोनों वहां से चले गए. जिसके बाद जूलियाना ने ट्विटर पर लोगों को पूरी स्टोरी बताई और लोगों से उसे ढूंढने की मदद मांगी.    sis this is his mums insta and his is gav_gavv!! pic.twitter.com/p1fjyK0Yi8 — mia (@runnfromIove) January 9, 2018 लोग उनकी मदद को लग गए और गेविन को ढूंढ निकाला.  जिसके बाद जूलियाना ने लोगों का धन्यवाद दिया. उन्होंने ट्विटर पर लिखा- ''मैंने आखिरकार देख लिया कि आप लोगों ने गेविन को ढूंढ निकाला. मुझे नहीं पता उसकी गर्लफ्रेंड है या नहीं. मैं आप लोगों का शुक्रियादा अदा करना चाहूंगी कि आप लोगों ने मेरा इतना सपोर्ट किया.''   sis this is his mums insta and his is gav_gavv!! pic.twitter.com/p1fjyK0Yi8
कटहल के 15 फायदे, ये है Vegan Meat Alternative, जानें कटहल क्या है? फल या सब्जी...
कटहल के फायदे बहुत हैं. कटहल क्या है (What Is Jackfruit?). यानी कटहल फल है या सब्‍जी इस सवाल को लेकर लोगों के बीच अलग-अलग बातें हैं. कटहल का इस्तेमाल सब्जी बनाने में किया जाता है और साथ ही साथ इसे पका कर फल की तरह भी खाया जाता है. इतना ही नहीं कटहल का अचार (Kathal ka achar, Jackfruit Pickle) और कटहल के पकौड़े भी बनाए जाते हैं. कटहल स्वाद के लिए ही नहीं कटहल सेहत (Health benefits of Jackfruit Kathal) के लिए भी बहुत फायदेमंद है. कटहल में कई पौष्टिक तत्‍व होते हैं. इसमें विटामिन A, C, थाइमिन, पोटैशियम, कैल्‍शियम, राइबोफ्लेविन, आयरन, नियासिन और जिंक भरपूर मात्रा में होते हैं. इतना ही नहीं कटहल में काफी मात्रा में फाइबर भी होता है, जो पाचन तंत्र को अच्छा बनाए रखता है. कटहल के कई फायदे (Benefits of Kathal) होते हैं, तो चलिए जानते हैं इनके बारे में.  ये हैं वो 4 असरदार ड्रिंक्स जो Blood Sugar को करेंगे कंट्रोल में...   कटहल फल है या सब्‍जी इसे लेकर लोगों में मतभेद है. कोई इसे फल मानता है तो कोई इसे सब्‍जी कहता है. लेकिन कटहल कई औषधीय गुणों से भरपूर है. कटहल का वानस्पतिक नाम आर्टोकार्पस हेटेरोफिल्लस है. हम यहां आपको कटहल के 10 फायदों के बारे में बता रहे हैं-    What Is Jackfruit and Should You Eat It: कटहल फल है या सब्‍जी इसे लेकर लोगों में मतभेद है. Photo Credit: iStock   How to Deal with Exam Stress: क्यों होता है एग्‍जाम टाइम में स्ट्रेस, ये 5 आहार दूर करेंगे एग्जाम स्ट्रेस... 1. कटहल यह दिल के रोगियों के सेहतमंद माना जाता है. कटहल में पोटैशियम होता है, जो दिल की हर समस्‍या को दूर करता है, क्‍योंकि यह ब्‍लड प्रेशर को कम कर देता है.  2. कटहल अल्‍सर और पाचन संबंधी समस्‍या को दूर करता है. कब्‍ज की समस्‍या को दूर करने में भी यह बहुत फायदेमंद है. कटहल की पत्तियों की राख अल्सर के इलाज के लिए बहुत उपयोगी होती है. हरी ताजा पत्तियों को साफ धोकर सुखा लें. सूखने के बाद पत्तियों का चूरन तैयार करें. पेट के अल्सर से ग्रस्त व्यक्ति को इस चूरन को खिलाएं. अल्सर में बहुत जल्दी आराम मिलेगा. 3. कटहल में विटामिन A, C, थाइमिन, पोटैशियम, कैल्‍शियम, राइबोफ्लेविन, आयरन, नियासिन और जिंक भरपूर मात्रा में होते हैं. इतना ही नहीं कटहल में काफी मात्रा में फाइबर भी होता है, जो पाचन तंत्र को अच्छा बनाए रखता है. 4. कटहल की जड़ अस्‍थमा के रोगियों के लिए लाभदायक मानी जाती है. इसकी जड़ को पानी के साथ उबाल कर बचा हुआ पानी छान कर लेने से अस्‍थमा को कंट्रोल किया जा सकता है. थायराइड के लिए भी कटहल उत्तम है.    अनार छीलने में होती है परेशानी? जानिए ये आसान तरीके   5. कटहल में मौजूद सूक्ष्म खनिज और कॉपर थायराइड चयापचय के लिये प्रभावशाली होता है. यहां तक कि  यह बैक्‍टेरियल और वाइरल इंफेक्‍शन से भी बचाता है. 6. कटहल काफी रेशेदार होता है और इसमें भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है. यह एनीमिया दूर करता है. शरीर में ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ाता है. 7. कटहल में मौजूद मैग्‍नीशियम हड्डी में मजबूती लाता है और ऑस्‍टियोपोरोसिस की समस्‍या से बचाता है. यही नहीं इसमें विटामिन C और A पाया जाता है. यही वजह है कि शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाने में इसका कोई सानी नहीं है. 8. कटहल के छिलकों से निकलने वाला दूध अगर सूजन, घाव और कटे-फटे अंगों पर लगाया जाए तो आराम मिलता है. इसी दूध से जोड़ों पर मालिश की जाए तो जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है.   Benefits of Kathal and How To Eat It: कटहल में काफी मात्रा में फाइबर भी होता है, जो पाचनतंत्र को बेहतर बनाता है.   9. जिन लोगों की चेहरा रुखा और बेजान होता है उन लोगों को कटहल का रस अपने चेहरे पर लगाना चाहिए. इसकी मसाज तब तक करे जब तक यह सूख न जाए फिर थोड़ी देर के बाद अपना चेहरा पानी के साथ धो लें. 10. कटहल की कच्ची पत्तियों को चबाकर थूकने से मुंह के छालों में आराम मिलता है. यह छालों को ठीक कर देता है. इसमें पाए जाने वाले कई खनिज हार्मोन्स को भी नियंत्रित करते हैं.   High Blood Pressure: क्या हाई बीपी के मरीज आलू खा सकते हैं? यहां पढ़ें आलू के फायदे और नुकसान नाश्ते में बनायीं जाने वाली 10 व्यंजनों की विधियां (10 Breakfast Recipe) Low-Calorie Diet: स्नैक्स को डाइट-फ्रेंडली बनाने के लिए इस्तेमाल करें ये 5 Healthy Sandwich Spreads Diabetes Tips: भिंडी का पानी करेगा ब्लड शुगर कंट्रोल, जानें कैसे बनाएं Okra Water   11. पके हुए कटहल के पल्प को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबालकर पीने से ताजगी आती है. कटहल में विटामिन ए पाया जाता है जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है और त्वचा निखरती है.  12. कटहल के बीज का चूरन बना कर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरा साफ हो जाता है और दाग-धब्बे मिट जाते हैं.  13. झुर्रियों से निजात पाने के लिए कटहल का पेस्ट बना कर और उसमें एक चम्मच दूध मिलाकर धीरे धीरे चेहरे पर लगाना चाहिए. फिर गुलाब जल या ठंडे पानी से चेहरा साफ कर लें. नियमित रूप से ऐसा करने से चेहरे की झूर्रियों से छुटकारा मिल जाता है. 14. कटहल की जड़ अस्‍थमा के रोगियों के लिए लाभदायक मानी जाती है. इसकी जड़ को पानी के साथ उबाल कर बचा हुआ पानी छान कर लेने से अस्‍थमा को कंट्रोल किया जा सकता है.  15. थायराइड के लिए भी कटहल उत्तम है. इसमें मौजूद सूक्ष्म खनिज और कॉपर थायराइड चयापचय के लिये प्रभावशाली होता है. यहां तक कि  यह बैक्‍टेरियल और वाइरल इंफेक्‍शन से भी बचाता है. Skincare Tips: क्या है बॉलीवुड स्टार्स की Gorgeous Skin का नुस्खा...   कटहल में कई पौष्टिक तत्‍व पाए जाते हैं जैसे, विटामिन A, C, थाइमिन, पोटैशियम, कैल्‍शियम, राइबोफ्लेविन, आयरन, नियासिन और जिंक. यही नहीं इसमें खूब सारा फाइबर भी पाया जाता है. हालांकि इसके बावजूद ज्‍यादातर लोग कटहल को नॉन वेज का वेज ऑप्‍शन मानते हैं.   Jackfruit Nutrition: कटहल में कई पौष्टिक तत्‍व होते हैं.    कैसे वजन और पेट की चर्बी कम करने के लिए करें सेब के सिरके का इस्तेमाल... Weight Loss: घटेगा बैली फैट, कम होगा वजन अगर ट्राई करेंगे ये टिप्‍स लुक्स को ही खराब नहीं करती, कैंसर के खतरे को भी बढ़ाती है पेट पर अत्यधिक चर्बी... #WeightLoss: सर्द मौसम में ये 3 मसाले आएंगे काम, गायब हो जाएगा बैली फैट Weight Loss: सर्दियों में ये 5 फल करेंगे मोटापा दूर, कम होगा बैली फैट Weight Loss Tips: ये 5 आयुर्वेदिक सुपरफूड करेंगे बैली फैट को बर्न... ये हेल्‍दी होममेड ड्रिंक्‍स आपको रखेंगी फिट, बैली फैट को करेंगी कम
महिला पर्वतारोही की उपलब्धि से पीएम दंग
पर्वतारोहण में विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली अरुणाचल प्रदेश की महिला पर्वतारोही अंशु जमसेनपा को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बधाई दी है। जमसेनपा ने एवरेस्ट की चोटी पर 10 दिनों के भीतर दो बार चढ़ाई कर पर्वतारोहण का नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। वह एक ही सत्र में एवरेस्ट पर दो बार चढ़ने वाली विश्व की पहली महिला हैं। जमसेनपा की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, आपने अपनी इस उपलब्धि से पूरे भारत को गौरवान्वित किया है। मैं यह जानकर चकित हूं कि दो बच्चों की एक मां ने 10 दिनों के भीतर दो बार एवरेस्ट की चढ़ाई कर ली। प्रधानमंत्री ने जमसेनपा के साथ अपने निवास पर हुई मुलाकात में यह बातें कहीं। नई दिल्ली में जमसेनपा और अरुणाचल पर्वतारोहण और साहसिक खेल संघ (एएमएएसए) के अध्यक्ष सेरिंग वांगे ने प्रधानमंत्री से उनके आधिकारिक निवास में मुलाकात की थी। वांगे ने बुधवार को इस मुलाकात के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने जमसेनपा को प्रधानमंत्री राहत कोष से वित्तीय सहायता देने की भी पेशकश की है। वांगे चाहते हैं कि जमसेनपा को राष्ट्रीय पुरस्कार मिले, इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री से बात भी की। प्रधानमंत्री ने इसके लिए उन्हें जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कहा है।
सोनम कपूर ने इस वजह से चुना आनंद अहूजा को, National Boyfriend Day पर खुद खोला राज
A post shared by SonamKAhuja (@sonamkapoor) on Oct 3, 2018 at 6:24pm PDT A post shared by SonamKAhuja (@sonamkapoor) on Sep 21, 2018 at 11:46pm PDT
लालू का राजनीतिक अस्तित्व समाप्त : रामकृपाल
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद के एक जमाने में सबसे करीबी रहे मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रामकृपाल यादव ने बुधवार को यहां कहा कि लालू का राजनीतिक अस्तित्व समाप्त हो गया है। वह अब अनाप-शनाप बयानबाजी कर मीडिया में बने रहना चाहते हैं। खगड़िया जाने के क्रम में बेगूसराय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बिहार को विशेष राज्य के दर्जे का मुद्दा जनता के बीच जाने का माध्यम बन गया है, जबकि हकीकत यह है कि केंद्र सरकार बिहार की हरसंभव मदद कर रही है। रामकृपाल यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने बिहार के विकास योजना मद में तीन लाख 81 हजार करोड़ रुपये का आवंटन दिया है जो पिछले वर्ष से 10 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि बेगूसराय में जल्द ही बरौनी फर्टिलाइजर कारखाने का पुनर्निर्माण कार्य भी प्रारंभ किया जाएगा। स्वच्छता एवं पेयजल राज्यमंत्री यादव ने कहा कि केंद्र सरकार बिहार को भरपूर मदद कर रही है, परंतु बिहार में विकास भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक नीतीश सरकार को उखाड़ नहीं फेंका जाएगा तब तक बिहार का विकास संभव नहीं। उन्होंने कहा कि राजद का अगले विधानसभा चुनाव में सफाया हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को मोतिहारी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लालू ने कहा था कि बिहार में अगली सरकार उनकी मदद के बगैर नहीं बन सकेगी।
सांसदों को रेल टिकट बुक कराने के लिए रेलवे देगा यूनिक आईडी नंबर
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बुधवार को बताया कि रेलवे सभी सांसदों को एक विशिष्ट पहचान संख्या देगा जिसके माध्यम से वे रेलवे टिकट बुकिंग करा सकेंगे और इससे एक से अधिक टिकटों की बुकिंग में किसी तरह के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा. प्रभु ने प्रश्नकाल में कहा कि संसद सदस्यों द्वारा उनके नाम से कराई जाने वाली मल्टीपल बुकिंग के कुछ मामलों का पता चला है. बहरहाल फर्जी तरीके से बुकिंग का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है. उन्होंने कहा, ‘‘लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्यों को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी जिसके माध्यम से वे रेलवे टिकट बुकिंग करा सकेंगे और इससे एक से अधिक टिकटों की बुकिंग में किसी तरह के दुरपयोग को रोका जा सकेगा.’’ प्रभु ने कहा कि किसी ने अगर दुरुपयोग करने का प्रयास किया तो सांसद के मोबाइल नंबर पर एक मैसेज आएगा. इससे दुरुपयोग की समस्या समाप्त होगी. दुरुपयोग करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी. एक से अधिक ट्रेन में टिकट बुकिंग कराने के बाद टिकट रद्द कराने पर रद्दीकरण शुल्क लोकसभा सचिवालय द्वारा नहीं बल्कि सांसद द्वारा अपनी जेब से दिये जाने के किसी तरह के विचार के कीर्ति आजाद के सवाल पर प्रभु ने कहा कि इस बारे में सदन जो भी निर्णय लेगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी. हालांकि आजाद के प्रश्न के दौरान कई सदस्यों ने विरोध दर्ज कराया. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी कहा, ‘‘कोई मजे के लिए टिकट बुक नहीं करता.’’ प्रभु ने ई-टिकट बुकिंग में अनधिकृत दलालों के रैकेट के सक्रिय होने की बात स्वीकारी और कहा कि मंत्रालय इस पर रोकथाम के प्रभावी कदम उठा रहा है. प्रभु ने कहा कि तकनीक से समाधान खोजे जा रहे हैं लेकिन इससे चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं. हम इसलिए तकनीक को लगातार उन्नत करने के लिए प्रयासरत हैं.टिप्पणियां उन्होंने यह भी बताया कि ट्रेन टिकट निरीक्षकों (टीटीई) को हैंडहेल्ड मशीनें दी जा रहीं हैं जिनसे उन्हें ट्रेन में खाली सीटों की मौजूदा स्थिति पता चल सकेगी. यह अभी शुरुआती चरण में है. उन्होंने कहा कि ई-टिकटों की मांग और आपूर्ति में अंतर के कारण समस्या है जिसे खत्म करने के लिए क्षमता विस्तार के प्रयास किये जा रहे हैं. दो-तीन साल में यह काम पूरा हो जाएगा. रेल मंत्री ने अपने लिखित जवाब में बताया कि ऑनलाइन टिकट बुक कराने के लिए अपने बैंक-क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं करने वालों के लिए पायलट आधार पर ‘कैश ऑन डिलीवरी’ भुगतान गेटवे का अन्य तरीका शुरू किया गया है. उन्होंने बताया कि एंड्रॉयड, आईओएस, विंडोज और ब्लैकबेरी में भी मोबाइल एप्लीकेशन विकसित किये गये हैं. इन मोबाइल एप्लीकेशनों के जरिये प्रतिदिन औसतन लगभग 30,000 टिकटें बुक की जाती हैं. प्रभु ने प्रश्नकाल में कहा कि संसद सदस्यों द्वारा उनके नाम से कराई जाने वाली मल्टीपल बुकिंग के कुछ मामलों का पता चला है. बहरहाल फर्जी तरीके से बुकिंग का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है. उन्होंने कहा, ‘‘लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्यों को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी जिसके माध्यम से वे रेलवे टिकट बुकिंग करा सकेंगे और इससे एक से अधिक टिकटों की बुकिंग में किसी तरह के दुरपयोग को रोका जा सकेगा.’’ प्रभु ने कहा कि किसी ने अगर दुरुपयोग करने का प्रयास किया तो सांसद के मोबाइल नंबर पर एक मैसेज आएगा. इससे दुरुपयोग की समस्या समाप्त होगी. दुरुपयोग करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी. एक से अधिक ट्रेन में टिकट बुकिंग कराने के बाद टिकट रद्द कराने पर रद्दीकरण शुल्क लोकसभा सचिवालय द्वारा नहीं बल्कि सांसद द्वारा अपनी जेब से दिये जाने के किसी तरह के विचार के कीर्ति आजाद के सवाल पर प्रभु ने कहा कि इस बारे में सदन जो भी निर्णय लेगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी. हालांकि आजाद के प्रश्न के दौरान कई सदस्यों ने विरोध दर्ज कराया. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी कहा, ‘‘कोई मजे के लिए टिकट बुक नहीं करता.’’ प्रभु ने ई-टिकट बुकिंग में अनधिकृत दलालों के रैकेट के सक्रिय होने की बात स्वीकारी और कहा कि मंत्रालय इस पर रोकथाम के प्रभावी कदम उठा रहा है. प्रभु ने कहा कि तकनीक से समाधान खोजे जा रहे हैं लेकिन इससे चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं. हम इसलिए तकनीक को लगातार उन्नत करने के लिए प्रयासरत हैं.टिप्पणियां उन्होंने यह भी बताया कि ट्रेन टिकट निरीक्षकों (टीटीई) को हैंडहेल्ड मशीनें दी जा रहीं हैं जिनसे उन्हें ट्रेन में खाली सीटों की मौजूदा स्थिति पता चल सकेगी. यह अभी शुरुआती चरण में है. उन्होंने कहा कि ई-टिकटों की मांग और आपूर्ति में अंतर के कारण समस्या है जिसे खत्म करने के लिए क्षमता विस्तार के प्रयास किये जा रहे हैं. दो-तीन साल में यह काम पूरा हो जाएगा. रेल मंत्री ने अपने लिखित जवाब में बताया कि ऑनलाइन टिकट बुक कराने के लिए अपने बैंक-क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं करने वालों के लिए पायलट आधार पर ‘कैश ऑन डिलीवरी’ भुगतान गेटवे का अन्य तरीका शुरू किया गया है. उन्होंने बताया कि एंड्रॉयड, आईओएस, विंडोज और ब्लैकबेरी में भी मोबाइल एप्लीकेशन विकसित किये गये हैं. इन मोबाइल एप्लीकेशनों के जरिये प्रतिदिन औसतन लगभग 30,000 टिकटें बुक की जाती हैं. प्रभु ने कहा कि किसी ने अगर दुरुपयोग करने का प्रयास किया तो सांसद के मोबाइल नंबर पर एक मैसेज आएगा. इससे दुरुपयोग की समस्या समाप्त होगी. दुरुपयोग करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी. एक से अधिक ट्रेन में टिकट बुकिंग कराने के बाद टिकट रद्द कराने पर रद्दीकरण शुल्क लोकसभा सचिवालय द्वारा नहीं बल्कि सांसद द्वारा अपनी जेब से दिये जाने के किसी तरह के विचार के कीर्ति आजाद के सवाल पर प्रभु ने कहा कि इस बारे में सदन जो भी निर्णय लेगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी. हालांकि आजाद के प्रश्न के दौरान कई सदस्यों ने विरोध दर्ज कराया. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी कहा, ‘‘कोई मजे के लिए टिकट बुक नहीं करता.’’ प्रभु ने ई-टिकट बुकिंग में अनधिकृत दलालों के रैकेट के सक्रिय होने की बात स्वीकारी और कहा कि मंत्रालय इस पर रोकथाम के प्रभावी कदम उठा रहा है. प्रभु ने कहा कि तकनीक से समाधान खोजे जा रहे हैं लेकिन इससे चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं. हम इसलिए तकनीक को लगातार उन्नत करने के लिए प्रयासरत हैं.टिप्पणियां उन्होंने यह भी बताया कि ट्रेन टिकट निरीक्षकों (टीटीई) को हैंडहेल्ड मशीनें दी जा रहीं हैं जिनसे उन्हें ट्रेन में खाली सीटों की मौजूदा स्थिति पता चल सकेगी. यह अभी शुरुआती चरण में है. उन्होंने कहा कि ई-टिकटों की मांग और आपूर्ति में अंतर के कारण समस्या है जिसे खत्म करने के लिए क्षमता विस्तार के प्रयास किये जा रहे हैं. दो-तीन साल में यह काम पूरा हो जाएगा. रेल मंत्री ने अपने लिखित जवाब में बताया कि ऑनलाइन टिकट बुक कराने के लिए अपने बैंक-क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं करने वालों के लिए पायलट आधार पर ‘कैश ऑन डिलीवरी’ भुगतान गेटवे का अन्य तरीका शुरू किया गया है. उन्होंने बताया कि एंड्रॉयड, आईओएस, विंडोज और ब्लैकबेरी में भी मोबाइल एप्लीकेशन विकसित किये गये हैं. इन मोबाइल एप्लीकेशनों के जरिये प्रतिदिन औसतन लगभग 30,000 टिकटें बुक की जाती हैं. हालांकि आजाद के प्रश्न के दौरान कई सदस्यों ने विरोध दर्ज कराया. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी कहा, ‘‘कोई मजे के लिए टिकट बुक नहीं करता.’’ प्रभु ने ई-टिकट बुकिंग में अनधिकृत दलालों के रैकेट के सक्रिय होने की बात स्वीकारी और कहा कि मंत्रालय इस पर रोकथाम के प्रभावी कदम उठा रहा है. प्रभु ने कहा कि तकनीक से समाधान खोजे जा रहे हैं लेकिन इससे चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं. हम इसलिए तकनीक को लगातार उन्नत करने के लिए प्रयासरत हैं.टिप्पणियां उन्होंने यह भी बताया कि ट्रेन टिकट निरीक्षकों (टीटीई) को हैंडहेल्ड मशीनें दी जा रहीं हैं जिनसे उन्हें ट्रेन में खाली सीटों की मौजूदा स्थिति पता चल सकेगी. यह अभी शुरुआती चरण में है. उन्होंने कहा कि ई-टिकटों की मांग और आपूर्ति में अंतर के कारण समस्या है जिसे खत्म करने के लिए क्षमता विस्तार के प्रयास किये जा रहे हैं. दो-तीन साल में यह काम पूरा हो जाएगा. रेल मंत्री ने अपने लिखित जवाब में बताया कि ऑनलाइन टिकट बुक कराने के लिए अपने बैंक-क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं करने वालों के लिए पायलट आधार पर ‘कैश ऑन डिलीवरी’ भुगतान गेटवे का अन्य तरीका शुरू किया गया है. उन्होंने बताया कि एंड्रॉयड, आईओएस, विंडोज और ब्लैकबेरी में भी मोबाइल एप्लीकेशन विकसित किये गये हैं. इन मोबाइल एप्लीकेशनों के जरिये प्रतिदिन औसतन लगभग 30,000 टिकटें बुक की जाती हैं. उन्होंने यह भी बताया कि ट्रेन टिकट निरीक्षकों (टीटीई) को हैंडहेल्ड मशीनें दी जा रहीं हैं जिनसे उन्हें ट्रेन में खाली सीटों की मौजूदा स्थिति पता चल सकेगी. यह अभी शुरुआती चरण में है. उन्होंने कहा कि ई-टिकटों की मांग और आपूर्ति में अंतर के कारण समस्या है जिसे खत्म करने के लिए क्षमता विस्तार के प्रयास किये जा रहे हैं. दो-तीन साल में यह काम पूरा हो जाएगा. रेल मंत्री ने अपने लिखित जवाब में बताया कि ऑनलाइन टिकट बुक कराने के लिए अपने बैंक-क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं करने वालों के लिए पायलट आधार पर ‘कैश ऑन डिलीवरी’ भुगतान गेटवे का अन्य तरीका शुरू किया गया है. उन्होंने बताया कि एंड्रॉयड, आईओएस, विंडोज और ब्लैकबेरी में भी मोबाइल एप्लीकेशन विकसित किये गये हैं. इन मोबाइल एप्लीकेशनों के जरिये प्रतिदिन औसतन लगभग 30,000 टिकटें बुक की जाती हैं. रेल मंत्री ने अपने लिखित जवाब में बताया कि ऑनलाइन टिकट बुक कराने के लिए अपने बैंक-क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं करने वालों के लिए पायलट आधार पर ‘कैश ऑन डिलीवरी’ भुगतान गेटवे का अन्य तरीका शुरू किया गया है. उन्होंने बताया कि एंड्रॉयड, आईओएस, विंडोज और ब्लैकबेरी में भी मोबाइल एप्लीकेशन विकसित किये गये हैं. इन मोबाइल एप्लीकेशनों के जरिये प्रतिदिन औसतन लगभग 30,000 टिकटें बुक की जाती हैं.